उत्तराखंड में बीजेपी की पुष्कर सिंह धामी सरकार ने यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू किया है. इसके नियम भी जारी किए गए, लेकिन कई वर्ग इसके विरोध में भी हैं. हाईकोर्ट में इसके लागू करने के खिलाफ याचिका दायर की गई. कोर्ट ने सुनवाई के बाद फैसला सुनाया कि जिन लोगों पर यूसीसी के तहत कार्रवाई की जाती है, और वे अगर कार्रवाई को सही नहीं मानते तो ऐसे लोग कोर्ट भी जा सकते हैं.
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने उन सभी लोगों को यह अधिकार दिया है कि यूसीसी के तहत कार्रवाई किए जाने पर प्रभावित लोग कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते है. कोर्ट ने यह निर्देश यूसीसी के लागू किए जाने के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया, और कहा कि प्रभावित लोगों के मामले की सुनवाई भी की जाएगी.
यह भी पढ़ें: 'इंडिया ब्लॉक सत्ता में आया तो रद्द होगा सीएए, एनआरसी और यूसीसी', ममता बनर्जी ने किया ऐलान
अथॉरिटी के एक्शन मामलों पर होगी सुनवाई!
हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस जी नरेंद्र ने याचिकाकर्ता की तरफ से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल से बताया कि जो लोग अथॉरिटी द्वारा पीनल एक्शन का सामना कर रहे हैं, वे कोर्ट को अप्रोच कर सकते हैं और ऐसे मामलों को सुना जाएगा. हाईकोर्ट ने इससे पहले उत्तराखंड सरकार को एक नोटिस जारी किया था, और याचिका पर अपना पक्ष रखने को कहा था.
यूसीसी पर उत्तराखंड सरकार का पक्ष!
बीजेपी की सरकार द्वारा 27 जनवरी को यूसीसी लागू करने वाला उत्तराखंड पहला राज्य बना. इसके तरत धर्म के इतर सभी नागरिकों को समान कानून के तहत बराबरी से देखा जाएगा. इसके लागू किए जाने के बाद शादियां, तलाक और प्रॉपर्टी में अधिकारों का बंटवारा समान कानून के तहत किया जाएगा. यूसीसी के तहत लिव-इन रिलेशशिप को रजिस्टर करना अनिवार्य किया गया है, जिसका सबसा ज्यादा विरोध भी हुआ.
यह भी पढ़ें: Uniform Civil Code Bill: यूसीसी समिति का गठन, पूर्व मुख्य सचिव शत्रुघन सिंह होंगे अध्यक्ष
हालांकि, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विरोधों के जवाब में इस यूसीसी का बचाव दिल्ली में एक लिव इन पार्टनर द्वारा अपनी गर्लफ्रेंड की हत्या किए जाने के मामले का जिक्र करते हुए किया, और कहा कि यूसीसी के नियम से इस तरह के मामलों पर लगाम लगेंगे.