
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी के जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की उम्मीदवार पूनम मौर्या का निर्विरोध निर्वाचन तय हो गया है. पूनम मौर्या के खिलाफ समाजवादी पार्टी (सपा) की उम्मीदवार चंदा यादव का नामांकन पत्र खारिज हो गया है. नामांकन के साथ ही दोपहर में शुरू हुआ हाईवोल्टेज ड्रामा देर रात तक चला और इसके बाद जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर चंदा यादव का नामांकन पत्र अस्वीकृत करने का ऐलान कर दिया.
जिला निर्वाचन अधिकारी ने सपा के पर्चे को अवैध घोषित करते हुए रद्द कर दिया और बीजेपी प्रत्याशी के पर्चे को वैध मान लिया. वाराणसी जिला मुख्यालय पर दोपहर से शुरू हुआ हाई वोल्टेज ड्रामा देर रात तक चलता रहा. सपा समर्थकों को पर्चा रद्द करने का पत्र थमाकर बगैर कुछ बताए ही वाराणसी के जिलाधिकारी चलते बने.
स्क्रूटनी के समय यूपी के कैबिनेट मंत्री अनिल राजभर भी मौके पर पहुंचे थे और इसके बाद ही सपा उम्मीदवार का नामांकन निरस्त किया गया. सपा समर्थकों ने स्क्रूटनी के वक्त कैबिनेट मंत्री की मौजूदगी पर भी सवाल खड़े किए हैं.
गौरतलब है कि अन्य पिछड़ा वर्ग की महिला के लिए आरक्षित वाराणसी के जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए बीजेपी की पूनम मौर्या के खिलाफ सपा ने चंदा यादव को उम्मीदवार बनाया था. दोनों दलों की उम्मीदवार ने अपने-अपने पर्चे दाखिल भी कर दिए थे. दोपहर बाद स्क्रूटनी के दौरान ही बीजेपी और सपा, दोनों दलों की ओर से नोटरी की वैधता को लेकर एक-दूसरे पर सवाल उठाए गए. सपा ने नामांकन पत्र में जाति का कालम न भरने का आरोप भी लगाया. दोनों दलों के समर्थक जिला मुख्यालय पर कई बार आमने-सामने आ गए.
मौके पर बार-बार तनावपूर्ण हालात हो जा रहे थे. देर रात जिला निर्वाचन अधिकारी बगैर कोई ऐलान किए ही रायफल क्लब से निकल गए. उनकी तरफ से कुछ समय बाद प्रेस विज्ञप्ति जारी कर सपा उम्मीदवार का पर्चा खारिज किए जाने की जानकारी दी. जिलाधिकारी की ओर से जारी विज्ञप्ति के मुताबिक वाराणसी जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए दो प्रत्याशियों चंदा यादव और पूनम मौर्या की ओर से 2-2 सेट में नामांकन पत्र दाखिल किए गए थे. दोनों पक्ष ने एक दूसरे के नोटरी अधिवक्ताओं की वैधता के बारे में लिखित आपत्ति दाखिल की. दोनों की ओर से जवाब देने के लिए 2-2 घंटे का लिखित टाइम मांगा गया था जो उनको दिया गया. शाम 6.30 बजे फिर से स्क्रूटनी शुरू हुई जिसमें दोनों प्रत्याशियों ने अपना-अपना पक्ष रखा.
कोर्ट जाएगी सपा, डीएम को बनाएगी पार्टी
जिलाधिकारी की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक पूरी स्क्रूटनी के बाद पूनम मौर्या का एक नामांकन पत्र अस्वीकृत हुआ और एक स्वीकृत हुआ. चंदा यादव के दोनों नामांकन पत्र अस्वीकृत हुए. चंदा यादव का पर्चा रद्द हो जाने के बाद सपा के खेमे में मायूसी और नाराजगी, दोनों ही है. सपा के जिलाध्यक्ष सुजीत यादव ने कहा कि हम चुनाव जीतने जा रहे थे तो योगी सरकार के कैबिनेट मंत्री और अधिकारी बीजेपी के एजेंट बन गए और जबरदस्ती पर्चा रद्द कर दिया. उन्होंने कहा कि अब आगे जैसा पार्टी का निर्देश होगा, वैसा किया जाएगा. सपा इसके खिलाफ धरना-प्रदर्शन करेगी और कोर्ट भी जाएंगे. सपा के जिलाध्यक्ष ने कहा कि डीएम वाराणसी को भी पार्टी बनाया जाएगा.
धूपचंडी बोले- आगे लड़ेंगे लड़ाई
सपा सरकार में दर्जा प्राप्त मंत्री रहे मनोज राय धूपचंडी ने इसे लेकर कहा कि पूरी यूपी में जिस तरह से जिला पंचायत अध्यक्ष पद का बीजेपी की ओर से अपहरण किया जा रहा है, वाराणसी में भी वही दोहराया गया. उन्होंने कहा कि स्क्रूटनी के कमरे में यूपी के कैबिनेट मंत्री अनिल राजभर अपने लोगों के साथ आए और उसके बाद से ही फैसला पलट गया और सपा प्रत्याशी चंदा यादव का पर्चा खारिज कर दिया गया. धूपचंडी ने सवाल उठाया कि क्या जिलाधिकारी बताएंगे कि अनिल राजभर किस हैसियत से आए थे? मंत्री और मुख्यमंत्री के दबाव में ऐसा काम हुआ है. पर्चा खारिज किए जाने के पीछे वजह नोटरी का नवीनीकरण न होना वजह बताया गया. हम आगे लड़ाई लड़ेंगे.