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उत्तराखंड में फटा बादल, मलबे में दबने से एक ही परिवार के 3 लोगों की मौत

SDRF को सूचना मिली थी कि बादल फटने के बाद एक ही परिवार के तीन सदस्स फंस गए हैं. उस सूचना के आधार पर SDRF ने तुरंत उपकरणों के साथ अपनी एक टीम मौके पर रवाना कर दी और सर्च ऑपरेशन शुरू हुआ.

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उत्तराखंड में फटा बादल
उत्तराखंड में फटा बादल
स्टोरी हाइलाइट्स
  • उत्तराखंड में फटा बादल
  • एक ही परिवार के 3 लोगों की मौत
  • SDRF ने कई घंटे चलाया सर्च ऑपरेशन

उत्तराखंड के लिए गुरुवार सुबह काफी भारी साबित हुई. करीब साढ़े आठ बजे चकराता ग्रामीण इलाके में एक बादल फटा जिससे तीन लोगों की मौत हो गई. मारे गए तीनों लोग एक ही परिवार के बताए जा रहे हैं और उनके शव को SDRF द्वारा रेस्क्यू ऑपरेशान के दौरान निकाला गया है.

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जानकारी मिली है कि जिस समय बादल फटा था, तब ये परिवार अपने घर में ही मौजूद था. लेकिन बादल फटने के बाद मलबा इतनी तेजी से आगे बढ़ा कि परिवार खुद को बचा ना पाया और देखते ही देखते उसमें दब गया.

उत्तराखंड में फटा बादल

SDRF को सूचना मिली थी कि बादल फटने के बाद एक ही परिवार के तीन सदस्स फंस गए हैं. उस सूचना के आधार पर SDRF ने तुरंत उपकरणों के साथ अपनी एक टीम मौके पर रवाना कर दी और सर्च ऑपरेशन शुरू हुआ. अब वो रेस्क्यू तो कई घंटे चलता रहा, लेकिन किसी को भी बचाया नहीं जा सका. मारे गए तीन लोगों में दो तो छोटी बच्ची हैं जो मलबे में काफी अंदर तक धंस गई थीं. उनके शव को बाहर निकालना भी SDRF के लिए एक बड़ी चुनौती था. मृत के नाम मुना, काजाल और साक्षी बताए गए हैं.

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एक ही परिवार के 3 लोगों की मौत

खबर है कि तीन शव के अलावा SDRF को दो बैल ओर 3 बकरियां भी बरामद हुई हैं. सर्च ऑपरेशन को चार घंटे तक चलाया गया था, लेकिन बाद में जब पुष्टि हो गई कि कोई और नहीं दबा हुआ है, तब उस ऑपरेशन को खत्म कर दिया गया. कहा जा रहा है कि क्योंकि राज्य में भारी बारिश हो रही थी, उसी वजह से वो बादल भी फटा और तीन लोगों को अपनी जान से भी हाथ धोना पड़ गया.

राज्य में इस साल इससे पहले भी बादल फटने की घटना देखने को मिली हैं. एक तरफ फरवरी वाली घटना में कई लोगों ने अपनी जान गवा दी थी, तो वहीं हाल ही में फटे बादल में ज्यादा जान-माल की हानि नहीं हुई. लेकिन क्योंकि राज्य में कई बार भारी बारिश का दौर देखने को मिलता है, ऐसे में बादल फटने की घटनाएं भी आम रहती हैं और लोगों का इस वजह से जान गवाना भी लगा रहता है. (रिपोर्ट- अरविंद कुमार ओझा)

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