उत्तराखंड के चर्चित उद्यान घोटाले मामले में उत्तराखंड सरकार की याचिका खारिज हो गई है. सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली राज्य सरकार की याचिका खारिज कर दी है. सरकार का कहना था कि वह खुद मामले की SIT जांच कर रही है, जिसपर उनको भरोसा है.
दरअसल, उत्तराखंड हाईकोर्ट ने पिछले साल 26 नवंबर को करोड़ों रुपयों के उद्यान घोटाले की जांच सीबीआई से करवाने के आदेश दे दिए थे. सीबीआई ने अपनी जांच पड़ताल शुरू भी कर दी. जांच डेढ़ महीने से अधिक समय चली. लेकिन जांच के दौरान कई बड़े नाम आने के बाद सरकार अब उच्च न्यायालय के निर्णय के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर करने पहुंची थी.
सामाजिक कार्यकर्ता दीपक करगेती ने किसानों के साथ मिलकर सबसे पहले उद्यान विभाग के निदेशक हरमिंदर सिंह बवेजा को उद्यान निदेशालय चौबटिया में 16 अप्रैल 2022 को 9 महीने के बाद आने के कारण ताला बंद कर दिया, क्योंकि बावेजा निलंबित कर दिए गए थे. दीपक ने सरकार से मांग की कि उद्यान विभाग का निदेशालय 1953 से अल्मोड़ा जिले के चौबटिया में है. सभी कर्मचारियों को तनख्वाह भी यहीं से निकलती है. इसके बाद भी अधिकारी मुख्यालय में न बैठकर देहरादून से कार्य करते हैं.
न्यायालय ने सरकार से 6 सप्ताह में जवाब मांगा
14 सितंबर 2022 को सरकार ने उद्यान विभाग में भ्रष्टाचार की जांच के आदेश दिए थे. जांच रिपोर्ट 15 दिन में प्रस्तुत करने को कहा गया था. पूरा साल बीत जाने के बाद भी जांच कहां है क्या है कुछ पता नहीं चला. 7 जनवरी 2023 को दीपक ने उच्च न्यायालय में जनहित याचिका डाली, जिसे स्वीकार करते हुए न्यायालय ने सरकार से 6 सप्ताह में जवाब मांगा था.
इसी बीच उत्तरकाशी में अनिका ट्रेडर्स नाम की नकली नर्सरी को पौध खरीद का लाइसेंस देकर करोड़ों रुपयों की चोरी का नया खेल बवेजा ने शुरू कर दिया. इसका उत्तरकाशी के किसानों ने विरोध किया. 1 मार्च 2023 को नकली नर्सरी को लेकर दीपक की दूसरी जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने बवेजा को 28 मार्च को कोर्ट में पेश होने के आदेश दिया.
सीबीआई ने कोर्ट को बताया कि सीबीआई ने जांच में गड़बड़ी पाई
साथ ही अनिका ट्रेडर्स को होने वाले सभी भुगतान पर रोक लगा दी. सरकार से जवाब मांगते हुए सचिव उद्यान को सख्त कार्रवाई के आदेश दे दिए. इसके बाद बवेजा ने उत्तरकाशी और अन्य जिलों में अनिका ट्रेडर्स को भुगतान कर दिया. 26 जून 2023 को न्यायालय ने दीपक की तीसरी जनहित याचिका स्वीकार करते हुए सीबीआई को जांच कर संपूर्ण प्रकरण पर उसकी राय मांगी. इसके बाद सीबीआई ने कोर्ट को बताया कि सीबीआई ने इसमें गड़बड़ी पाई है.
सरकार के वकील ने कोर्ट में पैरवी की कि राज्य सरकार की एजेंसी एसआईटी इस जांच को गंभीरता से जांच करेगी. कृपया पहले एसआईटी को जांच करने दिया जाए. सरकार ने वकील के माध्यम से एसआईटी को 15 दिन में जांच कर रिपोर्ट सील बंद लिफाफे में प्रस्तुत करने को कहा है.