बदलते मौसम के साथ पर्यावरण में एक बड़ा बदलावा उत्तराखंड के जोशीमठ में देखने को मिला है. जहां बहता हुआ खुलता हुआ गर्म पानी पूरी तरह से विलुप्त हो चुका है. गर्म पानी के इस कुंड में अब सिर्फ भाप ही भाप दिखाई दे रही है.
(रिपोर्ट: कमल नयन)
दरअसल, चमोली स्थित जोशीमठ से 18 किलोमीटर दूर तपोवन के समीप सलधार में स्थित वर्षों से निकलने वाला प्राकृतिक गर्म पानी का स्रोत अब पूरी तरह से सूख गया है. पानी के कुंड को देखने आए लोग अचंभित हैं कि अचानक इतना बड़ा बदलाव तपोवन के इस गर्म पानी के कुंड में कैसे हो गया है.
यहां पहुंचे लोगों का कहना है वह जब यहां पहली बार आए थे, तब यहां दोनों तरफ गर्म पानी की धाराएं बहती थीं. बीच में पानी उबलता हुआ निकलता दिखाई देता था. यहां की मुल्तानी मिट्टी घर ले जाते थे. यहां अंडे उबाले जाते थे, चावल बनाए जाते थे, लेकिन आज पानी पूरी तरह से गायब हो चुका है.
उनका कहना है कि हालांकि गहराई पर पानी तो दिखाई देता है लेकिन पानी में इतनी ताकत नहीं रह गई कि वह ऊपर आकर दोनों किनारों से बह सके. यहां की मिट्टी हर कोई अपने घर ले जाता था, लेकिन आज यहां मुल्तानी मिट्टी के नाम पर कुछ भी नहीं बचा है सब खत्म हो चुका है.