उत्तराखंड के पूर्व विधानसभा अध्यक्ष, कैबिनेट मंत्री और आठ बार विधायक रहे हरबंस कपूर का रविवार देर रात निधन हो गया. 76 साल के हरबंस कपूर ने 2017 में हुए विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज की थी.
उनके निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने दुख जताया है. दोनों नेताओं ने हरबंस कपूर के घर पहुंचकर उन्हें श्रद्धांजलि दी.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर कहा कि उत्तराखंड के हमारे पार्टी के वरिष्ठ सहयोगी हरबंस कपूर के निधन से दुखी हूं. वे एक अनुभवी विधायक और प्रशासक रहे, उन्हें लोक सेवा और समाज कल्याण में उनके योगदान के लिए याद किया जाएगा. उनके परिवार और समर्थकों के प्रति संवेदना.
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि वे बेहद सौम्य व क्षेत्र के विकास के लिए हमेशा समर्पित रहने वाले राजनेता थे. लगातार 8 बार विधानसभा का चुनाव जीतना उनकी लोकप्रियता को साबित करता है.
वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि उत्तराखंड के सीनियर विधायक और स्वाभाव से अजातशत्रु, उत्तरप्रदेश और उत्तराखंड विधानसभाओं में देहरादून का प्रतिनिधित्व करने वाले हरबंस कपूर को भगवान अपने श्रीचरणों में स्थान दें.
आज प्रातः विधानसभा में मेरे वरिष्ठ सहयोगी एवं पूर्व विधानसभा अध्यक्ष आदरणीय श्री हरबंस कपूर जी के निधन का दुःखद समाचार प्राप्त हुआ है। मृदुभाषी श्री कपूर ने हमेशा सादगी के साथ जीवन जिया। pic.twitter.com/62eYlODK7r
— Pushkar Singh Dhami (@pushkardhami) December 13, 2021
पूर्व सीएम व कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत ने कहा कि विश्वास नहीं होता कि हरबंस कपूर हम लोगों के बीच नहीं रहे. हम यह मानकर चलते थे कि इस बार की भी इनिंग उन्हीं की है. जनता से इतना गहरा उनका संबंध था कि वो दूसरे जनप्रतिनिधियों के लिए ईर्ष्या का विशेष थे कि कैसे इतने लोगों को अपने साथ, इतने लंबे समय तक वो साध करके रख पाए. कभी-कभी उनसे कहता था कि आपको अब एक कॉलेज खोल लेना चाहिए जिसमें यह लिखा जाए how to win election college और उसमें आप नेता लोगों को टिप्स दीजिए कि चुनाव कैसे जीते जाते हैं.
#उत्तराखंड के वरिष्ठ विधायक और स्वभाव से अजातशत्रु, उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड, दोनों विधानसभाओं में देहरादून का लगातार प्रतिनिधित्व करते आ रहे श्री #हरबंस_कपूर जी हम लोगों के बीच नहीं रहे, सहसा विश्वास नहीं होता, हम यह मानकर के चलते थे कि इस बार की भी इनिंग उन्हीं की है,... 1/2 pic.twitter.com/QDGOqSm9jr
— Harish Rawat (@harishrawatcmuk) December 13, 2021
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि वे इतने भले थे कि किसी के लिए भी वे स्कूटर लेकर तैयार रहते थे, किसी के भी, कहीं भी शादी-ब्याह में पहुंच जाते थे, ऐसे हरबंस कपूर का जाना, बहुत बड़ा खालीपन है, उत्तराखंड की राजनीति में भी और सामाजिक जीवन में भी. उनके विधानसभा क्षेत्र देहरादून कैंट के लोगों और उनके परिवार तक हम सब पूरे कांग्रेस परिवार की ओर से संवेदना भेजता हूं.
हार से हुई थी राजनीतिक करियर की शुरुआत
हरबंस कपूर ने 1985 में पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ा, लेकिन वे हीरा सिंह बिष्ट से हार गए. 1989 में हरबंस कपूर जब दोबारा मैदान में उतरे तो उन्होंने हीरा सिंह बिष्ट को हरा दिया. इसके बाद उन्होंने कभी भी हार का मुंह नहीं देखा. 2000 में अलग उत्तराखंड बनने के बाद पहली बार 2002 में हुए विधानसभा चुनाव में भी उन्होंने जीत का क्रम बरकरार रखा. 2017 में भी उन्होंने देहरादून कैंट विधानसभा सीट से जीत दर्ज की थी. वे लगातार आठ बार कैंट विधानसभा सीट से विधायक रहे. 2007 में उन्हें उत्तराखंड विधानसभा का अध्यक्ष भी चुना गया था.