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योगी सरकार 2.0 के टॉप 10 कैबिनेट मंत्री, जिन्हें मिले हैं पावरफुल मंत्रालय

उत्तर प्रदेश की सत्ता में वापसी कर इतिहास रचने वाली योगी आदित्यनाथ सरकार में मंत्रियों के विभागों का बंटवारा हो गया है. सीएम योगी ने खुद 34 विभाग अपने पास रखें तो डिप्टी सीएम बनने वाले केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है.

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योगी आदित्यनाथ, केशव प्रसाद मौर्य, ब्रजेश पाठक
योगी आदित्यनाथ, केशव प्रसाद मौर्य, ब्रजेश पाठक
स्टोरी हाइलाइट्स
  • केशव प्रसाद मौर्य को पास 6 मंत्रालय का जिम्मा
  • ब्रजेश पाठक को पूरा स्वास्थ्य मंत्रालय का जिम्मा
  • दयाशंकर सिंह और बेबीरानी मौर्य भी पॉवरफुल

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने सभी मंत्रियों को पद देकर उनका सियासी कद तय कर दिया है. सीएम योगी ने गृह, सतर्कता, नागरिक सुरक्षा और राजस्व सहित कुल 34 विभाग अपने पास रखे हैं तो डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य और उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक को भी विभाग आवंटित कर दिए गए. ऐसे में योगी सरकार 2.0 में सियासी नजरिए से महत्वपूर्ण और पावरफुल माने जाने वाले मंत्रालय की जिम्मेदारी अन्य वरिष्ठ नेताओं को सौंपी गई है. योगी सरकार में वो कौन टॉप 10 मंत्री है, जिनके पास हाई प्रोफाइल माने वाले मंत्रालय का जिम्मा है. 

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1. केशव प्रसाद मौर्य
योगी सरकार में नंबर दो की हैसियत केशव प्रसाद मौर्य की है, जिन्हें चुनाव हारने के बाद भी डिप्टी सीएम बनाया गया है. इस बार केशव मौर्य से पीडब्ल्यूडी मंत्रालय लेकर ग्राम्य विकास और समग्र ग्राम विकास, ग्रामीण अभियंत्रण विभाग का जिम्मा दिया गया है. इसके अलावा खाद्य प्रसंस्करण, मनोरंजन कर एवं सार्वजनिक उद्यम विभाग बरकरार रखा गया है तो अभी तक सीएम योगी के पास रहे राष्ट्रीय एकीकरण विभाग को केशव प्रसाद मौर्य के हिस्से में आया है. केशव मौर्य को पीडब्ल्यूडी से थोड़ा कम महत्व का माने जाने वाले ग्राम्य विकास विभाग की जिम्मेदारी दी गई है. हालांकि यह विभाग ग्रामीण आबादी की जीवन व जीविका से सीधे तौर पर जुड़ा है. पीएम सड़क योजना जैसी बड़ी योजना उनके दायरे में आएगी. ऐसे वह अपनी सक्रियता से इस विभाग में अलग छाप छोड़ सकते हैं. 

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2. ब्रजेश पाठक 
बीजेपी के दिग्गज नेता दिनेश शर्मा की जगह डिप्टी सीएम बनाए गए ब्रजेश पाठक को अब पूरे स्वास्थ्य मंत्रालय का जिम्मा दे दिया गया है. योगी सरकार के पिछले कार्यकाल में उनके पास न्याय व ग्रामीण अभियंत्रण विभाग की जिम्मा था, लेकिन अब उन्हें चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा, परिवार कल्याण मातृ एवं शिशु कल्याण जैसा महकमा एक साथ देकर उनके पद के साथ कद को भी तवज्जो दी गई है. हालांकि, वो 2017 में बसपा छोड़कर बीजेपी में आए थे. इसके बावजूद योगी सरकार में उन्हें सबसे अहम मंत्रालयों का कार्यभार दिया गया है. 

3. जितिन प्रसाद 
योगी सरकार के दूसरे कार्यकाल में सबसे ज्यादा चर्चा जितिन प्रसाद को लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) मंत्री बनाए जाने के चलते हो रही है. जितिन प्रसाद का सियासी कद बीजेपी में तेजी से बढ़ा है जबकि उन्होंने अभी कांग्रेस से बीजेपी में आए हुए एक साल भी पूरे नहीं हुए. इसके बावजूद उन्हें पीडब्ल्यूडी जैसे भारी भरकम और मलाईदार माने जाने वाले मंत्रालय का जिम्मा सौंपा गया है. पीडब्ल्यूडी विभाग अधिकतर राज्य सरकार में नंबर दो की हैसियत रखने वाले नेताओं के पास ही रहा है. जितिन से पहले केशव प्रसाद मौर्य संभाल रहे थे जबकि इससे पहले सपा सरकार में शिवपाल यादव और बसपा सरकार में नसीमुद्दीन सिद्दीकी के पास पीडब्ल्यूडी मंत्री हुआ करता था. ऐसे में अब जितिन प्रसाद का योगी सरकार में सियासी कद का अंदाजा लगाया जा सकता है. 

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4. अरविंद कुमार शर्मा 
नौकरशाह की नौकरी छोड़कर सियासत में आए पीएम मोदी के करीबी माने जाने कैबिनेट मंत्री एके शर्मा को योगी सरकार 2.0 में सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण विभाग दिए गए हैं. एके शर्मा को यूपी का ऊर्जा और नगर विकास मंत्री बनाकर सीएम योगी ने दोहरी जिम्मेदारी सौंपी है. हाल के दिनों में ये दोनों विभाग किसी एक मंत्री के पास नहीं रहे हैं. एक दौर में लालजी टंडन जैसे भाजपा के कद्दावर नेता के पास ही ऊर्जा और नगर विकास विभाग हुआ करते थे. इस तरह से एके शर्मा के कद को देखते हुए उन्हें दोनों विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई है. ऐसे में योगी सरकार के पावरफुल मंत्रियों में उनकी गिनती की जा रही है.  

5. स्वतंत्र देव सिंह 
उत्तर प्रदेश बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह की योगी कैबिनेट में फिर से वापसी हुई है. प्रदेश अध्यक्ष बनने से पहले पिछली सरकार में स्वतंत्र देव सिंह परिवहन मंत्री का दायित्व संभाल चुके हैं. इस बार उन्हें प्रोन्नत किया गया. सिंचाई, जल शक्ति तथा बाढ़ नियंत्रण का जिम्मा सौंपा गया है. इस तरह से अब उनकी जिम्मेदारी प्रधानमंत्री की महत्वाकांक्षी हर घर नल योजना को अमलीजामा पहनाने की होगी. पिछली कैबिनेट में महेंद्र सिंह जलशक्ति व बाढ़ नियंत्रण मंत्री थे. महेंद्र की गिनती मुख्यमंत्री के विश्वस्त चुनिंदा मंत्रियों में होती हैं और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्रदेव सिंह भी मुख्यमंत्री के गुडबुक में माने जाते हैं. 

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6. बेबीरानी मौर्य
उत्तराखंड राज्यपाल के पद से इस्तीफा देकर सक्रिय राजनीति में कदम रखने वाले बीजेपी की जाटव चेहरा माने जाने वाली बेबी रानी मौर्य को महिला कल्याण, बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग का जिम्मा दिया है. इससे पहले योगी सरकार 1.0 में यह जिम्मेदारी सांसद बनने से पहले डा. रीता बहुगुणा जोशी तो उनके बाद स्वतंत्र प्रभार के राज्यमंत्री के रूप में स्वाती सिंह संभाल चुकी हैं, लेकिन अब जिम्मा बेबीरानी मौर्य के कंधों पर है. बीजेपी उन्हें जाटव चेहरे के रूप में मंत्रिमंडल में शामिल किया है और बसपा प्रमुख मायावती के विकल्प के रूप में आगे बढ़ा रही है. ऐसे में बड़े विभागों में शामिल बाल विकास एवं पुष्टाहार तथा महिला कल्याण जैसा महकमा उन्हें दिया गया है, जिससे उनके सियासी कद का अंदाजा लगाया जा सकता है. 

7. योगेंद्र उपाध्याय
योगी सरकार में पहली बार कैबिनेट मंत्री बने योगेंद्र उपाध्याय को अहम विभागों का जिम्मा सौंपा गया हैं. योगी सरकार के पहले कार्यकाल में डिप्टीसीएम रहे दिनेश शर्मा के पास रहे उच्च शिक्षा जैसा बड़ा महकमा इस बार योगेंद्र उपाध्याय को सौंप कर राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 को लागू करने का साथ शिक्षा में संघ परिवार का एजेंडा लागू करने की कमान सौंपी है. योगेंद्र उपाध्याय को तीन विभागों की जिम्मेदारी मिली है, जिनमें उच्च शिक्षा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग की जिम्मेदारी संभालेंगे. 

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8. सुरेश खन्ना 
बीजेपी के दिग्गज नेता और 9वीं बार विधायक बने सुरेश कुमार खन्ना को वरिष्ठता के आधार पर सिर्फ कैबिनेट में शामिल नहीं किया गया बल्कि उन्हें अहम विभाग की जिम्मा भी सौंपा गया है. योगी सरकार 2.0 मंत्रिमंडल में सुरेश खन्ना को वित्त और संसदीय कार्य मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई है जबकि पहले कार्यकाल में उनके पास इन दोनों विभागों के अलावा चिकित्सा शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी हुआ करती थी. इस बार चिकित्सा शिक्षा विभाग सुरेश खन्ना से लेकर डिप्टीसीएम सुरेश खन्ना को सौंप दी गई है. इसके बावजूद उनके पास जिन दोनों विभागों का जिम्मा है, वो काफी महत्वपूर्ण हैं. सरकार के बजट से लेकर विधानसभा की कार्रवाई को बेहतर चलाने का जिम्मा होगा. 

9. भूपेंद्र चौधरी 
योगी सरकार ने पश्चिमी यूपी में जाट समुदाय पर अपनी पकड़ बनाए रखने के लिए भूपेंद्र चौधरी के एक बार फिर से कैबिनेट में ही जगह नहीं दी बल्कि पंचायती राज्य मंत्रालय का भी जिम्मा सौंपा है. भूपेंद्र सिंह चौधरी के पिछले मंत्रिमंडल के विभाग बनाए रखकर उनके सियासी कद व काडर का महत्व बरकरार रखा गया है. मोदी और योगी सरकार जिस तरह से ग्रामीण वोटों पर खास फोकस कर रखा है, उस लिहाज से पंचायती राज्य मंत्रालय काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है. 

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10. दयाशंकर सिंह 
योगी सरकार में पहली बार स्वतंत्र प्रभार राज्यमंत्री मंत्री बने दयाशंकर सिंह को परिवाहन मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई है. दयाशंकर सिंह पहली बार विधायक बने और उन्हें कैबिनेट में शामिल कर लिया गया और परिवहन जैसा महकमा देकर महत्व बनाए रखा गया. दयाशंकर सिंह संगठन से जुड़े रहे हैं और दूसरे दलों के नेताओं को बीजेपी में शामिल कराने का जिम्मा उन्हें मिला था, जिसे बखूबी तरीके से निभाया. 

 

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