scorecardresearch
 

यूपी जिला पंचायत चुनाव: 18 सीटों पर एक ही उम्मीदवार, बाकी 57 जिलों में होगा असली वार

उत्तर प्रदेश जिला पंचायत अध्यक्ष के पद पर 18 जिलों में एक ही प्रत्याशी का नामांकन वैध पाया गया है, जिसके चलते इनका निर्विरोध चुना जाना तय है. ऐसे में अब सूबे की बची हुई 57 जिला पंचायत सीटों पर चुनावी घमासान होने के आसार बढ़ गए हैं, क्योंकि बीजेपी ने 65 प्लस का टारगेट रखा है.

Advertisement
X
अखिलेश यादव और सीएम योगी आदित्यनाथ
अखिलेश यादव और सीएम योगी आदित्यनाथ
स्टोरी हाइलाइट्स
  • बीजेपी के 17 जिला पंचायत निर्विरोध चुने जाने तय
  • यूपी के 57 जिला पंचायत पर होगा सियासी संग्राम
  • रायबरेली सीट पर कांग्रेस को सपा ने दिया वॉकओवर

उत्तर प्रदेश के जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में 75 में से 18 जिलों में एक ही उम्मीदवार के मैदान में होने से उनका निर्विरोध चुना जाना तय है. इन 17 जिलों में सत्ताधारी बीजेपी ने कब्जा जमाया है जबकि सपा महज इटावा में अपने उम्मीदवार को निर्विरोध जिताने में सफल रही है. सूबे की अब बची हुई 57 जिला पंचायत सीटों पर चुनावी घमासान होने के आसार बढ़ गए हैं, क्योंकि बीजेपी ने 65 प्लस का टारगेट रखा है. जिला पंचायत के नामांकन में जिस तरह से विपक्षी दलों के प्रस्तावक ही ऐन वक्त पर गायब हो गए या फिर बीजेपी के पाले में खड़े दिखे उससे जाहिर है कि अभी तो यह सिर्फ झांकी है, यूपी में पूरा सियासी खेल बाकी है. 

Advertisement

18 जिलों में से 17 पर बीजेपी निर्विरोध

राज्य निर्वाचन आयुक्त के मुताबिक जिला पंचायत अध्यक्ष के पद पर सूबे के 18 जिलों में एक ही प्रत्याशी का नामांकन वैध पाया गया है. यह जिले मेरठ, गाजियाबाद, गौतमबुद्धनगर, बुलंदशहर, अमरोहा,मुरादाबाद, आगरा, इटावा, ललितपुर, झांसी, बांदा, चित्रकूट, श्रावस्ती, बलरामपुर, गोंडा, गोरखपुर, मऊ और वाराणसी हैं. इस आधार पर यह मान सकते हैं कि इन जिलों के उम्मीदवारों का निर्विरोध निर्वाचित होना तय है. जिला पंचायत अध्यक्ष के नामांकन में सत्ताधारी बीजेपी का चुनावी प्रबंधन विपक्षी दलों पर भारी पड़ा और 17 जिलों में अपना कब्जा बनाया है. हालांकि, विपक्ष चुनाव में सत्ता के दुरुपयोग का आरोप लगा रहा है.

57 जिला पंचायत पर होगा सियासी घमासान

दरअसल, जिला पंचायत अध्यक्ष के नामांकन में विपक्ष ने कई जिलों में आरोप लगाया कि उसके उम्मीदवारों को पर्चा ही नहीं दाखिल करने दिया गया. वाराणसी में आरोप लगाया गया कि वहां गैर बीजेपी समर्थित उम्मीदवार का पर्चा इसलिए खारिज कर दिया गया, क्योंकि नोटरी लाइसेंस रिन्यू नहीं था. ऐसे में जिन बचे हुए 57 जिलों में चुनाव होने हैं, वहां मोर्चेबंदी शुरू कर दी गई है, जहां 29 नवंबर को नामांकन वापस लेने की तारीख है. 

Advertisement

सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने ट्वीट कर कहा कि गोरखपुर व अन्य जगह जिस तरह बीजेपी सरकार ने जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में समाजवादी पार्टी के प्रत्याशियों को नामांकन करने से रोका है. वो हारी हुई बीजेपी का चुनाव जीतने का नया प्रशासनिक हथकंडा है. बीजेपी जितने पंचायत अध्यक्ष बनाएगी, जनता विधानसभा में उन्हें उतनी सीट भी नहीं देगी. हालांकि,  सपा ने सत्ता में रहते हुए 36 जिला पंचायत अध्यक्ष की सीट पर निर्विरोध जीत दर्ज की थी और कुल 63 जिलों में अपना कब्जा जमाया था.  

यूपी में जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में 18 सीटों के निर्विरोध के बाद असल लड़ाई अभी बाकी बचे 57 जिला पंचायत सीटों पर है, जहां 3 जुलाई को वोटिंग होनी है. यूपी की बची 57 जिलों में से 41 जिले ऐसे है, जहां केवल दो ही उम्मीदवार मैदान में हैं. एक तरह से इन सीटों पर सीधी टक्कर होगी. ऐसे में दूसरे दलों के या निर्दलीय सदस्यों पर जोर-आजमाइश के जरिए अपने-अपने पाले में लाने की कवायद चल रही है. प्रलोभनों से अपने पाले में लाने का सिलसिला जोरों पर है तो न मानने वालों के सदस्यों को साधने के लिए दूसरे तरीके भी आजमाए जा रहे हैं. 

बीजेपी का 65 प्लस का टारगेट

Advertisement

उत्तर प्रदेश में बीजेपी ने जिला पंचायत अध्यक्ष के लिए 65 प्लस का टारगेट रखा है, जिसे हासिल करने की बाजीगरी में पार्टी जुटी है. सूबे में पिछले महीने आए पंचायत चुनावों के नतीजों में हारकर तीसरे नंबर पर पहुंच गई बीजेपी अब हर हाल में जिला पंचायत अध्यक्षों की कुर्सी हथियाने में जुटी है. हालात इतने बिगड़ गए हैं कि राज्य निर्वाचन आयोग ने बाकायदा नोटिस जारी कर एटा में जिला पंचायत सदस्यों को डराने-धमकाने के मामले में जिलाधिकारी और पुलिस कप्तान को चेतावनी तक जारी कर दी है. 

कौशांबी जिला पंचायत अध्यक्ष पद हेतु बीजेपी से कल्पना सोनकर और सपा से विज्मा दिवाकर ने नामांकन दाखिल किया है. वहीं, बलिया में जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए भाजपा की सुप्रिया चौधरी व सपा से आनन्द चौधरी ने अपना नामांकन पत्र दाखिल किया है. सपा उम्मीदवार को सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी ने अपना समर्थन दिया है. 

रायबरेली में कांग्रेस को सपा का वॉकओवर

रायबरेली जिला पंचायत के लिए कांग्रेस से आरती सिंह मैदान में है तो बीजेपी से रंजना चौधरी किस्मत आजमा रही है. सपा ने रायबरेली में सबसे ज्यादा सदस्य जीतकर भी कांग्रेस को समर्थन किया है. हालांकि, कांग्रेस यूपी में महज एक जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव लड़ रही है. पिछले दो बार से कांग्रेस इस सीट पर काबिज रही है, लेकिन दिनेश प्रताप सिंह के बीजेपी में चले जाने से उसका वर्चस्व खत्म हो गया था. अमेठी जिला पंचायत अध्यक्ष के लिए बीजेपी से रूप राजेश अग्रहरि ने नामांकन पत्र दाखिल किया जबकि सपा से गौरीगंज के पार्टी विधायक राकेश प्रताप सिंह की पत्नी शीलम सिंह ने मैदान में है. 

Advertisement

गाजीपुर और बलिया में सीधी फाइट
यूपी के गाजीपुर में बीजेपी की सपना सिंह और सपा की कुसुमलता यादव के अलावा रेखा ने जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए नामांकन पत्र दाखिल किया है. बदायूं में बाहुबली व पूर्व विधायक डीपी यादव के भतीजे की पत्नी वर्षा यादव ने भाजपा से, तो सपा से पूर्व विधायक सिनोद शाक्य की पत्नी सुनीता शाक्य ने नामांकन पत्र दाखिल किया है. फिरोजाबाद के जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए सपा से रुचि यादव और भाजपा प्रत्याशी हर्षिता सिंह के बीच सीधा मुकाबला है. वहीं, जौनपुर जिला पंचायत की सीट बीजेपी ने अपने सहयोगी अपना दल (एस) को दो दिया है, जहां पर कांटे का मुकबाला होने का आसार है. 

बागपत में हुआ ऐसा हुआ सियासी खेल
बागपत में जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव को लेकर एक दिन में ही उम्मीदवार की निष्ठा कई बार बदली. सुबह आरएलडी उम्मीदवार रहीं ममता किशोर ने भाजपा का दामन थामा था, लेकिन कुछ ही घंटे बाद दोबारा आरएलडी  में वापसी कर ली है. यहां आरएलडी की ममता किशोर और बीजेपी की बबली देवी के बीच फाइट है. वहीं, यूपी के एटा में जिला पंचायत अध्यक्ष पद के प्रतिष्ठा पूर्ण चुनाव में सपा की पूर्व घोषित प्रत्याशी रेखा यादव और भाजपा की ओर से विनीता यादव के बीच मुकाबला माना जा रहा है. 

Advertisement

 

Advertisement
Advertisement