scorecardresearch
 

Uttarakhand: क्या संवैधानिक कारणों से ज्यादा सियासी वजहों से गई तीरथ सिंह रावत की कुर्सी?

तीरथ सिंह रावत के नेतृत्व में बीजेपी सरकार उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले की सल्ट विधानसभा सीट पर उपचुनाव में पार्टी को जीत दिलाने में सफल रहे. इसके बावजूद बीजेपी उनके नेतृत्व में 2022 के चुनाव मैदान में उतरने का साहस नहीं जुटा पा रही थी.

Advertisement
X
तीरथ सिंह रावत (फाइल फोटो)
तीरथ सिंह रावत (फाइल फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • तीरथ सिंह रावत ने पद से दिया है इस्तीफा
  • संवैधानिक कारणों का इस्तीफे में दिया हवाला

उत्तराखंड में बीजेपी ने एक बार फिर अपने मुख्यमंत्री को बदल दिया है. तीरथ सिंह रावत ने शुक्रवार को देर रात मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है और अब उनकी अब उनकी जगह नए विधायक दल के नेता को चुना जाएगा. तीरथ सिंह रावत के इस्तीफे की वजह संवैधानिक संकट है या फिर उत्तराखंड में बीजेपी की सियासी मजबूरी? अगले साल शुरुआत में राज्य में विधानसभा चुनाव होने हैं. ऐसे में माना जा रहा है कि तीरथ की विदाई संवैधानिक से ज्यादा राजनीतिक कारण हैं. 

Advertisement

तीरथ सिंह के मुख्यमंत्री पद से हटने के पीछे संवैधानिक कारणों का प्रमुख रूप से उल्लेख किया जा रहा है. तीरथ ने खुद भी संवैधानिक कारण बताया. हालांकि, सांसद से मुख्यमंत्री बने तीरथ सिंह रावत तीन महीने और 23 दिन के अपने कार्यकाल में नेतृत्व क्षमता साबित नहीं कर पाए. ऐसे में बीजेपी को तीरथ के चेहरे के साथ 2022 के चुनावी जंग फतह करने की उम्मीद नहीं दिख रही थी. 

मार्च में त्रिवेंद्र सिंह रावत को चार साल के कार्यकाल पूरा करने से पहले मुख्यमंत्री पद से हटाने के पीछे सबसे बड़ी वजह यह थी पार्टी उनके चेहरे को आगे रखकर चुनाव मैदान में नहीं उतरना चाहती थी. इसीलिए त्रिवेंद्र सिंह की जगह तीरथ रावत को कुर्सी सौंपी गई. बीजेपी को उनसे बड़ी उम्मीदें थी.

उत्तराखंड LIVE: सीएम की रेस में युवा चेहरे का नाम, देहरादून में विधायक दल की बैठक

Advertisement

तीरथ सिंह पर बीजेपी को भरोसा नहीं!

तीरथ सिंह रावत के नेतृत्व में बीजेपी सरकार उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले की सल्ट विधानसभा सीट पर उपचुनाव में पार्टी को जीत दिलाने में सफल रहे. इसके बावजूद बीजेपी उनके नेतृत्व में 2022 के चुनाव मैदान में उतरने का साहस नहीं जुटा पा रही थी. 

हाल ही में 27 जून को उत्तराखंड के नैनीताल जिले के रामनगर में बीजेपी के तीन दिन तक चले चिंतन शिविर के बाद पार्टी का सबसे पहला रणनीतिक कदम मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत के इस्तीफे की पेशकश के रूप में सामने आया. बीजेपी के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष ने सूबे की नब्ज टटोली और प्रदेश के राजनीतिक माहौल की रिपोर्ट शीर्ष नेतृत्व को सौंपी. 

2022 के चुनाव का चेहरा नहीं तीरथ सिंह

ऐसे में चिंतन शिविर के तुरंत बाद मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत को दिल्ली तलब किया गया. फिर तीन दिन तक लगातार मंथन के बाद यह तय हो गया कि बीजेपी हाईकमान 2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव तक तीरथ सिंह रावत को मुख्यमंत्री के चेहरे के तौर पर आगे नहीं करेगी.

मुख्यमंत्री पद संभालते ही तीरथ सिंह रावत को सबसे पहले हरिद्वार में महाकुंभ के मोर्चे पर परीक्षा देनी पड़ी. कोरोना संकट के बीच उन्होंने तीर्थ यात्रियों को खूल छूट दे दी, जिसके चलते सरकार की काफी किरकिरी हुई. हालत यह हो गए कि पीएम मोदी को हस्ताक्षेप करना पड़ा, लेकिन कुंभ के दौरान कोरोना की जांच में फर्जीवाड़ा उजागर हुआ. इसके चलते सरकार की प्रशासकीय क्षमता पर सवाल खडे हुए.

Advertisement

बार-बार फिसली सीएम की जुबान!

कोरोना के संदर्भ में गंगा को लेकर दिए गए बयान पर मुख्यमंत्री को सफाई देनी पड़ी. इतना ही नहीं कई बार उनकी जुबान फिसली, जिससे विपक्ष को हमला करने का मौका मिला. इस तरह से तीरथ रावत नेतृत्व क्षमता दिखाने के लिए मिले मौके को साबित करने से चूक गए. इसके चलते पार्टी में उनके खिलाफ अविश्वास बढ़ा.

वहीं, त्रिवेंद्र सिंह रावत सरकार के कुछ फैसलों से उपजे जनाक्रोश को थामने की कवायद में मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत के लंबे सख्त रुख को भी पार्टी के भीतर संतुलन के नजरिए से अच्छे संकेत के रूप में नहीं देखा गया. बयानों के आधार पर गढ़ी गई छवि को तीरथ तोड़ नहीं सके. सरकार की प्रशासकीय क्षमता पर उठे सवाल आखिरकार मुख्यमंत्री की कुर्सी पर भारी पड़ गए. 

राजनीतिक प्रयोगशाला बना उत्तराखंड!

मुख्यमंत्री पद को लेकर उत्तराखंड की सिसायत में बीजेपी राजनीतिक प्रयोग करती रही है, लेकिन उनके प्रयास निरर्थक साबित हुए. साल 2017 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी 70 में से 57 सीटें जीतकर उत्तराखंड की सत्ता में वापसी की थी. इसके बाद बीजेपी में मुख्यमंत्री पद तत्कालीन बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट, प्रकाश पंत, बंशीधर भगत और यशपाल आर्य प्रमुख दावेदार माने जा रहे थे, लेकिन बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व ने त्रिवेंद्र सिंह रावत को सत्ता की कमान सौंपी थी. 

 

Advertisement

हालांकि, चार साल के बाद और चुनाव से ठीक पहले पार्टी यह बात समझ गई थी कि 2022 में त्रिवेंद्र सिंह के चेहरे के साथ नहीं जीता जा सकती. उनकी जगह तीरथ रावत सिंह की ताजपोशी की गई. चुनाव हार जाने की आशंका के चलते सीएम का बदलाव किया गया जिससे सत्ताविरोधी लहर को मात दी जा सके. लेकिन चार महीने में पार्टी को यह एहसास हो गया है कि 2022 में पार्टी की सियासी नैया मौजूदा चेहरे के साथ पार नहीं होगी. यही वजह कि पार्टी अब नए चेहरे की तलाश में जुट गई है, जिसके सहारे अगले चुनाव की जंग को फतह किया जा सके.

 

Advertisement
Advertisement