कोरोना का खौफ हरिद्वार कुंभ के अंतिम शाही स्नान में देखने को मिल रहा है. शाही स्नान के बावजूद घाटों पर सामान्य से भी कम श्रद्धालुओं की भीड़ दिख रही है. कुंभ का अंतिम शाही स्नान होने और चैत्र पूर्णिमा का स्नान होने के बाद भी घाटों पर इतनी कम भीड़ होने से साफ है कि आस्था पर कोरोना भारी है.
बता दें कि सनातन धर्म में चैत्र पूर्णिमा का विशेष महत्व है. चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को चैत्र पूर्णिमा कहते हैं. चैत्र हिंदी वर्ष का प्रथम मास होता है, इसलिए इसे प्रथम चंद्रमास भी कहा जाता है. चैत्र पूर्णिमा को भाग्यशाली पूर्णिमा भी माना गया है. कहते हैं इस दिन व्रत रखने से न सिर्फ मनोकामना की पूर्ति होती है बल्कि ईश्वर की भी अपार कृपा भी प्राप्त होती है.
9 बजे तक ही आम लोग कर सकेंगे स्नान
चैत्र पूर्णिमा के दिन ब्रह्म मुहूर्त में गंगा स्नान करके व्रत करने और माता लक्ष्मी की भी उपासना करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं. हर की पौड़ी पर स्नान का वक्त सुबह 9 बजे तक रखा गया है. 9 बजे गंगा घाटों को खाली करवा लिया जाएगा और उसके बाद सभी 13 अखाड़ों के संतों द्वारा कोरोना संक्रमण के चलते प्रतीकात्मक शाही स्नान किया जायेगा.
कम भीड़ से श्रद्धालु खुश
कुंभ के अंतिम शाही स्नान के दौरान भीड़ कम होने और सोशल डिस्टेंसिंग के साथ स्नान करने के प्रबंध के चलते श्रद्धालु खुश हैं और कह रहे हैं कि प्रशासन द्वारा अच्छी व्यवस्था की गई है. यहां सभी लोग मास्क लगाकर आ रहे हैं. हरिद्वार पहुंच रहे श्रद्धालुओं का कई बार रैपिड टेस्ट किया जा रहा है.
प्रतीकात्मक होगा शाही स्नान
आईजी कुंभ संजय गुंज्याल का कहना है कि कोरोना के कारण शाही स्नान प्रतीकात्मक होगा, आमतौर पर जहां एक लाख तक भीड़ हो जाती है, वहीं इस बार मुश्किल से 50 से 100 के बीच में लोग शाही स्नान करेंगे, पहले हम हरकी पौड़ी घाट को सुबह सात बजे ही आम श्रद्धालुओं से खाली करवा लेते थे, लेकिन आज 9 बजे तक वो स्नान कर सकते हैं.