देश के सबसे पुराने सैनिक स्कूल के तौर पर पूरी दुनिया में मशहूर उत्तर प्रदेश सैनिक स्कूल (लखनऊ) के नाम को इस बीच बदल दिया गया है. अब इसे कैप्टन मनोज कुमार पांडे उत्तर प्रदेश सैनिक स्कूल के नाम से जाना जाएगा. इस सैनिक स्कूल की स्थापना 15 जुलाई, 1960 को हुई थी. स्कूल का संचालन उत्तर प्रदेश सरकार और उत्तर प्रदेश सैनिक स्कूल सोसाइटी द्वारा किया जाता है. स्कूल की फंडिंग उत्तर प्रदेश सरकार करती है. इस स्कूल को अब स्कूल के पूर्व छात्र शहीद कैप्टन मनोज कुमार पांडे के नाम पर बदला गया है. कैप्टन मनोज कुमार पांडे 1999 के कारगिल युद्ध में शहीद हुए थे और उसके बाद उन्हें परम वीर चक्र से सम्मानित किया गया. कैप्टन मनोज पांडे देश के तमाम सैनिक स्कूलों के बीच से पहले परम वीर चक्र विजेता हैं.
क्या कहते हैं स्कूल प्रिंसिपल?
उत्तर प्रदेश सैनिक स्कूल के प्रिंसिपल कर्नल अमित चटर्जी स्कूल के नाम बदलने की कवायद पर कहते हैं कि यह उत्तर प्रदेश कैबिनेट का प्रस्ताव है और वे सरकार के प्रतिनिधि के तौर पर इस प्रस्ताव के साथ हैं. वे सरकार के इस निर्णय से खुश हैं और स्कूल के नाम में बदलाव भी किया जा चुका है. निजी राय के सवाल पर वे कहते हैं कि सरकारी मुलाजिम होने के नाते उनकी निजी राय मायने नहीं रखती. हालांकि, वे अपनी ओर से जोड़ते हैं कि देश के तमाम सैनिक स्कूलों में से सबसे पुराने सैनिक स्कूल होने और वहां से पढ़कर निकले एक मात्र परमवीर चक्र विजेता होने के नाते ऐसा किया जाना जरूरी पहल है.
ओल्ड ब्वॉयज असोसिएशन को जानकारी नहीं...
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश सैनिक स्कूल में पढ़ रहे और वहां से पढ़ कर निकले छात्रों का एक समूह स्कूल की बेहतरी के लिए लगातार सक्रिय रहता है. असोसिएशन के वर्तमान अध्यक्ष रिटायर्ड कर्नल समर विजय सिंह कहते हैं कि उन्हें भी इस निर्णय के बारे में कोई शुरुआती जानकारी नहीं थी. उन्हें स्कूल के नाम बदलने की बात किन्हीं दूसरे माध्यमों से मिली और उसके बाद उन्होंने पूर्व छात्रों के समूह में इसे साझा किया. हालांकि, वे इस मसले पर अपनी ओर से कुछ भी लिखने से बचते रहने की बात कहते हैं.
यह बात जानकर खुशी हुई...
कैप्टन मनोज कुमार पांडे के छोटे भाई मनमोहन पांडे से जब इस सिलसिले में बात हुई तो वे स्कूल के नाम बदले जाने को अच्छी और जरूरी पहल बताते हैं. वे कहते हैं कि यह सरकार का निर्णय है और इसके बारे में उन्हें अधिक जानकारी नहीं. वे कहते हैं कि एक भाई और देश का नागरिक होने के नाते ऐसा किया जाना उनके लिए गर्व की बात है.
क्या कहते हैं स्कूल के स्टाफ?
उत्तर प्रदेश सैनिक स्कूल के हेड फिजिकल ट्रेनर मुकुट सिंह कहते हैं कि स्कूल के टीचिंग स्टाफ को स्कूल के नाम बदलने के बारे में पहले से कोई जानकारी नहीं थी. उन्हें भी यह जानकारी अखबार के माध्यम से मिली. हालांकि, वे निजी तौर पर नाम बदलने की कवायद से इत्तेफाक नहीं रखते. वे कहते हैं कि किसी भी छात्र या कैडेट की मातृसंस्था के नाम का बदला जाना उचित नहीं है. वे कहते हैं कि कैप्टन मनोज पांडे से भी पहले देश के लिए शहीद होने वालों की लंबी लिस्ट है और स्कूल में उनके नाम पर कोई न कोई प्रतियोगिता चल ही रही है. जैसे कैप्टन सुनील चंद्रा के नाम पर वादविवाद प्रतियोगिता का आयोजन होता है. वहीं कैप्टन मनोज पांडे के नाम पर भी बीते कई वर्षों से स्कूल में फुटबॉल टूर्नामेंट का आयोजन किया जा रहा है.
कैडेट के तौर पर अजीब लगा...
उत्तर प्रदेश सैनिक स्कूल के पूर्व छात्र और कैप्टन मनोज कुमार पांडे पर 'हीरो ऑफ बटालिक' नाम से किताब लिखने वाले उनके घनिष्ठतम मित्र पवन मिश्रा स्कूल का नाम बदले जाने के सवाल पर कहते हैं कि एक कैडेट के तौर उनके लिए भी यह बात अजीब लगी. हालांकि, वे कैप्टन मनोज पांडे के नाम से शुरू की जाने वाली किसी भी मुहिम में अपना शत प्रतिशत देने की बात कहते हैं.
स्कूल के पूर्व छात्रों असंतोष...
उत्तर प्रदेश सैनिक स्कूल के नाम को बदलने की बात स्कूल से पढ़कर निकले अधिकांश छात्रों को रास नहीं आई है. वे इस मसले पर अलग-अलग माध्यमों से अपना विरोध दर्ज करा रहे हैं. स्कूल के पूर्व छात्र और वर्तमान में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के कर्मचारी प्रदीप राय कहते हैं कि कोई भी व्यक्ति विशेष किसी संस्था से ऊपर नहीं होता. ऐसा करना स्कूल के हजारों पूर्व छात्रों की भावनाओं का दोहन है. साथ ही कहते हैं कि अगर आज खुद कैप्टन मनोज पांडे जीवित होते तो इस राजनीतिक प्रपंच को लेकर उनका रवैया भी कुछ ऐसा ही होता.
ऐसा किया जाना स्वीकार्य नहीं...
स्कूल के पूर्व छात्र और ओल्ड ब्वॉयज एसोसिएशन के लिए लंबे समय से कार्यरत अमित जायसवाल इस फैसले के पूरी तरह विरोध में हैं. वे कहते हैं कि स्कूल की स्थापना के इतने सालों के बाद ऐसा किया जाना कहीं से भी स्वीकार्य नहीं है. हालांकि, वे इसके बाबत कैप्टन मनोज कुमार पांडे के माता-पिता को विश्वास में लिए जाने की बात कहते हैं. उन्होंने इस मामले में आरटीआई भी फाइल की है और वे कानूनी तौरतरीकों से बढ़ने की बात कहते हैं. इसके साथ ही वे लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल कॉलेज के नाम को बदले जाने के पीछे की मंशा और विरोध का भी जिक्र करते हैं.