
उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के चंदौली (Chandauli) में गंगा नदी (Ganga River) उफान पर है और इससे आई बाढ़ (Flood) के चलते जिले के कई दर्जन गांवो में पानी घुस चुका है. एक तरफ बाढ़ तो दूसरी तरफ बारिश ने कोहराम मचाया हुआ है.
बाढ़ से प्रभावित एक तरफ जहां कुछ लोग अपने घरों से सुरक्षित ठिकानों की तरफ पलायन कर रहे हैं. वहीं, दूसरी तरफ कुछ ऐसे लोग भी हैं,जिनका घर चारों तरफ से पानी से घिरा है.लेकिन बावजूद इसके वे अपने घरों को नहीं छोड़ रहे हैं क्योंकि उनको चोरी का डर सता रहा है.पूर्वी उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले के नियमताबाद ब्लॉक का बहादुरपुर गांव गंगा नदी के किनारे बसा हुआ है.
गंगा में आए बाढ़ के पानी से इस गांव का एक बड़ा हिस्सा डूब गया है. लोग सुरक्षित स्थानों की तरफ पलायन कर रहे हैं. अपने घर और गृहस्थी का जरूरी सामान लेकर नाव से सुरक्षित जगहों पर जा रहे हैं. बहादुरपुर की रीता देवी का घर बाढ़ के पानी से डूब गया है. उन्होंने बताया कि अब वह अपने बाल बच्चों के साथ मायके जा रही हैं.
रीता देवी ने आजतक से बताया कि हालात यह है कि उनका पूरा घर डूब गया है और पूरे घर में पानी है. वह अपने मवेशी और जरूरी सामान लेकर और घर छोड़कर अपने मायके जा रही हैं. घरों में बाढ़ का पानी घुस जाने के बाद रीता देवी जैसे कई परिवार हैं.जो अपने घरों को छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर चले गए हैं. लेकिन वहीं दूसरी तरफ इसी गांव में कई ऐसे लोग भी हैं जिनको घर छोड़ने के बाद चोरी हो जाने का डर सता रहा है.
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अबरार नाम के एक ऐसे ही बाढ़ पीड़ित के पास आजतक की टीम पहुंची जिनका घर बाढ़ के पानी से चारों तरफ से घिर चुका था. अबरार के परिवार में इनकी बुजुर्ग मां पत्नी और दो मासूम बच्चे रहते हैं. लेकिन वह चोरी होने के डर से अपने घर को नहीं छोड़ना चाहते. अबरार बताते हैं कि बाढ़ से हालात बहुत खराब हैं और उनका पूरा घर डूबा हुआ है. मजबूरी इस बात की है कि यहां चोरी होने का खतरा है इसलिए वो लोग घर छोड़कर जा नहीं सकते.
बहादुरपुर में आजतक के कैमरे ने एक ऐसे घर को भी कैद किया जो चारों तरफ से बाढ़ के पानी से घिरा हुआ था और इस घर के आस-पास कोई घर भी नहीं था लेकिन बावजूद इसके उस घर के लोग अपनी जान जोखिम में डालकर घर में मौजूद थे.
चंदौली के पड़ाव इलाके के रहने वाले नितिन कुमार ने बताया कि परेशानी तो बहुत ज्यादा है.एक तरफ गंगा का पानी लगातार बढ़ता जा रहा है और दूसरी तरफ बारिश भी हो रही है. जिंदगी पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो गई है. सरकार की तरफ से कोई खास मदद भी नहीं मिल पा रही है, सिर्फ आश्वासन मिल रहा है.