उत्तर प्रदेश की सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी अपने एक विधायक के कारनामे को लेकर एकबार फिर चर्चा में है. भाजपा के एक विधायक के खिलाफ पुलिस विभाग के एक सिपाही को जूते से पीटने के आरोप में मुकदमा दर्ज हुआ है. कोर्ट के आदेश पर मुकदमा दर्ज कर पुलिस ने अपने ही सिपाही के साथ हुई घटना को लेकर तहकीकात शुरू कर दी है.
यह मामला उत्तर प्रदेश के पीलीभीत का है. समाचार एजेंसी आईएएनएस की खबर के अनुसार भाजपा विधायक किशन लाल राजपूत, उनके भतीजे ऋषभ और राहुल समेत 16 ज्ञात और 35 अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है. इस संबंध में पुलिस विभाग के अधिकारी राजेश कुमार ने बताया कि विधायक राजपूत और अन्य के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 397 (डकैती या लूटपाट, जान से मारने या गंभीर चोट पहुंचाने का प्रयास) और 395 (डकैती) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है.
बताया जाता है कि सिपाही मोहित गुर्जर ने राहुल नाम के एक व्यक्ति से 50 हजार रुपये में एक बाइक खरीदी थी. विक्रेता राहुल के पास बाइक के वैध कागजात नहीं थे, जिसकी वजह से वह पहले तो आज-कल करता रहा, लेकिन वह सिपाही मोहित के नाम पर बाइक के कागजात ट्रांसफर करने में नाकाम रहा. मोहित विक्रेता से अपने पूरे पैसे वापस करने की मांग करने लगा. इसी बात को लेकर दोनों में विवाद हुआ था.
सिपाही ने बताया कि घटना 12 सितंबर की है. जब उन्होंने राहुल से अपने पैसे वापस मांगे, तो उसने उन्हें पीलीभीत मंडी समिति के गेट पर बुलाया. वहां विधायक के भतीजे ऋषभ और राहुल के साथ कुछ अन्य लोग भी मौजूद थे. कांस्टेबल ने कहा, "जब मैं मौके पर पहुंचा, तो उन्होंने मेरे साथ दुर्व्यवहार किया और पिटाई की. उन्होंने मुझ पर गोलियां चलाईं, मैं बाल-बाल बच गया. उन्होंने मेरी सोने की चेन और बटुए लूट लिए और मुझे बुरी तरह से चोटिल कर दिया."
सिपाही मोहित ने आरोप लगाया कि वह अपनी जान बचाने के लिए भागते हुए असम रोड पुलिस चौकी पर पहुंचे, लेकिन विधायक अपने समर्थकों के साथ वहां पहुंच गए और अपने जूते से उनकी पिटाई शुरू कर दी. विधायक ने अपने समर्थकों के माध्यम से उन्हें पेशाब पीने के लिए मजबूर किया. गुर्जर ने आरोप लगाया कि पुलिस चौकी पर मौजूद पुलिस अधिकारी मूकदर्शक बने रहे. उन्होंने कहा कि उन्होंने सुनगढ़ी पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई. थक कर अदालत का दरवाजा खटखटाया, तब जाकर मुकदमा दर्ज हो सका.