
अयोध्या में दिवाली के भव्य आयोजन के बाद सरकार अब बनारस के घाटों पर भी ऐसा ही प्रकाश उत्सव आयोजित करने की तैयारी में है. 29 नवंबर को देव दिवाली के दिन बनारस के घाटों पर अयोध्या की छाप दिखाई देगी.
जिस तरीके से अयोध्या में दिवाली के 1 दिन पहले इस साल भव्यता से दिवाली मनाई गई, कुछ उसी अंदाज में 29 नवंबर को वाराणसी में देव दिवाली मनाई जाएगी.
प्रधानमंत्री मोदी ने जताई थी इच्छा
सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अयोध्या की दिवाली देखने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सफल आयोजन की बधाई दी थी और ऐसी ही भव्यता से बनारस के घाटों पर देव दिवाली आयोजित करने की इच्छा भी जताई थी.
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इसके बाद सूचना विभाग बनारस में भव्य देव दिवाली की तैयारी में जुट गया है. अब बनारस के लोगों को गंगा किनारे अयोध्या जैसी दिवाली 29 नवंबर को दिखाई देगी, जिसके लिए तैयारियां जोर पकड़ने लगी हैं.
देव-दिवाली के लिए पहली मीटिंग बनारस में 17 नवंबर को हुई, जिसमें इस बात पर चर्चा हुई कि कैसे इसे भव्य और दिव्य बनाया जाए.
लेजर शो होगा खास आकर्षण
वाराणसी के घाटों पर इस बार का लेजर शो लोगों का आकर्षण का केंद्र हो सकता है. जिस तरीके से अयोध्या के लेजर शो ने दुनिया को उसकी दिवाली की भव्यता से रूबरू कराया, कुछ वैसी ही कोशिश इस बार बनारस के घाटों पर भी होगी.
दरअसल, पिछले 4 सालों से अयोध्या में दिवाली का आयोजन हो रहा है और साल-दर-साल इसकी भव्यता बढ़ती जा रही है. इस बार आतिशबाजी की जगह शानदार लेजर शो का आयोजन किया गया था. ये शो विजक्राफ्ट कंपनी ने आयोजित किया.
यही कंपनी अब बनारस की देव दिवाली में भी भव्य लेजर शो आयोजित कर सकती है. योगी सरकार चाहती है कि जिस तरीके से अयोध्या की दिव्य दिवाली दुनिया ने देखी, ऐसी ही दिव्य देव दिवाली बनारस के घाटों पर भी दिखाई दे.
प्रधानमंत्री हो सकते हैं शामिल
माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री मोदी खुद देव दिवाली के कार्यक्रम में जुड़ेंगे. हालांकि, बनारस के घाटों पर देव दिवाली पहले से ही हर साल बड़े पैमाने पर मनाई जाती है और दुनिया भर से लोग इसे देखने आते हैं, लेकिन इस बार यह आयोजन और भी खास हो सकता है क्योंकि खुद प्रधानमंत्री मोदी चाहते हैं कि अयोध्या की तर्ज पर बनारस की देव दिवाली भी दिव्य और भव्य दिखाई दे.
अयोध्या में पिछले 4 सालों से दिवाली मनाई जा रही है, लेकिन इस साल सबसे भव्य आयोजन हुआ. कोरोना संकट के मद्देनजर इस बार डिजिटल और वर्चुअल तरीके का भी इस्तेमाल हुआ. इस सबसे ज्यादा चर्चा में लेजर शो रहा जिसने लोगों का ध्यान खींचा.
इधर राम मंदिर, उधर विश्वनाथ कॉरिडोर
इस बार अयोध्या के भव्य आयोजन के पीछे राम मंदिर निर्माण की शुरुआत भी एक बड़ी वजह रही. कुछ इसी तरह अगले साल वाराणसी का बाबा विश्वनाथ कॉरिडोर भी लोगों के लिए खुल जाएगा.
अयोध्या में मंदिर निर्माण के पहले जिस तरह भव्य दिवाली मनाई गई, उसी तरह वाराणसी में बाबा विश्वनाथ कॉरिडोर खुलने से पहले सरकार वहां की देव दिवाली को भी बड़ा स्वरूप देना चाहती है.
देव दिवाली का धार्मिक-सांस्कृतिक महत्व
माना जाता है कि देव दिवाली के दिन सभी देवता बनारस के घाटों पर आते हैं. कार्तिक पूर्णिमा के दिन भगवान शिव ने त्रिपुरासुर नाम के राक्षस का वध किया था. त्रिपुरासुर के वध के बाद सभी देवी-देवताओं ने मिलकर खुशी मनाई थी.
काशी में कार्तिक पूर्णिमा के दिन देव दिवाली मनाने की परंपरा सदियों से चली आ रही है. इस दिन दीपदान करने का विशेष महत्व होता है. माना जाता है भगवान शंकर ने खुद देवताओं के साथ गंगा के घाट पर दिवाली मनाई थी, इसीलिए देव दिवाली का धार्मिक आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व भी बढ़ जाता है.
जगमगाएंगे 20-25 लाख दीये
उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग के ज्वाइंट डायरेक्टर अविनाश मिश्रा ने बताया कि इस बार देव दीपावली में लगभग 20-25 लाख दीयों से काशी के घाट सजाए जाएंगे.
मिश्रा के मुताबिक, इस वर्ष पिछले वर्षों से बेहतर और अच्छी देव दीपावली मनाई जाएगी और एक बड़ा प्रकाश उत्सव आयोजित होगा. देव दीपावली के दिन बड़ा सांस्कृतिक कार्यक्रम भी होगा. पिछले वर्षों से अलग हटकर इस बार काफी कुछ देखने को मिलेगा. गंगा आरती में भी ऐसी व्यवस्था होगी कि लोग सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें और दूरी को मेंटेन करें.