यूपी में विधान परिषद चुनाव के प्रत्याशियों को लेकर भले ही समाजवादी पार्टी गठबंधन के सहयोगी विरोध में खुलकर सामने आ गए हों, लेकिन बीजेपी ने ‘एकला चलो रे’ की राह पर चलकर अपने कार्यकर्ताओं से किया वादा निभा दिया. वो वादा जो पार्टी ने विधानसभा चुनाव से पहले अपने कैडर के कार्यकर्ताओं से किया था जिन्होंने अनुशासन दिखाते हुए विधानसभा चुनाव में अपनी दावेदारी पार्टी के तय प्रत्याशी के समर्थन में छोड़ी थी.
बीजेपी के घोषित 9 प्रत्याशियों ने नामांकन की आखिरी तारीख पर नामांकन किया. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के साथ 6 मंत्रियों भूपेन्द्र चौधरी, जेपीएस राठौड़, जसवंत सैनी, दानिश अंसारी, दयाशंकर मिश्र दयालु ने नामांकन किया तो वहीं नरेंद्र कश्यप का नामांकन उनकी तरफ़ से दाखिल किया गया क्योंकि इस समय वो कोविड पॉजिटिव हैं. इन सात मंत्रियों के अलावा मुकेश शर्मा और बनवारी लाल दोहरे ने भी नामांकन दाखिल किया. दरअसल यही वो दो सीटें हैं, जिनको लेकर सबसे ज़्यादा कयास लगाए गए थे.
2 सीटों पर लगाए जा रहे थे कयास
डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य और मंत्री भूपेन्द्र चौधरी का कार्यकाल 6 जुलाई को ख़त्म हो रहा था. ऐसे में उन दोनों का विधान परिषद में जाना तय था. साथ ही जिन 5 नेताओं को पार्टी ने पहले ही योगी सरकार में मंत्री बनाया गया था उनको भी परिषद भेजना जरूरी था. ऐसे में सिर्फ दो सीटें ऐसी थी जिसपर पार्टी नाम तय कर सकती थी. पार्टी ने बहुत सोच समझकर मुकेश शर्मा और बनवारी लाल दोहरे का नाम तय कर दिया. दोनों लम्बे समय से संगठन से जुड़े हैं और इस चुनाव में पार्टी के लिए ज़मीन पर काम किया है.
2024 की रणनीति का संदेश
दरअसल इन दोनों का नाम तय कर के बीजेपी ने 2024 की अपनी रणनीति का संकेत दिया है तो कार्यकर्ताओं को संदेश भी दिया है. ये दोनों नेता ऐसे हैं जिन्होंने यूपी विधानसभा चुनाव में पार्टी द्वारा तय प्रत्याशियों के लिए अपनी दावेदारी छोड़ दी थी. बनवारी लाल दोहरे तीन बार कन्नौज सीट से ही विधायक रहे, लेकिन यादव लैंड में उनको लगातार 2012 और 2017 में हार का सामना करना पड़ा. इसके बावजूद पार्टी और क्षेत्र में सक्रिय बनवारी लाल दोहरे ने इस बार भी दावेदारी की तैयारी में थे. इस बीच आईपीएस असीम अरुण ने पुलिस सेवा से इस्तीफ़ा देकर भाजपा ज्वॉइन की तो पार्टी ने उनको कन्नौज से ही चुनाव लड़ाने का फैसला किया. 70 की उम्र पार कर चुके बनवारी लाल सियासत की आख़िरी पारी खेलने की बात कहकर कन्नौज की जनता से अपना भावनात्मक रिश्ता जोड़ रहे थे. पार्टी ने उनको समझा कर असीम अरुण के लिए रास्ता साफ कर दिया.
बनवारी लाल ने बनाया असीम अरुण का रास्ता
पार्टी के सूत्रों के अनुसार, पार्टी ने इस बात का पता कर लिया था कि कुछ वोटों से पीछे भले ही बनवारी लाल रह जाते हों पर उनकी छवि लोगों में अच्छी थी और अगर वो न पीछे हटते तो असीम अरुण के लिए मुश्किल हो सकती थी. पार्टी में उनको दिए आश्वासन पर अमल करते हुए उनको विधान परिषद भेजा है. आज खुद असीम अरुण न सिर्फ बनवारी लाल के साथ उनके नामांकन में शामिल हुए बल्कि स्वीकार किया कि उन्होंने पार्टी के प्रत्याशी के रूप में उनके लिए अपनी दावेदारी छोड़ी थी.
राजनाथ सिंह के करीबी हैं मुकेश शर्मा
दूसरा चौंकाने वाला नाम मुकेश शर्मा का है जो लखनऊ बीजेपी के महानगर अध्यक्ष हैं. पार्टी में बूथ अध्यक्ष से लेकर मंडल अध्यक्ष और दूसरी बार महानगर अध्यक्ष के रूप में तमाम अभियानों को धार देने वाले मुकेश शर्मा रक्षामंत्री राजनाथ सिंह के करीबी हैं और उनके चुनाव प्रचार में भी काम किया. कैंट सीट से वो भी इस बार प्रबल दावेदार थे, लेकिन पार्टी ने जब लखनऊ मध्य सीट से हटाकर बृजेश पाठक को कैंट सीट से लड़ाने का फैसला किया तब मुकेश शर्मा ने न सिर्फ़ पार्टी के कहने पर अधिकृत प्रत्याशी का समर्थन किया बल्कि अपने कार्यक्षेत्र में आने वाली सीट पर बैठकें की और कार्यकर्ताओं का नेतृत्व कर चुनाव मैनेजमेंट का काम भी किया. मुकेश शर्मा को इसका पुरस्कार मिला और पार्टी ने उनको विधानपरिषद में भेजकर एक संदेश दिया.
‘दयालु’ को मंत्री बनाकर पार्टी ने चौंकाया
इधर योगी सरकार में मंत्री बनकर सबको चौंकाने वाले दयाशंकर मिश्र ‘दयालु’ को भी पार्टी ने विधानपरिषद भेजकर औपचारिकता निभाई. वाराणसी दक्षिणी सीट से दयाशंकर पहले कांग्रेस से चुनाव लड़ चुके हैं. इस बार उसी सीट से लोगों की नाराज़गी के बावजूद पार्टी ने नीलकंठ तिवारी को ही टिकट दिया जबकि दयाशंकर दयालु उस सीट से दावेदार बताए जा रहे थे. चुनाव के बाद योगी सरकार में दयालु को मंत्री बनाकर पार्टी ने सबको चौंका दिया. अब विधान परिषद भेजा है.
राधा मोहन दास अग्रवाल को भी दिया इनाम
विधान परिषद के लिए इन नामों से बीजेपी ने कार्यकर्ताओं को संदेश दिया है कि संगठन के लिए की गयी मेहनत बेकार नहीं जाती. हाल ही में हुए राज्यसभा चुनाव में भी पार्टी ने डॉ. राधा मोहन दास अग्रवाल को प्रत्याशी बनाया था. राधा मोहन विधान सभा चुनाव में अपनी जमी जमाई गोरखपुर सदर सीट से हटे थे जब पार्टी ने योगी आदित्यनाथ को उस सीट से चुनाव लड़ाने का फ़ैसला किया था. राधा मोहन दास अग्रवाल की अच्छी छवि और पार्टी के प्रति निष्ठावान होना काम आया. आपके क्षेत्र की सड़क पर खड़े होकर सड़क की गुणवत्ता का दावा करने का दमखम दिखाने वाले राधा मोहन दास अग्रवाल की ईमानदार छवि भी पार्टी को रास आती रही है. इधर विधान परिषद के टिकट पर सपा गठबंधन में दरार पर यूपी बीजेपी के महामंत्री और योगी सरकार में मंत्री जेपीएस राठौड़ कहते हैं कि ‘हम जो कहते हैं वो करते हैं और कार्यकर्ताओं से वही कहते हैं जो कर सकते हैं. खुद स्वतंत्र देव सिंह और सुनील बंसल की टीम में चुनाव प्रबंधन की ज़िम्मेदारी सम्भालने वाले जेपीएस राठौड़ ने भी विधानपरिषद के लिए नामांकन किया.
कार्यकर्ताओं को संकेत और संदेश
हालांकि पार्टी समय-समय पर ये कहती रही है कि किसी से भी पार्टी कोई वादा नहीं करती. हर कार्यकर्ता को सम्मान मिलता है पर सीट का वादा किसी से नहीं किया जाता. हालांकि ये भी तय है कि लोकसभा चुनाव के लक्ष्य को देखते हुए ये एक संकेत और संदेश है कि पार्टी के अनुशासित कार्यकर्ताओं का पार्टी ध्यान रखती है. किसी भी सीट पर प्रत्याशी का नाम घोषित होने के बाद पार्टी के संगठन महामंत्री सुनील बंसल खुद वहां के संगठन के ढांचे की न सिर्फ मॉनिटरिंग करते रहे बल्कि कई बार असंतुष्टों को पार्टी नेताओं के जरिए समझाते भी रहे हैं. ये बात बीजेपी की रणनीति का हिस्सा रही और पार्टी अक्सर बिना किसी विवाद के दावेदारी करने वाले को समझा बुझाकर पार्टी के घोषित प्रत्याशी के पक्ष में काम करवाने के लिए भी तैयार कर लेती है.
कार्यकर्ताओं को एडजस्ट करती है पार्टी
ऐसे में उन कार्यकर्ताओं को एडजस्ट करना कार्यकर्ताओं को एक संदेश देता है. ये बात इसलिए भी अहम है कि पार्टी में ऐन चुनाव से पहले दूसरे दलों से ऐसे नेता आए थे जो विधानपरिषद जाने के दावेदार थे. इसमें मुलायम परिवार की बहू अपर्णा यादव और दूसरे दलों से आए कई पूर्व विधायक भी शामिल हैं. इसके अलावा पूर्व मंत्री आरपीएन सिंह के भी राज्यसभा भेजे जाने की चर्चा होती रही. लेकिन पार्टी ने अपने कार्यकर्ताओं का साथ दिया. वरिष्ठ पत्रकार दिनेश पाठक मानते हैं कि इनको पार्टी ने जो टास्क दिया वो इन्होंने पूरा किया. वो कहते हैं ‘ इन सभी दावेदारों का किसी न किसी सीट को जिताने में योगदान रहा है. दूसरी बात बीजेपी हमेशा चुनाव के मोड में रहती है. इस समय भी 2024 के मोड में आ चुकी है. देखिए, सिर्फ मुकेश शर्मा और बनवारी लाल दोहरे को ही एडजस्ट करके नहीं, बल्कि जो 5 मंत्री बने हैं उन कार्यकर्ताओं को भी सदन में प्रवेश से पहले ही मंत्री बनवाकर कार्यकर्ताओं को संदेश बीजेपी ने दिया है.’