जोशीमठ से 8 किलोमीटर आगे जाने पर लगभग 7000 फीट की ऊंचाई पर बसा है सुनील गांव. यहां से ही इस आपदा की शुरुआत हुई थी. महीनों पहले घरों की दीवारों में थोड़ी बहुत दरार दिखाई देने लगी थी. पिछले 8 दिनों में यह दरारें इतनी बड़ी हो गई हैं कि अब घर ही दरकने लगे हैं.
पहाड़ की ढलाव पर बसा सुनील गांव अब खत्म होने के कगार पर है. यहां रहने वाले कुछ परिवारों को होटल में शिफ्ट किया गया है, लेकिन दिन में यह लोग घरों में चले आते हैं. क्योंकि इन्हें अपने सामान मवेशियों और खेतों की चिंता है.
भूस्खलन की जद में आने से जोशीमठ का भगवती मंदिर धराशायी हो गया. बताया जा रहा है कि सिंहधार वार्ड में यह पहला मामला है. अभी तक सिर्फ दीवारों में दरारें ही आई थीं, लेकिन अब मंदिर गिरने से लोगों में दहशत का माहौल है. वहीं दिन प्रति दिन यहां घरों में दरारें बढ़ती जा रही हैं.
जोशीमठ शहर के बीचों-बीच पहाड़ पर बने इस घर में रेखा का बचपन बीता था. जहां अपने भाइयों बहनों के साथ खेलीं और पली-बढ़ीं. रेखा का वही घर अब ढहने की स्थिति में है.
जोशीमठ अकेला नहीं है. पहाड़ी राज्य उत्तराखंड में इसी तरह की और भी आपदाएं आ रही हैं. पौड़ी, बागेश्वर, उत्तरकाशी, टिहरी गढ़वाल और रुद्रप्रयाग का भी यही हश्र हो सकता है. इन जिलों के स्थानीय लोगों को जोशीमठ जैसे हालात का डर है.
जोशीमठ में आई त्रासदी ने सैकड़ों जिंदगियों के सामने अंधेरा ला दिया है. खतरे की जद में आए घरों पर लाल निशान लगाकर लोगों को खाली करने के लिए कह दिया गया है. 80 से ज्यादा परिवारों को या तो सुरक्षित होटलों में या राहत कैंपों में रखा गया है.
स्थानीय लोगों में नाराजगी देखने को मिल रही है और वे घरों और होटलों की बढ़ती संख्या और तपोवन विष्णुगढ़ NTPC पन बिजली परियोजना समेत मानव निर्मित फैक्टर्स को दोषी ठहरा रहे हैं. लोग मुआवजे की मांग को लेकर भी प्रदर्शन कर रहे हैं.
सवाल ये है कि जोशीमठ को इस हालत में कैसे लाया गया है, गिराने की जितनी जल्दी है, क्या बनाते समय इतना दिमाग खपाया गया? जिस जोशीमठ में 1976 से सरकारी रिपोर्ट कहती रही कि लैंडस्लाइड के मलबे पर बसे जोशीमठ में ज्यादा निर्माण कार्य खतरे की वजह बनेगा. वहां 47 साल तक पार्षद से लेकर मुख्यमंत्री तक क्यों आंखें बंद किए रहे?
आधा दर्जन से ज्यादा रिपोर्ट्स में जोशीमठ के धंसने की बात कही गई थी. 1976- गढ़वाल के तत्कालीन कमिश्रन महेश चंद्र मिश्रा की रिपोर्ट, 2006- जोशीमठ लोकलाइज्ड सब्सिडेंस एंड एक्टिव इरोजन ऑफ द एटी वाला रिपोर्ट 2020 में जियोलॉजिस्ट और उत्तराखंड स्पेस एप्लिकेशन सेंटर की स्टडी, 2021- रैणी हादसा, स्वतंत्र कमेटी की रिपोर्ट, सितंबर 2022- राज्य आपदा प्रबंधन की सर्वे रिपोर्ट.