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बजरंग दल का 'आत्मरक्षा कैंप', 'दुश्मन' के खेमे पर 'सर्जिकल स्ट्राइक'

बजरंग दल की ओर से इस शिविर का आयोजन 24 से 31 मई तक किया गया. इसे 'प्रांतीय शौर्य प्रशिक्षण शिविर' का नाम दिया गया. शिविर में बजरंग दल के कार्यकर्ताओं का युद्ध कौशल का प्रदर्शन करते हुए उत्साह देखते ही बनता था. शस्त्र अभ्यास शिविर में 'पाकिस्तान सीमा' जैसे बोर्ड और पाकिस्तानी झंडे का इस्तेमाल भी किया गया.

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शिविर में प्रशिक्षण का नजारा
शिविर में प्रशिक्षण का नजारा

हरदोई जिला मुख्यालय से 7 किलोमीटर दूर कुन्दौली गांव में करीब 200 युवक 'हमलावरों' से निपटने के गुर सीख रहे हैं. एक इंटर कॉलेज के पांच एकड़ वाले कैंपस में इन युवाओं को राइफल चलाने और लाठी भांजने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है. साथ ही शारीरिक व्यायाम में भी इन्हें जमकर पसीना बहाना पड़ रहा है.

बजरंग दल की ओर से इस शिविर का आयोजन 24 से 31 मई तक किया गया. इसे 'प्रांतीय शौर्य प्रशिक्षण शिविर' का नाम दिया गया. शिविर में बजरंग दल के कार्यकर्ताओं का युद्ध कौशल का प्रदर्शन करते हुए उत्साह देखते ही बनता था. शस्त्र अभ्यास शिविर में 'पाकिस्तान सीमा' जैसे बोर्ड और पाकिस्तानी झंडे का इस्तेमाल भी किया गया. इसके अलावा 'दुश्मन' के तौर पर दर्शाने के लिए कुछ युवकों के चेहरे पर दाढ़ी और सिर पर हरा स्कार्फ बांध कर अलग सा दिखाने की कोशिश की गई.

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शिविर में प्रशिक्षण का नजारा ऐसा ही दिखा जैसा कि किसी युद्धाभ्यास के दौरान दिखता है. धमाकों के बीच राइफल लेकर हमला बोलने के अलावा आग की एक रिंग भी तैयार की गई. इस रिंग से लड़कों का एक ग्रुप बारी-बारी से कूदता है. इनके खतरनाक करतब करते वक्त हवा में 'भारत माता की जय' के नारे भी लगते हैं. कुछ दूरी से ये सब देखने के लिए मेहमान भी जुटे जो बीच-बीच में तालियां बजाकर युवाओं का हौसला बढ़ाते दिखे.

उत्तर प्रदेश में बीजेपी की सरकार आने के बाद बजरंग दल की ओर से सशस्त्र शिविर का ये पहला आयोजन बताया जा रहा है. बजरंग दल की ओर से इसे प्रांत के 14 जिलों का सामान्य प्रशिक्षण शिविर बताया गया. बजरंग दल के संयोजक अभिषेक द्विवेदी के मुताबिक इस तरह के शिविर में शारीरिक और बौद्धिक, दोनों तरह का प्रशिक्षण दिया जाता है. द्विवेदी ने बताया कि समापन वाले दिन शिविर में भाग लेने वाले प्रशिक्षार्थियों ने 'सर्जिकल स्ट्राइक' के जरिए 'आतंकवाद' पर हमला बोलने की प्रस्तुति दी.

शिविर में हिस्सा लेने आए एक युवा मयंक राज ने कहा- 'यहां हमने सीखा कि कैसे हम लोगों की सेवा कर सकते हैं, कैसे अपने देश की सुरक्षा कर सकते हैं और कैसे लोगों की मदद की सद्भावना अपने अंदर विकसित कर सकते हैं. देश को कभी कोई समस्या का सामना नहीं करना पड़े इसलिए हम हमेशा देश और देश की सेना के साथ खड़े हैं.'

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