उत्तराखंड के ऋषिकेश में एक स्कूल में कक्षा 8 की छात्रा को तिलक हटाने के लिए कहा गया, जिसके बाद विवाद खड़ा हो गया. छात्रा के माता-पिता और हिंदू संगठनों ने स्कूल में विरोध प्रदर्शन किया. प्रदर्शनकारियों का कहना था कि तिलक हिंदू परंपरा का हिस्सा है और इसे हटाने के लिए मजबूर करना गलत है वहीं, विरोध के बाद प्रिंसिपल ने माफी मांगी है.
दरअसल, बुधवार को 8वीं क्लास की छात्रा को उसकी टीचर ने माथे से तिलक हटाने को कहा और कहा कि स्कूल में इसकी इजाजत नहीं है. छात्रा ने टीचर की बात मानकर क्लास में चली गई, लेकिन बाद में उसने अपने माता-पिता को इस बारे में बताया. गुरुवार को उसके माता-पिता हिंदू संगठनों के साथ विरोध करने स्कूल पहुंचे.
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हिंदू संगठनों के विरोध के बाद प्रिंसिपल ने जताया खेद
विरोध प्रदर्शन में शामिल हिंदू समूह के अध्यक्ष राजीव भटनागर ने कहा, 'शिक्षिका को लड़की को तिलक हटाने के लिए मजबूर नहीं करना चाहिए था. तिलक लगाना एक हिंदू परंपरा है. एक हिंदू को इसे लगाने से कैसे रोका जा सकता है?'स्कूल प्रिंसिपल द्वारा लड़की के माता-पिता और विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी), बजरंग दल और राष्ट्रीय हिंदू शक्ति संगठन सहित विरोध प्रदर्शन करने वाले हिंदू समूहों से माफ़ी मांगने के बाद मामला सुलझ गया.
वहीं, स्कूली शिक्षा महानिदेशक झरना कामथान ने उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल जिले के मुख्य शिक्षा अधिकारी से मामले की जांच करने को कहा है.