कानून-व्यवस्था के मोर्चे पर कड़ी आलोचना झेल रही उत्तर प्रदेश की सपा सरकार ने अपनी छवि चमकाने के लिए गुरुवार को निवेशक सम्मेलन आयोजित किया, लेकिन यह फीका रहा. उद्योग जगत की जानी-मानी हस्तियां इससे दूर ही रहीं.
लखनऊ से अपने दल-बल के साथ दिल्ली आए मुख्यमंत्री अखिलेश यादव महज 63 हजार करोड़ रुपये के निवेश के दो दर्जन एमओयू (सहमति पत्र) ही करा पाए. अव्यवस्थित प्रेस कॉन्फ्रेंस में अखिलेश जब इस उपलब्धि का ऐलान करने पहुंचे, तो उन्हें उनकी सरकार की आर्थिक उपलब्धियों के बजाय राज्य की कानून-व्यवस्था से जुड़े सवालों से दो-चार होना पड़ा. सवालों से घिरे अखिलेश को आखिर यह कहकर पत्रकारों को समझाना पड़ा कि यूपी में कानून-व्यवस्था ठीक है और यह कई राज्यों से बेहतर है.
माना जा रहा था कि इस निवेश सम्मेलन में भी गुजरात और मध्य प्रदेश के वैश्विक निवेशक सम्मेलनों की तरह निवेश प्रस्तावों की झड़ी लग जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. वाइब्रेंट गुजरात में रतन टाटा, मुकेश अंबानी, अनिल अंबानी और कुमार मंगलम बिड़ला जैसे शीर्ष उद्योगपति शिरकत करते रहे हैं. वहीं, यूपी के इस निवेश सम्मेलन से उद्योग जगत की बड़ी हस्तियां दूर रहीं. जिन उद्योग घरानों ने इस सम्मेलन में निवेश का इरादा जताया, उनमें एस्सेल समूह का 20,000 करोड़ रुपये, रिलायंस जिओ का 5,000 करोड़ रुपये और यूफ्लेक्स का 4,000 करोड़ रुपये के एमओयू प्रमुख हैं. आइटीसी ने भी 2,100 करोड़ रुपये के निवेश का एमओयू किया है.
इसी तरह जेवीएल एग्रो इंडस्ट्रीज ने कृषि और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में 2,200 करोड़ रुपये, रिवर इंजीनियरिंग ने 350 करोड़ रुपये से एयर टैक्सी शुरू करने और सोनालिका ने 200 करोड़ रुपये का निवेश ट्रैक्टर तथा कृषि संयंत्र मैन्यूफैक्चरिंग में करने के लिए सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं. श्रीसीमेंट ने सीमेंट संयंत्र के लिए 550 करोड़ रुपये निवेश का एमओयू किया है. ब्रिटेन के अल्ट्रा फायरवुड समूह ने भी राज्य में 220 करोड़ रुपये के निवेश का वादा किया है.