जैसे-जैसे गर्मियां आ रही हैं, जंगलों की आग के साथ-साथ उत्तराखंड को एक और गंभीर समस्या का सामना करना पड़ रहा है- वह है पीने के पानी का संकट. उत्तराखंड जल संस्थान और जल निगम द्वारा हाल ही में किए गए एक सर्वेक्षण से पता चलता है कि राज्य के 148 शहरी और 317 ग्रामीण क्षेत्रों में जल्द ही पानी खत्म हो सकता है.
गढ़वाल में 84 शहरी और 134 ग्रामीण क्षेत्र पेयजल संकट का सामना कर रहे हैं, जबकि कुमाऊं में 64 शहरी और 183 ग्रामीण क्षेत्रों में पीने के पानी की कमी हैं. देहरादून में स्थिति विशेष रूप से गंभीर है, जहां 51 मलिन/ग्रामीण क्षेत्र और 40 शहरी क्षेत्र खतरे में हैं, इसके बाद अल्मोड़ा और नैनीताल का स्थान है, जहां जल भंडार तेजी से कम हो रहा है.
इस संकट से निपटने के लिए उत्तराखंड जल संस्थान ने एक योजना बनाई है. प्रभावित इलाकों में पानी पहुंचाने के लिए उत्तराखंड जल संस्थान अपने 69 पानी के टैंकरों का इस्तेमाल करेगा और 198 अतिरिक्त टैंकर किराए पर लेगा. जल संस्थान की मुख्य महाप्रबंधक नीलिमा गर्ग का कहना है कि स्थिति पर कड़ी नजर रख रखी जा रही है और मदद के लिए अन्य जल स्रोतों की तलाश कर रहे हैं.
आजतक के साथ विशेष बातचीत में, प्रमुख पर्यावरणविद् पद्मश्री डॉ. अनिल जोशी ने कहा कि भारत में जल संकट मंडरा रहा है और जल्द ही हम संकट के दौर में प्रवेश करने वाले हैं. प्राकृतिक जल को संरक्षित करने की आवश्यकता है और सरकार को अभी से इस दिशा में काम करना चाहिए, इससे पहले कि बहुत देर हो जाए. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सूर्यकांत धस्माना ने देहरादून की 120 कॉलोनियों में पानी के संकट को लेकर सरकार पर निशाना साधा
धस्माना ने कहा कि देहरादून में कुछ कॉलोनियां ऐसी हैं जहां लोग पानी के संकट से जूझ रहे हैं और उन्हें पीने का पानी नहीं मिल रहा है. साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि अगर इस समस्या का जल्द समाधान नहीं हुआ तो कांग्रेस पार्टी सड़कों पर उतरकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करेगी.