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Kumbh 2021: पेशवाई का मुस्लिमों ने किया स्वागत, हेलिकॉप्‍टर से बरसाए गए फूल 

उत्तराखंड के लक्सर जिले में श्री पंचायती अखाड़ा बड़ा उदासीन की निकली पेशवाई में गंगा-जमुनी तहजीब का शानदार संगम देखने को मिला. यहां मुस्लिम समाज ने पेशवाई में शामिल संतों का फूल माला पहनाकर स्वागत किया, तो वहीं पेशवाई पर हेलिकॉप्टर से पुष्प वर्षा भी की गई.   

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पेशवाई का मुस्लिमों ने किया स्वागत
पेशवाई का मुस्लिमों ने किया स्वागत
स्टोरी हाइलाइट्स
  • लक्सर में दिखी भारत की गंगा-जमुनी तहजीब
  • मुस्लिम समाज के लोगों ने किया संतों का स्वागत
  • श्री पंचायती अखाड़ा बड़ा उदासीन की निकली पेशवाई

उत्तराखंड में भव्य शुरुआत कर चुके कुंभ के अवसर पर इस बार हरिद्वार जिले के देहात क्षेत्र में भी शाम तक लोग पेशवाई का भरपूर लुत्फ उठा रहे हैं. अखाड़े की पेशवाई के दौरान संतों पर हेलीकॉप्टर से पुष्प वर्षा की गई. यही नहीं लस्कर में संतों का स्वागत बड़े ही धूमधाम से किया गया. गाजे-बाजे के साथ मुस्लिम समाज के तमाम लोगों ने फूल मालाएं पहनाकर संतों का स्वागत किया.

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लक्सर में बुधवार को श्री पंचायती अखाड़ा बड़ा उदासीन की शोभायात्रा निकाली गई. इस शोभा यात्रा में हिंदू धर्म के अलावा अन्य धर्म के अनुयायियों और उससे जुड़े लोगों द्वारा फूल-मालाओं के साथ साधु-संतों का जोरदार स्वागत किया गया. इतना ही नहीं इस दौरान हेलिकॉप्टर से पेशवाई पर पुष्प वर्षा कर इसे भव्यता और दिव्यता का रूप दिया गया. पेशवाई में हिंदू-मुस्लिम भाईचारे का शानदार संदेश देखने को मिला. मुस्लिम समाज के लोगों ने फूल मालाएं पहनाकर संतों का अभिवादन और स्वागत किया.


कई जगहों पर निकलेगी शोभा यात्रा
श्री पंचायती अखाड़ा बड़ा उदासीन के महंत प्रेमदास महाराज ने बताया कि पूरे भारत में हमारे 13 अखाड़े हैं, उसमें पंचायती अखाड़ा बड़ा उदासीन एक है. अखाड़े का लक्सर से पीपली गांव , निर्वाणसर में आश्रम है, वहां ये शोभा यात्रा जा रही है. उन्होंने बताया कि ये समझ लो कि पूर्ण कुंभ मेला 2021 के लिए हमारे अखाड़े का मेला आज से शुरू हो गया है.

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महंत प्रेमदास ने कहा कि चार दिन निर्वाणसर में पड़ाव के बाद फिर 6 मार्च को फिर शोभा यात्रा निकलेगी. यहां से अकबरपुर उज जाएंगे. फिर 10 मार्च को शोभा यात्रा महतौली पहुंचेगी, जहां 5 से 6 दिन रुकेंगे. उसके बाद बादशापुर और फिर शाहपुर में पड़ाव होगा. इसके बाद भेरूपुर में पड़ाव होगा. उसके बाद हमारी धर्म ध्वजा कंकण में खड़ी होगी. (इनपुट- चांदनी कुरैशी)

 

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