वाराणसी में बाढ़ की विभीषिका के बीच अच्छी खबर यह है कि गंगा के जलस्तर में लगातार घटाव जारी है. इसके चलते गंगा के तटवर्ती इलाकों के लोगों को काफी राहत मिली है, लेकिन अब भी गंगा खतरे के निशान से ऊपर बह रही है.
गंगा में घटाव के बावजूद बाढ़ ग्रस्त इलाकों में बाढ़ पीड़ितों की दिक्कतें कम नहीं हुई हैं. उन्हीं में से एक है, आदर्श ग्राम योजना के तहत पीएम मोदी की ओर से गंगा किनारे का गोद लिया हुआ गांव 'डोमरी'. गंगा के ठीक किनारे बसे होने के चलते गंगा का पानी गांव के निचले इलाके को जलमग्न कर चुका है और कई बस्तियों और गलियों में अब भी नाव चल रही है. 'आजतक' जब उन बाढ़ प्रभावित इलाकों में पहुंचा तो बाढ़ पीड़ितों ने सरकारी मुलाजिम के सामने ही पोल खोलकर रख दी और बताया पूरे बाढ़ के दौरान उनके दरवाजे कोई पूछने तक नहीं आया.
गंगा का जलस्तर जैसे ही उफान पर होता है, वैसे ही बाढ़ का पानी डोमरी गांव में प्रवेश कर जाता है. वाराणसी में शनिवार शाम को आई रिपोर्ट के मुताबिक गंगा का जलस्तर 71.56 मीटर है जो खतरे के निशान 71.26 मीटर से 30 सेंटीमीटर ऊपर है. गंगा में घटाव डोमरी गांव के बाढ़ पीड़ितों राहत भरी खबर जरूर है, लेकिन अब भी उनकी दुश्वारियां कम नहीं हो पाई हैं. यही वजह थी कि बाढ़ की राहत सामग्री और पानी लेकर पहुंचे नगर पंचायत सूजाबाद के अधिशासी अधिकारी के सामने ही बाढ़ पीड़ितों ने पोल खोलकर रख दिया और बताने लगे कि उनके यहां पहली बार कोई सरकारी अधिकारी या कर्मचारी आ रहा है. अभी तक कोई पूछने तक नहीं आया कि कैसे जिंदगी चल रही है.
डोमरी गांव में पहली बार बिस्किट और पानी अधिशासी अधिकारी के लेते ही युवक ने भी अपनी चुप्पी तोड़ दी और बताया कि अभी जलस्तर कम हुआ है. लेकिन पहले बालकनी में ही रहना पड़ता था. आने-जाने और खाने पीने में काफी दिक्कत हुई है. सरकार की ओर से बाढ़ पीड़ितों को मिल रहा राशन भी अभी नहीं मिला है.
वहीं इस मामले राहत सामग्री बाट रहे नगर पंचायत सूजाबाद के अधिशासी अधिकारी अजीत सिंह ने बताया कि बाढ़ में अक्सर बड़ी नाव से दौरा होता था, इसलिए अब पानी कम होने के चलते छोटी नाव लेकर बस्तियों के अंदर तक जा पाना संभव हुआ है. पहले दौरे के दौरान दूर से ही बाढ़ पीड़ितों से नाव से ही पूछ लिया जाता था और किसी तरह की दिक्कत बताए जाने पर उनके पास जाया जाता था.
बाढ़ पीड़िता बेबी श्रीवास्तव ने बताया कि अभी तक उनके घर तक कोई नहीं आया. पहली बार अभी राहत सामग्री लेकर कोई आया है. वहीं अधिशासी अधिकारी ने फिर स्वीकारा कि बाढ़ के चलते घनी बस्तियों में नाव से जाना संभव नहीं हुआ था. लेकिन लगातार एनाउंस कराकर लोगों को बाढ़ राहत शिविर और भोजन और राशन वितरण तक लोगों को बुलाया जाता रहा है. उन्होंने बताया कि सूजाबाद नगर पंचायत जिसके अंतर्गत डोमरी और सूजाबाद गांव को मिलाकर बनाया गया है. इसमें 500 मकानों के 1200-1300 लोग बाढ़ प्रभावित हैं. शासन की ओर से मिले 300 राशन किट का वितरण करा दिया गया है.
ऐसा नहीं है कि डोमरी गांव के सभी बाढ़ प्रभावित लोगों तक मदद नहीं पहुंची. कई लोगों तक मदद पहुंची भी है और कइयों को अभी शिकायत है कि उनतक मदद नहीं मिली. बाढ़ के पानी से घिरे मकान के दरवाजे पर बैठे चंदन पांडेय ने बताया कि सरकार की ओर से सभी सुविधा मिली है. खाने के अलावा आने जाने के लिए नाव लगी है. अभी पानी घट रहा है, उम्मीद है कि पानी और घट जाएगा. राहत सामग्री से लेकर नाव की भी व्यवस्था मिली है. तो वहीं एक महिला पूनम ने बताया कि अभी तक कोई सरकारी मदद नहीं मिली है. 8 दिनों से परेशान है.
गोंडा में बिजली के 4 टावर घाघरा नदी के चपेट में आए
वहीं, यूपी के गोंडा जिले में घाघरा नदी के उफान पर आने से देवी पाटन मंडल की बिजली व्यवस्था पर खतरा पैदा हो गया है. बिजली के 4 टावर घाघरा नदी के बीच बाढ़ व कटान में आ गए हैं. विद्युत पारेषण मंडल गोंडा के अभियंता सुभाष चंद्र की मानें तो कटान में आए एक टावर के डिस्मेंटल का काम जारी है और इस लाइन की बिजली आपूर्ति बंद कर दी गयी है. मंडल में आने वाली बिजली की वैकल्पिक व्यवस्था कर दी गयी है.
गोंडा को पोषित 220 केवी सोहावल गोंडा बहराइच डबल सर्किट के इन 4 टावरों को खतरा पैदा हो गया है. एक टावर कटान में आने से कभी भी नदी में कट कर समा सकता है. टावरों को खतरे में आता देख विद्युत विभाग चौकस हो गया. आनन-फानन में इन टावरों से आने वाली बिजली की आपूर्ति को बंद कर दिया गया है और कटान के जद में आये टावर के डिस्मेंटल का काम शुरू कर दिया गया है.