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उत्तराखंडः चमोली के जिस रैणी गांव से शुरू हुआ था चिपको आंदोलन, उसके करीब ही टूटा ग्लेशियर

चमोली जिले के जोशीमठ ब्लॉक मुख्यालय से 26 किलोमीटर दूर स्थित रैणी गांव से ही चिपको आंदोलन की शुरुआत हुई थी. रैणी गांव की गौरा देवी के नेतृत्व में पेड़ों को बचाने के लिए चिपको आंदोलन की शुरुआत हुई थी

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चमोली जिले में ग्लेशियर टूटने से भारी तबाही
चमोली जिले में ग्लेशियर टूटने से भारी तबाही
स्टोरी हाइलाइट्स
  • रैणी की गौरा देवी के नेतृत्व में हुआ था चिपको आंदोलन
  • रैणी गांव ने पूरी दुनिया को दिया था पर्यावरण संरक्षण का संदेश

चमोली जिले के रैणी गांव के समीप ग्लेशियर टूटने से भारी तबाही हुई है. उत्तराखंड से लेकर उत्तर प्रदेश तक, कई जिलों में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है. जिस रैणी गांव के समीप ग्लेशियर टूटा है, यही गांव पर्यावरण संरक्षण के सबसे बड़े आंदोलन का गवाह बना था. रैणी गांव से ही चिपको आंदोलन की शुरुआत हुई थी.

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चमोली जिले के जोशीमठ ब्लॉक मुख्यालय से 26 किलोमीटर दूर स्थित रैणी गांव से ही चिपको आंदोलन की शुरुआत हुई थी. रैणी गांव की गौरा देवी के नेतृत्व में पेड़ों को बचाने के लिए चिपको आंदोलन की शुरुआत हुई थी. गौरा देवी के नेतृत्व में महिलाएं और लोग पेड़ों को बचाने के लिए जाकर उनसे चिपक गए थे.

चिपको आंदोलन ने पूरी दुनिया में पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया था. पर्यावरण संरक्षण का जिस भूमि से पूरी दुनिया को संदेश मिला, आज वह गांव एकबार फिर चर्चा में है. लेकिन आज इस गांव के चर्चा में आने की वजह ग्लेशियर फटने की प्राकृतिक आपदा है.

गांव के करीब स्थित ऋषि गंगा पावर प्रोजेक्ट तबाह हो गया है. इस प्रोजेक्ट को काफी नुकसान पहुंचा है. इस प्रोजेक्ट पर काम कर रहे करीब 150 लोग लापता बताए जा रहे हैं. प्रशासन की ओर से समाचार लिखे जाने तक 10 लोगों के शव मिलने की पुष्टि की जा चुकी है.

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धौली नदी में बह रहा मलबा

रैणी गांव के समीप फटे ग्लेशियर का मलबा अलकनंदा और धौलीगंगा नदी में बह रहा है. जोशीमठ की एसडीएम ने ऋषि पावर प्रोजेक्ट के पूरी तरह तबाह हो जाने की जानकारी देते हुए कहा है कि पूरी नदी मलबे में तब्दील हो गई है और मलबा धीरे-धीरे बह  रहा है.

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