उत्तराखंड के जोशीमठ में घरों में आई दरारों के बीच उत्तरकाशी में भूकंप के झटके महसूस किए गए. उत्तरकाशी में देर रात आए भूकंप की तीव्रता 2.9 मापी गई. इस भूकंप का केंद्र जमीन के अंदर 10 किमी गहराई में था.
बता दें कि उत्तराखंड के जोशीमठ में भू-धंसाव के चलते तमाम घरों और होटलों में दरारें पड़ गई हैं. इसको लेकर प्रशासन ने असुरक्षित जोन घोषित किए हैं. ऐसे में जो घर और इमारतें सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं, उन्हें जमींदोज करने का फैसला लिया गया है. जोशीमठ में जबसे घरों में दरारें आई हैं, उसके बाद जमीन से पानी भी निकल रहा है. प्रशासन ने वहां के घरों को खाली करा लिया है और वहां रहने वाले लोगों को अस्थायी जगहों पर पहुंचा दिया है. बता दें कि उत्तरकाशी की जोशीमठ से दूरी करीब 285 किलोमीटर है, नेशनल हाईवे-7 से यात्रा करने में करीब 9 घंटे का समय लगता है.
जोशीमठ समेत कई शहरों में मौसम खराब बना हुआ है. जोशीमठ में बीते 2-3 दिनों से हल्की बारिश भी हो रही थी, जिसने लोगों को सांसत में डाल दिया है. लोग अपने घरों को छोड़ने के लिए मजबूर हैं. प्रशासन ने असुरक्षित घरों को चिन्हित कर लिया है और उन घरों या होटलों पर रेड क्रॉस का निशान लगा दिया गया है. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने खुद जोशीमठ जाकर वहां के हालात का जायजा लिया. इसकी जांच के लिए केंद्र और राज्यों की टीमें भी जुटी हुई हैं कि आखिर ये क्यों और कैसे हो रहा है.
करीब 23 हजार की आबादी का शहर है जोशीमठ
चमोली जिले में जोशीमठ शहर स्थित है. यह समुद्र तल से 6,107 फीट की ऊंचाई पर बसा है. इसकी आबादी 23000 है. इसे बद्रीनाथ का मुखद्वार भी कहा जाता है. यहां भूधंसाव के चलते अब तक 678 घरों में दरारें पड़ चुकी हैं. इतना ही नहीं कई जगहों पर सड़क फट गई है. जमीन के नीचे से लगातार पानी का रिसाव हो रहा है.
19 दिसंबर को आया था भूकंप
इससे पहले 19 दिसंबर को उत्तरकाशी में भूकंप के झटके महसूस किए गए थे. जानकारी के मुताबिक, देर रात करीब 1:50 पर भूकंप आया था, रिक्टर स्केल पर जिसकी तीव्रता 3.1 मापी गई थी. राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के मुताबिक, भूकंप का केंद्र जमीन के करीब 5 किमी गहराई में था. इसमें किसी भी तरह का नुकसान नहीं हुआ था.