
कोरोना के बढ़ते संकट के बीच जब वैक्सीन की डिमांड बढ़ने लगी है और शहरों में वैक्सीन की किल्लत भी शुरू हो गई है. तब ऐसे वक्त में शहरी लोगों को भी ग्रामीण इलाकों का सहारा है, क्योंकि वहां कुछ हदतक वैक्सीन का स्लॉट मिलने में आसानी हो रही है.
नोएडा की एक मल्टीनेशनल कंपनी में काम करने वाले और 3 BHK अपार्टमेंट में रहने वाले असित जो कि एक मई से ही वैक्सीन लगवाने की कोशिशों में जुटे हैं, कामयाब नहीं हो सके थे. लेकिन जब उन्हें ग्रेटर नोएडा के सूरजपुर क्षेत्र में स्थित थपखेड़ा गांव में वैक्सीन का स्लॉट मिला, तो उन्होंने देरी नहीं की. बुधवार सुबह वह अपने घर से तीस किमी. दूर वैक्सीन लगवाने इस गांव में पहुंचे. ये सफर भी आसान नहीं था क्योंकि जहां वैक्सीन लगनी थी, उस सेंटर को गूगल के मैप पर ढूंढना भी मुश्किल था.
इंडिया टुडे से बात करते हुए असित ने बताया कि मुझे इसे गांव के बारे में मुश्किल से ही कुछ जानकारी थी, लेकिन जब मैंने वैक्सीनेशन सेंटर की तलाश शुरू की, तो यहां तक पहुंचना इतना आसान नहीं था. लेकिन किसी तरह स्थानीय लोगों की मदद से मुझे सेंटर मिल पाया.
गांव के अंबेडकरनगर भवन में एक वैक्सीनेशन सेंटर बनाया गया है, यहां दो कमरों में टीका लगाने की व्यवस्था की गई है और करीब आधा दर्जन स्वास्थ्यकर्मी यहां सेवाएं दे रहे हैं.
बता दें कि नोएडा में वैक्सीनेशन का काम तो जारी है, लेकिन 18 से 44 साल वाले लोगों को वैक्सीन का स्लॉट ढूंढने में मुश्किल हो रही है. ऐसे में लोगों का रुख आसपास के गांवों में बने वैक्सीनेशन सेंटर की ओर हो रहा है, क्योंकि यहां पर अभी शहर के मुकाबले भीड़ काफी कम है. हालांकि, ऐसे सेंटर्स पर भी टीका लगवाना आसान नहीं है, क्योंकि एक दिन में सिर्फ सौ ही टीके लग पा रहे हैं.
भीड़ मैनेज करने के लिए पुलिस तैनात, लगातार आ रहे लोग
गांव के इस वैक्सीनेशन सेंटर पर सभी हेल्थवर्कर्स महिलाएं ही हैं, ऐसे में भीड़ को मैनेज करने के लिए पुलिसवालों की ड्यूटी लगी हुई है. सिर्फ असित ही नहीं, बल्कि उनके जैसे अन्य भी नोएडा के शहरी इलाके से इस ओर आ रहे हैं. नोएडा की एक यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले 22 साल के गौरव भी वैक्सीन की तलाश में गांव के इस सेंटर पर पहुंचे हैं.
अपने पति के साथ आईं सुचित्रा का कहना है कि यहां पर आते वक्त मैप के सिग्नल भी जा रहे थे, ऐसे में उनके लिए यहां आना काफी मुश्किल हुआ. ऐसे में रास्ते में कई स्थानीय लोगों से मदद लेकर यहां तक पहुंचा जा सका.
सिर्फ यहां पहुंचना ही बड़ी चुनौती नहीं है, बल्कि यहां की व्यवस्था भी कुछ हदतक कम सुविधाजनक है. अभी यहां दो कमरों में सेंटर चल रहा है, जिसमें एक टीका लगाने के लिए बल्कि दूसरा रजिस्ट्रेशन के लिए इस्तेमाल हो रहा है. ऐसे में यहां पर कोई ऑब्जर्वेशन सेंटर नहीं है, जहां टीका लगवाने वाले को वैक्सीन के कुछ देर बाद तक रुकना होता है.
यहां के इनचार्ज के मुताबिक, सेंटर में वैसे तो तीन कमरे हैं, लेकिन गांववालों ने तीसरा कमरा अपने इस्तेमाल के लिए रखा हुआ है. ऐसे में जो बाहर से टीका लगवाने आ रहा है, उसे वह अपनी गाड़ी में ही इंतज़ार करने को कह रहे हैं. अगर कोई इमरजेंसी होती है, तो डॉक्टर तुरंत वहां पहुंचते हैं.
गौरतलब है कि सिर्फ नोएडा या आसपास के इलाकों की नहीं बल्कि हर जगह से ऐसी ही कहानी सामने आ रही हैं. जहां शहरी इलाकों में लोग टीके के लिए तरस रहे हैं, लेकिन ग्रामीण इलाकों में कम भीड़ होने की वजह से कुछ आसानी से टीके मिल जा रहे हैं.