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उत्तराखंडः देशद्रोह के मामले में पत्रकार को राहत, HC ने कहा- CM के खिलाफ आरोपों की जांच करे CBI

पत्रकार उमेश शर्मा द्वारा खबर चलाए जाने को लेकर उनके ऊपर IPC की धारा 420, 467, 468, 469, 471 और 120बी के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था. इसके अलावा प्रदेश सरकार ने भी गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर रखा था.

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उत्तराखंड हाई कोर्ट ने दिए आदेश (सांकेतिक फोटो)
उत्तराखंड हाई कोर्ट ने दिए आदेश (सांकेतिक फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • पत्रकार के खिलाफ दर्ज मामले रद्द
  • प्रदेश सरकार ने भी दर्ज किए थे केस
  • नए सिरे से केस दर्ज करने के आदेश

उत्तराखंड की उच्च न्यायालय ने पत्रकार उमेश शर्मा और अन्य के खिलाफ राजद्रोह मामले में प्रदेश सरकार द्वारा दर्ज FIR समाप्त करने के आदेश दिए हैं. इसके अलावा हाई कोर्ट ने CBI से मामले की जांच कराए जाने के भी आदेश दिए.

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न्यायमूर्ति रविंद्र मैठाणी की एकलपीठ ने पत्रकार उमेश शर्मा और अन्य द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के बाद अपना फैसला सुनाया. पत्रकार उमेश शर्मा द्वारा खबर चलाए जाने को लेकर उनके ऊपर IPC की धारा 420, 467, 468, 469, 471 और 120बी के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था. इसके अलावा प्रदेश सरकार ने भी गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर रखा था.

इस मामले में सेवानिवृत्त प्रोफेसर हरेंद्र सिंह रावत ने 31 जुलाई को देहरादून थाने में उमेश शर्मा के खिलाफ ब्लैकमेलिंग समेत विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया था. उमेश शर्मा पर आरोप लगाया गया था कि उन्होंने सोशल मीडिया में खबर चलाई थी कि प्रोफेसर हरेंद्र सिंह रावत और उनकी पत्नी डॉक्टर सविता रावत के खाते में नोटबंदी के दौरान झारखंड से अमृतेश चौहान ने पैसे जमा किए. इस पैसे को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को देने को कहा. वीडियो में डॉक्टर सविता रावत को मुख्यमंत्री की पत्नी की सगी बहन बताया गया है. 

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शिकायतकर्ता के मुताबिक, ये सभी तथ्य असत्य हैं और उमेश शर्मा ने बैंक के खातों की जानकारी और जिन कागजात की बात कही है उन बैंक खातों की सूचना गैरकानूनी तरीके से प्राप्त की थी. वहीं, जस्टिस रवींद्र मैठाणी की एकल जज पीठ के फैसले में साफ लिखा है कि इस याचिका में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के खिलाफ भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं. राज्य के हित में भी यही होगा कि इस बारे में सच्चाई सबके सामने आए. सीबीआई मौजूदा मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू करे, ताकि आरोपों की जांच करके सच्चाई की तह तक पहुंचा जा सके. जांच होगी तभी आरोपों की सच्चाई सामने आ सकेगी. 

कोर्ट ने सभी फाइलें और दस्तावेज दो दिन के अंदर देहरादून में सीबीआई अधीक्षक के दफ्तर में पहुंचाने के आदेश दिए हैं. ये दस्तावेज और फाइलें ईमेल के जरिए भी और हार्ड कॉपी पेपर बुक की शक्ल में सीबीआई को सौंपी जाएंगी.

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नोटबंदी के दौरान अघोषित आय की बड़ी रकम त्रिवेंद्र सिंह रावत की साली सविता रावत और साढ़ू प्रोफेसर हरेंद्र सिंह रावत के विभिन्न बैंक खातों में जमा की गई थी. ये अलग बात है कि जब सोशल मीडिया पर इस गोरखधंधे का खुलासा हुआ तो देहरादून पुलिस ने आनन-फानन में जांच रिपोर्ट दे दी थी कि हरेंद्र और त्रिवेंद्र कोई रिश्तेदार नहीं हैं. सविता रावत भी त्रिवेंद्र सिंह रावत की पत्नी की सगी बहन नहीं हैं.

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लेकिन झारखंड और उत्तराखंड के बैंक खातों और अन्य दस्तावेजों से ये खुलासा हो गया कि देहरादून पुलिस की रिपोर्ट झूठी थी क्योंकि दस्तावेजों के मुताबिक, सभी आरोपी आपस में करीबी रिश्तेदार निकले. अब हाई कोर्ट ने नए सिरे से प्राथमिकी दर्ज कर सीएम के खिलाफ आरोपों की जांच करने के आदेश दिए हैं.

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