कांग्रेस उत्तर प्रदेश में पिछले तीन दशक से सत्ता का वनवास झेल रही है, जिसके चलते न तो पार्टी के पास जनाधार बचा है और न ही जमीन पर संगठन. सूबे में वेंटिलेटर पर पड़ी कांग्रेस में जान फूंकने की जिम्मेदारी प्रियंका गांधी के कंधों पर है. ऐसे में प्रियंका ने कांग्रेस को जमीनी स्तर पर मजबूत करने के लिए यूपी संगठन में बड़े और दिग्गज नेताओं को छोड़ ऐसे लोगों तवज्जो दी है, जो युवा होने के साथ जमीन से जुड़े हों और सड़क पर उतरकर संघर्ष करने व लाठी खाने की ताकत रखते हों.
प्रियंका गांधी ने इसके लिए न तो उनकी जाति देखी, न ही धर्म, न ही राजनीतिक बैकग्राउंड और न ही उनकी विचारधारा को अहमियत दी. यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू से लेकर पार्टी प्रदेश महासचिव, सचिव और संगठन के तमाम पदाधिकारी किसी न किसी ऐसे संगठन से जुड़े रहे हैं, जो सूबे में तमाम मुद्दों को लेकर धरने प्रदर्शन और आंदोलन पहले से ही करते रहे हैं. सूबे के कांग्रेस संगठन में वामपंथी संगठनों, सामाजिक न्याय के आंदलनों और किसान संगठन से जुड़े हुए नेताओं को जोड़कर प्रियंका ने अपनी टीम गठित की है और अब इन्हीं के कंधों पर पार्टी को खड़ा करने की जिम्मेदारी है.
अजय कुमार लल्लू
उत्तर प्रदेश में कांग्रेस पार्टी की कमान अजय कुमार लल्लू के हाथों में है, जिनकी उम्र 43 साल है. वो पूर्वांचल के कुशीनगर से आते हैं और पिछड़ी कही जाने वाली कानू जाति से ताल्लुक रखते हैं. अजय छात्र राजनीति से आए हैं. एक स्थानीय कालेज के छात्र संघ अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू हमेशा से जमीनी आंदोलनों और सामाजिक न्याय के मुद्दों पर मुखर रहे हैं. वह एकता परिषद से भी जुड़े रहे हैं.
लिहाजा इन्हीं संघर्षों के चलते उन्हें हर मुद्दे पर पुलिसिया सख्ती का सामना करना पड़ा. हर बार उन पर लाठियां बरसीं. संघर्ष के प्रति अजय कुमार शुरुआती दिनों में इतने प्रतिबद्ध रहे कि लोग उन्हें 'धरना कुमार' कहने लगे. इसी का नतीजा है कि जब से प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद से योगी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं और कई बार बार जेल जा चुके हैं. योगी आदित्यनाथ के गढ़ कुशीनगर की तमकुहीराज विधानसभा से वह लगातार दूसरी बार विधायक बने हैं.
शाहनवाज आलम
मुस्लिम समुदाय को कांग्रेस से जोड़ने की जिम्मेदारी शाहनवाज आलम के कंधों पर है. कांग्रेस यूपी अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के अध्यक्ष शाहनवाज आलम महज 38 साल के हैं और बलिया के रहने वाले हैं. इलाहाबाद विश्वविद्याय में पड़ाई के दौरान उन्होंने छात्र सियासत में कदम रखा और वामपंथी संगठन आइसा से जुड़े रहे. इसके बाद रिहाई मंच के साथ जुड़े और आतंकवाद के नाम पर होने वाली मुस्लिम युवकों की गिरफ्तारियों के खिलाफ आंदोलन चलाया. लोकसभा चुनाव से पहले उन्होंने रिहाई मंच छोड़कर कांग्रेस का दामन थामा और मुस्लिम समुदाय के दिल में कांग्रेस के लिए जगह बनाने का काम कर रहे हैं. हाल ही में सीएए-एनआरसी के खिलाफ धरना प्रदर्शन करने के मामले में उन्हें गिरफ्तार किया गया था.
विश्वविजय सिंह
उत्तर प्रदेश कांग्रेस के महासचिव विश्वविजय सिंह भी छात्र राजनीति से आए हैं. गोरखपुर विश्वविद्यालय में NSUI के छात्र नेता रह चुके हैं. गोरखपुर में आमी नदी को बचाने के लिए आंदोलन विश्वविजय ने आंदोलन खड़ा किया, जिसमें उन्हें कई पर्यावरणविद् का भी साथ मिला था. आमी नदी के आंदोलन के तहत धरना प्रदर्शन के दौरान विश्वविजय को गिरफ्तार किया तो उनके पक्ष में गोरखपुर के लोग खड़े हुए थे. इसके चलते सरकार को पीछे हटना पड़ा था. इसके बाद राहुल गांधी भी गोरखपुर पहुंचे थे और विश्वविजय ने उन्हें आमी नदी की बुरी स्थिति को दिखाया था. विश्वविजय आमी नदी बचाओ आंदोलन के संयोजक हैं.
अनिल यादव
उत्तर प्रदेश कांग्रेस संगठन में सचिव बने अनिल यादव भी छात्र राजनीति से आए हैं. वो सपा प्रमुख अखिलेश यादव के संसदीय क्षेत्र आजमगढ़ के रहने वाले हैं. इलाहाबाद विश्वविद्यालय में पढ़ाई के दौरान राजनीति में कदम रखा था. भारतीय अनुसंधान संस्थान में रिसर्च एसोसिएट और सूबे में सामाजिक न्याय के मुद्दे पर एक दशक से मुखर हैं. आजमगढ़ में आतंकवाद मामले में होने वाली गलत गिरफ्तारियों के खिलाफ अनिल यादव ने काफी संघर्ष किया था.
मनोज यादव
उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के पिछड़ा वर्ग के अध्यक्ष की जिम्मेदारी निभा रहे मनोज यादव भी छात्र राजनीति से आए हैं. इलाहाबाद विश्वविद्यालय में रहते हुए मनोज यादव काफी सक्रिय थे. उन्होंने सामाजिक न्याय के सवाल पर त्रिस्तरीय आरक्षण लागू करवाने के लिए प्रदेशव्यापी आंदोलन चलाया था. यह वजह है कि प्रियंका गांधी ने उन्हें ओबीसी समुदाय को पार्टी से जोड़ने की अहम जिम्मेदारी सौंपी है.
मोहित पांडेय
उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के मीडिया सेल के चेयरमैन मोहित पांडेय भी छात्र राजनीति से आए हैं. जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के छात्र संघ के अध्यक्ष भी रह चुके हैं. कांग्रेस में शामिल होने से पहले मोहित पांडेय वामपंथी संगठन आइसा के साथ जुड़े रहे हैं.
विवेकानंद पाठक
उत्तर प्रदेश कांग्रेस संगठन में महासचिव बने विवेकानंद पाठक पूर्वांचल से आते हैं. पाठक ने भी छात्र राजनीति से अपना सियासी सफर शुरू किया है. एनएसयूआई से जुड़े रहे. इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्र संघ की बहाली के लिए संघर्ष करने वालों में प्रमुख रूप से शामिल थे. प्रियंका ने उन्हें अपनी टीम में शामिल कर युवा नेताओं को बड़ा राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की है.
शिवनारायण परिहार
उत्तर प्रदेश कांग्रेस किसान संगठन के चेयरमैन शिवनारायण परिहार बुंदेलखंड के झांसी से है. किसानों के मुद्दे पर लंबे समय से आंदोलन कर रहे हैं. कांग्रेस में आने से पहले परिहार भारतीय किसान यूनियन के बुंदेलखंड के अध्यक्ष रह चुके हैं. किसान के हक में आवाज उठाने के लिए कई बार उनका और पुलिस से भी संघर्ष करना पड़ा है. इसी के चलते प्रियंका ने उन्हें कांग्रेस से किसानों को जोड़ने की अहम जिम्मेदारी सौंपी है.
बदरुद्दीन कुरैशी
उत्तर प्रदेश कांग्रेस महासचिव बदरुद्दीन कुरैशी पश्चिमी उत्तर प्रदेश के हापुड़ के रहने वाले हैं. बदरुद्दीन कुरैशी भी छात्र राजनीति से निकले हैं. वो दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय में छात्र संघ के अध्यक्ष रह चुके हैं और विश्वविद्यालय को अल्पसंख्यक दर्ज दिलाने के लिए लंबे समय तक संघर्ष किया है. उन्होंने अपना सियासी सफर कांग्रेस के छात्र संगठन एनएसयूआई से शुरू किया था और अब प्रियंका गांधी की टीम का अहम हिस्सा हैं.
हरेराम मिश्रा
आरटीआई एक्टिविस्ट हरेराम मिश्रा भी कांग्रेस के लिए काम कर रहे हैं. कांग्रेस के यूपी आरटीआई विंग के संयोजक की जिम्मेदारी हरेराम मिश्रा के कंधों पर है. वो प्रतापगढ़ जिले के रहने वाले हैं और छात्र राजनीति से उन्होंने भी अपना सफर शुरू किया था. इलाहाबाद विश्वविद्यालय में पढ़ाई के दौरान ही वामपंथी संगठन आइसा से जुड़े रहे हैं.