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UP में कई अफसरों की कुर्सी खतरे में... अखिलेश के संपर्क में आए अफसरों की बन रही है लिस्ट!

उत्तर प्रदेश में अब बारी उन आईएएस और आईपीएस अफसरों की है जो चुनाव के दौरान बदलती सरकार के अंदेशे में समाजवादी पार्टी के खेमे से कनेक्शन साधने लगे थे. बताया जा रहा है कि ऐसे अफसरों की लिस्ट बन रही है और उन पर कार्रवाई हो सकती है.

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (फाइल फोटो)
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (फाइल फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • सोनभद्र के डीएम और गाजियाबाद के एसएसपी सस्पेंड
  • चार सीनियर आईपीएस अफसरों की हुई शंट पोस्टिंग

उत्तर प्रदेश में योगी सरकार 2.0 अलग तेवर में नजर आ रही है. एक तरफ माफियाओं और अपराधियों पर बुलडोजर की स्पीड तेज है तो वही बड़े अफसरों पर कार्रवाई का सिलसिला भी शुरू हो गया है. गुरुवार को सोनभद्र के डीएम और गाजियाबाद के एसएसपी को सीधे सस्पेंड कर दिया गया.

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जिले के सबसे बड़े अफसरों पर की गई सस्पेंशन की इस कार्रवाई से नौकरशाही में अफरा-तफरी है. लापरवाही बरतने वाले जिलों के कप्तान डीएम से लेकर विभागीय अपर मुख्य सचिव तक दहशत में है कि जरा सी चूक कहीं कुर्सी ना ले जाए.

क्यों सस्पेंड किए गए सोनभद्र के डीएम?

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने सोनभद्र के डीएम रहे टीके शिबू और गाजियाबाद के एसएसपी पवन कुमार को सस्पेंड कर दिया. आधिकारिक तौर पर टीके शिबू के सस्पेंशन के पीछे जो वजह बताई गई वह थी जिले में अवैध खनन, निर्माण कार्यों में भ्रष्टाचार की शिकायत और बीते विधानसभा चुनाव में जिला निर्वाचन अधिकारी के तौर पर लापरवाही.

दरअसल सोनभद्र में शासन को चुनाव से पहले ही अवैध खनन की शिकायतें मिल रही थी. जिले में गिट्टी की खदानों से अवैध खनन के जरिए वसूली की जानकारी सरकार को लगातार मिल रही थी. वहीं दूसरी तरफ पीडब्ल्यूडी व अन्य निर्माण एजेंसियों के द्वारा करवाए जा रहे कामों में भ्रष्टाचार और कमीशन खोरी भी जारी रही.

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इसी बीच चुनाव का ऐलान हो गया आचार संहिता लग गई तो सोनभद्र के डीएम टीके शिबू जिला निर्वाचन अधिकारी के तौर पर काम करने लगे. चुनाव के दौरान भी टीके शिबू की लापरवाही उजागर हुई. खुले में बिना सील किए पोस्टल बैलट का वीडियो सोशल मीडिया पर बादल हुआ तो जिले में राजनैतिक हंगामा शुरू हो गया.

स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने इस मामले में टीके शिबू की भूमिका पर सवाल खड़े हुए. कानून व्यवस्था को बनाए रखने के लिए विंध्याचल मंडल के कमिश्नर को लगाना पड़ा था. नई सरकार गठित हुई तो सोनभद्र एक जनप्रतिनिधियों ने सीधे से इसकी शिकायत मुख्यमंत्री से की तमाम अन्य सरकारी और गैर सरकारी संगठनों से भी भ्रष्टाचार की शिकायतें मिली थी जिसके बाद डीएम सोनभद्र टीके शिबू को सस्पेंड किया गया और विभागीय जांच के आदेश देते हुए वाराणसी कमिश्नर को जांच दे दी गई.

25 लाख की लूट और चली गई SSP की कुर्सी?

टीके शिबू के बाद गाजियाबाद के एसएसपी भी 4 घंटे में सस्पेंड कर दिए गए. 2009 बैच के आईपीएस पवन कुमार पर अपराध नियंत्रण में लापरवाही और जिले में पुलिस के अंदर बड़े भ्रष्टाचार की शिकायत पर सस्पेंड किया गया, लेकिन जिस मामले की वजह से पवन कुमार सस्पेंड हुए वह थी 5 दिन पहले गाजियाबाद के डासना इलाके में पेट्रोल पंप कर्मी से 25 लाख की लूट. बेखौफ बदमाशों ने दिनदहाड़े लूट की वारदात को अंजाम दिया.

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असलहों से लैस बदमाशों की फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हुई. सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस तस्वीर के सहारे उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए. यहां तक भी गनीमत थी लेकिन लूट की वारदात में शामिल एक बदमाश ने कोर्ट में सरेंडर कर दिया और पुलिस को भनक तक नहीं लगी. चेन स्नेचर, वाहन चोरों पर चल रहा ऑपरेशन लंगड़ा और दूसरी तरफ 25 लाख की लूट का आरोपी कोर्ट में सरेंडर कर गया यह सरकार को नाकाबिले बर्दाश्त हुआ और पवन कुमार सस्पेंड कर दिए गए.

चार IPS अफसरों की शंट पोस्टिंग

इन दो अफसरों से पहले उत्तर प्रदेश के 4 आईपीएस अफसरों के भी तबादले किए गए जिसमें 2 नामों को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा हुई. पहला नाम एडीजी नवनीत सिकेरा जिनको पीटीएस उन्नाव भेजा गया, दूसरा नाम डीआईजी धर्मेंद्र सिंह जिनको डीआईजी आरटीसी चुनाव बनाकर भेजा गया.

अखिलेश के संपर्क में आए अफसरों पर कार्रवाई?

इन अफसरों की नई पोस्टिंग से चर्चा आम हो गई है. उत्तर प्रदेश में अब बारी उन आईएएस और आईपीएस अफसरों की है जो चुनाव के दौरान बदलती सरकार के अंदेशे में समाजवादी पार्टी के खेमे से कनेक्शन साधने लगे थे. कई बार सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी कहा था कि इस सरकार के कई अफसर अब उनको सूचना दे रहे हैं, उनके संपर्क में आने की कोशिश में हैं.

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वहीं दूसरी तरफ नई सरकार ने भी ऐसे अफसरों कि सूची बनाई है तो माना जा रहा है कि जल्द कुछ और आईएएस और आईपीएस के साथ-साथ बड़े अफसर तबादला या कार्रवाई की जद में आएंगे. फिलहाल अब तक अफसरों पर की गई सस्पेंशन की कार्रवाई हो या तबादला कर शंट पोस्टिंग पर भेजने का आदेश.

यह तय हो गया है कि इस बार सरकार की निगाह छोटी मछलियों पर नहीं बड़ी मछलियों पर हैं, वह फिर चाहे जिले के डीएम हो कप्तान हो या फिर अपर मुख्य सचिव स्तर के अफसर.

सरकार के यह तेवर देखकर उन जिलों के डीएम, एसपी और कमिश्नर में दहशत है जिनके खिलाफ जन आक्रोश है. भ्रष्टाचार की शिकायतों पर लगाम नही कसी जा सकी. वहीं यूपी बोर्ड परीक्षा में पेपर लीक के मामले में भी अफसरों की कुर्सियां हिली है. माना जा रहा है कि जल्द इस मामले में भी नई सरकार बड़े अफसरों पर कार्रवाई करेगी.

 

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