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सोनिया-योगी-आजम खान के इलाके में तीन दिन बाद पंचायत चुनाव, जानें कैसी बिछ रही सियासी बिसात

उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव के पहले दौर में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के संसदीय क्षेत्र रायबरेली, यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गृह जनपद गोरखपुर और सपा के कद्दावर नेता आजम खान के रामपुर सहित 18 जिलों में चुनाव होने हैं. ऐसे में पहले चरण का पंचायत काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है. 

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योगी आदित्यनाथ, सोनिया गांधी, आजम खान
योगी आदित्यनाथ, सोनिया गांधी, आजम खान
स्टोरी हाइलाइट्स
  • गोरखपुर में योगी आदित्यनाथ की साख दांव पर
  • रायबेरली में सोनिया गांधी के लिए किला बचाने की चुनौती
  • आजम खान के रामपुर में कौन बनेगा जिला पंचायत प्रमुख

उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के पहले चरण के मतदान में अब महज तीन दिन का समय बचा है, जिस कारण चुनावी प्रचार जोरों पर हैं. पंचायत चुनाव के पहले दौर में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के संसदीय क्षेत्र रायबरेली, यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गृह जनपद गोरखपुर और सपा के कद्दावर नेता आजम खान के रामपुर सहित 18 जिलों में चुनाव होने हैं. ऐसे में पहले चरण का पंचायत काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है. 

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यूपी के पंचायत चुनाव के पहले चरण में अयोध्या, आगरा, कानपुर नगर, गाजियाबाद, गोरखपुर, जौनपुर, झांसी, प्रयागराज, बरेली, भदोही, महोबा, रामपुर, रायबरेली, श्रावस्ती, संत कबीर नगर, सहारनपुर, हरदोई एवं हाथरस जिलें में चुनाव हैं, जहां आगामी 15 अप्रैल यानी गुरुवार को मतदान होना है. इन सभी जिलों में जिला पंचायत सदस्य, क्षेत्र पंचायत सदस्य, ग्राम प्रधान और ग्राम पंचायत सदस्य पद के लिए एक साथ वोटिंग होगी. 

योगी के गोरखपुर में पंचायत चुनाव
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के इलाके गोरखपुर जिले में पंचायत चुनाव पहले चरण में होना है. गोरखपुर जिले में 20 ब्लॉक हैं. यहां 1294 ग्राम प्रधान पद के लिए 8822 प्रत्याशी किस्मत आजम रहे हैं. हालांकि,  ऐसे ही 68 जिला पंचायत सदस्य पद के लिए 868 उम्मीदवार मैदान में हैं. गोरखपुर जिले पंचायत अध्यक्ष का पद सामान्य है, जिसके चलते इस बार सियासी दलों के बीच भी कांटे की टक्कर होगी. यही वजह कि जिला पंचायत सदस्य के लिए सत्ताधारी बीजेपी से लेकर विपक्षी दल सपा, कांग्रेस और बीजेपी ने पूरी ताकत झोंक दी है. 

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बता दें कि साल 2015 में गोरखपुर जिला पंचायत अध्यक्ष की सीट पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित हो गई थी. इसकी वजह से इस पद को हासिल करने की इच्छा रखने वाले कई दिग्गज नेताओं को मन मसोसकर रह जाना पड़ा था. बीजेपी ने अपना प्रत्याशी नहीं उतारा था, जिसके लिए चलते सपा प्रमुख अखिलेश यादव के करीबी माने जाने वाले मनुरोजन यादव की पत्नी गीतांजलि ने यहां से जीत का परचम लहराया था. 

हालांकि, सपा के ही दो कद्दावर नेताओं के बीच जिला पंचायत अध्यक्ष के लिए जोरदार टक्कर हुई थी. तत्कालीन विधायक विजय बहादुर यादव ने अपने भाई अजय बहादुर को चुनाव मैदान में उतारा था. जबकि,  तत्कालीन मुख्यमंत्री के करीबी माने जाने वाले मनुरोजन यादव के पक्ष में स्थानीय नेताओं ने मोर्चा खोल दिया था. अन्य राजनीतिक दलों ने पीछे से गीतांजलि यादव को ही सपोर्ट किया. इसका परिणाम रहा कि काफी पसीना बहाने के बावजूद विजय बहादुर यादव के भाई अजय बहादुर यादव को हार का सामना करना पड़ा. गीतांजलि यादव गोरखपुर जिला पंचायत अध्यक्ष चुनी गई थीं. ऐसे में इस बार मुकाबला कांटे का होगा. 

सोनिया के रायबरेली में कांग्रेस की अग्निपरीक्षा
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के संसदीय क्षेत्र रायबरेली में पंचायत चुनाव पहले चरण में 15 अप्रैल को वोटिंग होनी है. यहां कुल 18 ब्लॉक हैं, जहां पर 988 ग्राम प्रधान की सीटें हैं. रायबरेली में 52 जिला पंचायत सदस्य पद के लिए 708 प्रत्याशी किस्मत आजमा रहे हैं. इसके अलावा 1301 बीडीसी सीटें हैं. हालांकि, कई ग्राम प्रधान और बीडीसी के कई सदस्य निर्विरोध चुने गए हैं.

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रायबरेली की सदर से कांग्रेस की बागी विधायक अदिति सिंह की मां वैशाली सिंह और बहन देवांशी सिंह निर्विरोध बीडीसी चुनी गई हैं. इसके अलावा अमावा ब्लॉक प्रमुख रहे भागवती सिंह और नीरज सिंह भी निर्विरोध चुने गए हैं. ये अदिति सिंह के पिता दिवगंत अखिलेश सिंह के करीबी माने जाते हैं. रायबरेली के एमएलसी व बीजेपी नेता दिनेश प्रताप सिंह के बेटे पीयूष सिंह भी हरचंद्रपुर ब्लाक से निर्विरोध बीडीसी चुने गए हैं. इसके अलावा पूर्व विधायक गजाधर सिंह अपनी ग्राम सभा से प्रधान को निर्विरोध निर्वाचित करने में सफल रहे हैं. 

जिला पंचायत अध्यक्ष की सीट इस बार अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है. ऐसे में कई बड़े दलित नेता चुनावी मैदान में किस्मत आजमा रहे हैं. महारागंज प्रथम से बीजेपी प्रत्याशी पूर्व विधायक राजा राम त्यागी, सपा समर्पित प्रत्याशी पूर्व विधायक श्यामसुंदर भारती की पत्नी चंद्रकली सपा, बछरावा से पूर्व विधायक रामलाल अकेले के बेटे विक्रांत अकेला मैदान में हैं. ऐसे ही डीह से बीजेपी के टिकट पर बृजलाल पासी मैदान में है. वहीं, अमावा द्वितीय से पूर्व सांसद अशोक की बहू आरती सिंह कांग्रेस के टिकट पर किस्मत आजमा रही हैं. 

आजम खान के रामपुर में चुनाव
सपा सांसद आजम खान के मजबूत इलाके माने जाने वाले रामपुर जिले में भी पहले चरण में पंचायत चुनाव होने हैं. आजम खान के जेल में रहते हुए इस बार पंचायत चुनाव हो रहे हैं. रामपुर में जिला पंचायत सदस्य के 34 पदों पर चुनाव होने हैं, ग्राम प्रधान के जिले में 680 पद हैं, जबकि ग्राम पंचायत सदस्य के 8504 पद हैं और क्षेत्र पंचायत सदस्य के भी 859 पद पर 15 अप्रैल को वोटिंग होनी है. 

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रामपुर की जिला पंचायत अध्यक्ष की सीट अनारक्षित है, ऐसे में कई दिग्गज नेता भी चुनाव मैदान में उतर गए हैं, न सिर्फ वे खुद, बल्कि अपने परिवार के साथ अलग-अलग सीटों से चुनाव लड़ रहे हैं, जबकि कुछ सीटों पर उन्होंने अपने रिश्तेदारों को चुनावी मैदान में उतारा है. पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष अब्दुल सलाम अपनी दोनों बेटियों और पत्नी के साथ खुद चुनाव लड़ रहे हैं, तो उन्होंने अपने दो सालों को भी चुनावी मैदान में उतारा है. ऐसे ही मौजूदा जिला पंचायत अध्यक्ष चन्द्रपाल सिंह खुद और अपनी पत्नी व बेटे को भी मैदान में उतार रखा है. वहीं, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष ख्यालीराम लोधी खुद वार्ड 12 से भाजपा के समर्थन से चुनाव लड़ रहे हैं. 

अयोध्या से सहारनपुर तक घमासान
ऐसे ही अयोध्या में भी बीजेपी की साख दांव पर लगी है जबकि सहारनपुर, आगरा में बसपा के सामने अपने किले को बचाने की चुनौती हैं. ऐसे ही कानपुर नगर, गाजियाबाद, गोरखपुर, जौनपुर में झांसी में सपा को अपनी सीटें बचाए रखने की चुनौती है. प्रयागराज, बरेली, भदोही, महोबा, श्रावस्ती, संत कबीर नगर में काफी दिलचस्प मुकाबला है. हरदोई में बीजेपी नेता नरेश अग्रवाल की साख दांव पर है. ऐसे ही हाथरस जिले में बीजेपी को कड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है.

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(रायबरेली से शैलेंद्र सिंह के इनपुट के साथ)

 

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