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गोलीबारी और पिस्टल रन कर फंसे उमेश कुमार और कुंवर प्रणव चैंपियन की दुश्मनी की कहानी, कभी दोस्त हुआ करते थे, फिर विधायकी के लिए हुई दुश्मनी

काफी समय से हरिद्वार के खानपुर से विधायक उमेश कुमार और पूर्व विधायक प्रणव चैंपियन के बीच गाली-गलौज और एक दूसरे को धमकियां देने का सिलसिला चल रहा था, जिसके बाद अब बात फायरिंग और घर में घुसकर धमकी देने तक पहुंच गई.

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विधायक उमेश कुमार और पूर्व विधायक प्रणव चैंपियन.
विधायक उमेश कुमार और पूर्व विधायक प्रणव चैंपियन.

उत्तराखंड के हरिद्वार में विधायक उमेश कुमार और पूर्व विधायक कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन के बीच फायरिंग कांड के बाद तनाव बढ़ गया है. अपने बंगले पर फायरिंग के बाद गुस्से से तमतमाए उमेश कुमार हाथ में पिस्टल लेकर पूर्व विधायक प्रणव चैंपियन से बदला लेने निकल पड़े. हालांकि, पुलिसकर्मियों ने उन्हें समर्थकों के साथ जैसे-तैसे रोका. एक समय था, जब उमेश कुमार और प्रणव चैंपियन दोस्त हुआ करते थे. आइए जानते हैं कि दोनों की दोस्ती आखिर क्यों दुश्मनी में बदल गई.

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बता दें कि काफी समय से हरिद्वार के खानपुर से विधायक उमेश कुमार और पूर्व विधायक प्रणव चैंपियन के बीच गाली-गलौज और एक दूसरे को धमकियां देने का सिलसिला चल रहा था. प्रणव चैंपियन की एक सोशल मीडिया पोस्ट के बाद उमेश कुमार 25 जनवरी रात चैंपियन के लंढोर स्थित घर पर कई लोगों को लेकर पहुंचे थे. जब चैंपियन घर पर नहीं मिले तो उमेश वहां से लौट गए. इसके बाद बदला लेने के लिए चैंपियन उनके घर आ धमके.

कौन है प्रणव चैंपियन?

कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन उत्तराखंड के खानपुर से 4 बार विधायक रह चुके हैं. चैंपियन ने एनडी तिवारी, विजय बहुगुणा और हरीश रावत की सरकारों में कैबिनेट मंत्री के रूप में जिम्मेदारी निभाई है. 2009 के चुनाव में उन्होंने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत का विरोध किया था, जिससे बाद उनके पार्टी के साथ मतभेद उभरकर सामने आ गए थे. हालांकि, 2016 में उन्होंने राजनीतिक हलचल मचाते हुए बीजेपी का दामन थाम लिया था. यह वह समय था, जब कांग्रेस के 9 विधायकों ने हरीश रावत सरकार को गिराने की कोशिश की थी. लेकिन कोशिस सफल नहीं हो पाई थी. तब विधानसभा अध्यक्ष ने सभी 9 विधायकों को अयोग्य करार दे दिया था.

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चुनावी हार से लगा झटका

चैंपियन का राजनीतिक सफर काफी विवादित और घटनाओं से भरपूर रहा है. 2022 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने उमेश कुमार के खिलाफ अपनी पत्नी को चुनावी मैदान में उतारा था. हालांकि, इस चुनाव में चैंपियन की पत्नी को हार का सामना करना पड़ा और उनकी राजनीतिक यात्रा को बड़ा झटका लगा और इसके साथ ही उमेश कुमार और चैंपियन के बीच की पुरानी दोस्ती दुश्मनी में बदल गई. 

5 साल पहले हो गए थे बाहर

बता दें कि 2019 में उत्तराखंड के लिए अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल करने पर चैंपियन को अनिश्चित काल के लिए पार्टी से निकाल दिया गया था. हालांकि, बाद में उन्हें बहाल कर दिया गया. चैंपियन का परिवार हरिद्वार जिले के लंढौरा रियासत से जुड़े होने का दावा करता है. वहीं, उमेश कुमार खानपुर से पहली बार निर्दलीय विधायक बने हैं. 

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