यूपी के अयोध्या में श्रीराम मंदिर के गर्भ गृह और भूतल पर पांच मंडप समेत तीन मंजिला सुपर स्ट्रक्चर का निर्माण कार्य जोरों पर शुरू हो गया है. यहां तीर्थयात्रा सुविधा केंद्र, परिसर में अन्य उपयोगी और बुनियादी सुविधाओं की सेवाओं का निर्माण कार्य भी तेजी से चल रहा है. वर्तमान अनुमान के अनुसार, मंदिर और परिसर की कुल निर्माण लागत लगभग 1,800 करोड़ रुपये होगी. दिसंबर 2023 में भक्तों के लिए श्रीराम लला के दर्शन करवाने का टारगेट ध्यान में रखा जा रहा है.
इस सुपर स्ट्रक्चर का निर्माण 6.5 मीटर (21 फीट) ऊंचे चबूतरे पर किया जा रहा है जो इसका सीधा भार उठाएगा. चूंकि अधिकांश प्राचीन मंदिरों का निर्माण प्राकृतिक चट्टानी स्तरों पर किया गया था, उसी को देखते हुए श्री राम मंदिर के निर्माण से जुड़े हुए इंजीनियरों ने चबूतरे के काम के लिए ग्रेनाइट पत्थर को चुना था. फरवरी 2022 में शुरू हुआ प्लिंथ का निर्माण अब पूरा हो गया है.
ग्रेनाइट स्टोन कर्नाटक और आंध्र प्रदेश से मंगाया
प्लिंथ के निर्माण में पत्थरों के बीच इंटरलॉकिंग व्यवस्था द्वारा 5 फीट x 2.5 फीट x 3 फीट आकार के लगभग 17,000 ग्रेनाइट पत्थरों के ब्लॉक का उपयोग किया गया था. प्रत्येक ग्रेनाइट पत्थर के ब्लॉक का वजन लगभग 3 टन है. प्लिंथ में ग्रेनाइट स्टोंस ब्लॉकों के निर्माण और बिछाने के लिए चार टावर क्रेन, कई मोबाइल क्रेन और अन्य उपकरण तैनात किए गए थे. प्लिंथ क्षेत्र करीब 3500 वर्ग मीटर है, जो एक ठोस चट्टान की तरह काम करेगा. प्रमाणित और परखी हुई गुणवत्ता के ग्रेनाइट स्टोन की खरीद कर्नाटक और आंध्र प्रदेश की खदानों से की गई थी.
1,200 कुशल टैक्नीशियन कर रहे हैं नक्काशी का काम
भरतपुर जिले के बंसी पहाड़पुर के राजस्थानी बलुआ पत्थर का उपयोग करके मंदिर के सुपर स्ट्रक्चर का निर्माण किया जा रहा है. ट्रस्ट ने बताया कि बलुआ पत्थरों की नक्काशी और निर्माण का काम शुरू हो गया है. लगभग 1,200 कुशल टैक्नीशियन, राजस्थान में खदानों और वर्कशॉप्स के साथ-साथ श्रीराम मंदिर कार्यस्थल पर भी काम में लगे हुए हैं. पत्थरों की गुणवत्ता और नक्काशी की कारीगरी की निगरानी बेंगलुरु के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ रॉक मैकेनिक्स (एनआईआरएम), आर्किटेक्ट सीबी सोमपुरा और कार्यान्वयन एजेंसियों लार्सन एंड टुब्रो लिमिटेड (एलएंडटी) और टाटा कंसल्टिंग इंजीनियर्स (टीसीई) द्वारा की जा रही है.
राजस्थान का सफेद मकराना संगमरमर लगाया गया
ट्रस्ट ने बताया कि बंसी पहाड़पुर के लगभग 4.75 लाख क्यूबिक फीट पत्थरों का उपयोग मंदिर के सुपर स्ट्रक्चर में किया जाएगा और अब तक निर्माण के लिए उनमें से 40 प्रतिशत नक्काशीदार कर तैयार किया गया है. मुख्य मंदिर में गर्भ गृह, फर्श, मेहराब, रेलिंग और दरवाजे के फ्रेम के लिए राजस्थान से सफेद मकराना संगमरमर को अंतिम रूप दिया गया है. खरीद और नक्काशी का कार्य प्रगति पर है.
5000 भक्तों के लिए प्रतीक्षालय, पीने के पानी की सुविधाएं होंगी
ट्रस्ट ने बयान में कहा- ‘परकोटा की सुपर संरचना का निर्माण बंसी पहाड़पुर जिला भरतपुर से नक्काशीदार लाल राजस्थान बलुआ पत्थर का उपयोग करके किया जाना प्रस्तावित है. आरसीसी रिटेनिंग वॉल और परकोटा की नींव का निर्माण कार्य निर्धारित समय के अनुसार प्रगति पर है. श्रीराम लला मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए तीर्थयात्रा सुविधा केंद्र का निर्माण किया जा रहा है. तीर्थयात्रा सुविधा केंद्र में, जूते और अन्य निजी सामान जमा करने की सुविधा, 5000 भक्तों के लिए प्रतीक्षालय, पीने का पानी, शौचालय और अन्य सुविधाओं की योजना बनाई गई है.’
इन मंदिरों को भी बनाने की योजना
श्री राम जन्मभूमि परिसर के शेष क्षेत्र के लिए मास्टर प्लान को अंतिम रूप दिया जा रहा है, जिसमें यज्ञ मंडप, अनुष्ठान मंडप, संत निवास, संग्रहालय, अनुसंधान केंद्र, पुस्तकालय, आदि जैसी अन्य सुविधाओं के अलावा ऋषि वाल्मीकि, आचार्य वशिष्ठ, ऋषि विश्वामित्र, अगस्त्य ऋषि, निषाद, जटायु और माता शबरी के मंदिरों की योजना बनाई गई है. वहीं, हरित क्षेत्रों पर अधिकतम ध्यान दिया गया है और यह सुनिश्चित किया गया है कि परिसर भक्तों के अनुकूल हो.