scorecardresearch
 

उत्तराखंड पुलिस ने नदी में डूबते 111 कावड़ियों को बचाया, बना रिकॉर्ड

उत्तराखण्ड जल पुलिस और एसडीआरएफ ने इस बार 111 कावड़ियों को डूबने से बचाने में कामयाबी पाई है. अब कांवड़ लेकर कांवड़िए अपने-अपने गंतव्य स्थान पहुंच रहे हैं, जहां वो भगवान शिव का जलाभिषेक करेंगे. इस साल करीब तीन करोड़ कांवड़ यात्री हरिद्वार पहुंचे.

Advertisement
X
फाइल फोटो
फाइल फोटो

Advertisement

कांवड़ लेकर कांवड़िए अपने-अपने गंतव्य स्थान पहुंच रहे हैं, जहां वो भगवान शिव का जलाभिषेक करेंगे. इस साल करीब तीन करोड़ कांवड़ यात्री हरिद्वार पहुंचे, जिन्हें उत्तराखण्ड पुलिस द्वारा व्यवस्थित ढंग से नियंत्रित किया गया. साथ ही नदी में डूबते हुए 111 कावड़ियों को जल पुलिस और एसडीआरएफ ने अपनी जान जोखिम में डालकर बचाया.

आजतक से खास बातचीत में उत्तराखंड पुलिस के ADG अशोक कुमार ने कहा कि हरिद्वार से लेकर उत्तरकाशी के गंगोत्री धाम तक इस बार जल पुलिस और एसडीआरएफ ने एक रिकॉर्ड कायम किया है. इस साल कांवड़ यात्रा के दौरान एक ही लक्ष्य रहा कि किसी की भी जान नहीं जानी चाहिए.

अशोक कुमार ने कहा कि अक्सर ऐसा होता है, जब पानी के तेज बहाव में बहकर कई कावड़िए अपनी जान से हाथ धो बैठते हैं. मगर इस बार हमने ये प्रण लिया था कि उत्तराखंड पुलिस सबकी यात्रा को न सिर्फ सफल बनाने में मदद करेगी, बल्कि उनकी सुरक्षा की पूरी व्यवस्था करेगी. कांवड़ियों की सुरक्षा में किसी भी तरह की कोताही नहीं बरती जाएगी.

Advertisement

अशोक कुमार ने बताया कि अगर गंगा जल के लिए आए किसी भी भक्त या यात्री की मौत डूबकर हो जाती है, तो बेहद दुख होता है. इस बार जल पुलिस ने दिन रात एक करके 111 लोगों की जान बचाने में कामयाबी पाई है.

SDRF ने विपरीत परिस्थितियों में भी निभाई जिम्मेदारी

कांवड़ यात्रा के दौरान मौसम को लेकर ADG ने कहा कि जबरदस्त बारिश की वजह से कुछ जगह ऐसी रही हैं, जहां पर पानी के बढ़ने से मुश्किल पैदा हुई. हालांकि वहां एसडीआरएफ दीवार बनकर खड़ी रही और विपरीत परिस्थितियों में अपनी जान की परवाह न करते हुए उन्होंने रेस्क्यू ऑपरेशन को अंजाम दिया. एसडीआरएफ ने पहाड़ों पर जहां रास्ते बंद हो गए, वहां से सभी यात्रियों को सही सलामत निकालने की जिम्मेदारी बखूभी निभाई और लोगों को सुरक्षित निकाला.

रेस्क्यू टीम का लोगों को बचाने में लगने लगा है दिल

गौहरी माफी आपदा में रेस्क्यू टीम को लीड कर रहे सचिन रावत ने बताया कि जब हम एसडीआरएफ टीम में आए थे, तब से अब तक हमारे मन में जितना परिवर्तन आया है, उस पर खुद हमको भी यकीन नहीं हो रहा है. फंसे हुए लोगों को जब हम रेस्क्यू करते हैं और उसके बाद जब बचने वाले लोग सिर पर हाथ रखकर हमको दुआएं देते हैं, तो दिल, दिमाग और शरीर जोश से भर जाता है और फिर से लोगों को बचाने की एक शक्ति मिल जाती है. अब तो हालात ये हैं कि बस हमको ईश्वर ऐसे ही लोगों की सेवा करने दे. अब सिर्फ दिल लोगों को बचाने में ही लगता है.

Advertisement
Advertisement