उत्तराखंड का उत्तरकाशी जिला आपदा की दृष्टि से अतिसंवेदनशील माना जाता है. उत्तर जिला मुख्यालय वरुणावत पर्वत की तलहटी पर बसा हुआ है. यहां कलेक्ट्रेट, विकास भवन जैसे सरकारी महकमों के दफ्तर के साथ ही दर्जनभर से अधिक सरकारी प्रतिष्ठान हैं. साथ ही मुख्य बाजार और गंगोत्री नेशनल हाईवे इसी तलहटी से होकर गुजरता है. साल 2003 में वरुणावत पर्वत से हुए भारी भूस्खलन से उत्तरकाशी का भूगोल बदल गया था.
त्रासदी में 362 परिवार हुए थे प्रभावित
2003 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने 250 करोड़ रुपये का पैकेज देकर इस पर्वत का ट्रीटमेंट करवाया था. साथ ही प्रभावितों को विस्थापित भी करवाया था. वरुणावत त्रासदी में 362 परिवार प्रभावित हुए थे, जबकि 221 भवन क्षतिग्रस्त हुए थे. उस समय राज्य के पास पर्याप्त संसाधन भी नहीं थे. बावजूद इसके वरुणावत त्रासदी से प्रभावित हुए परिवारों का सुनियोजित विस्थापन हुआ था.
वरुणावत पर्वत से लगातार भूस्खलन होता रहा
2003 के इस दौर में 24 सितंबर से लगातार वरुणावत पर्वत से भूस्खलन होता रहा जो कि इंदिरा कॉलोनी में घुस गया. साथ ही मुख्य बाजार में दर्जनभर से अधिक होटल्स को भी अपनी चपेट में लिया.
जांच की बात कहकर पल्ला झाड़ लेते हैं जिलाधिकारी
भूस्खलन से उद्यान कॉलोनी, मस्जिद मोहल्ला, जल संस्थान कॉलोनी सहित करीब डेढ़ किलोमीटर इलाका प्रभावित हुआ, लेकिन आज फिर से इस प्रभावित एरिया में अतिक्रमण होने लगा है. लोग खतरे की जद वाले इलाके में भी अपने आशियाने बना रहे हैं. अगर जिला प्रशासन की बात करें तो जिलाधिकारी सिर्फ अतिक्रमण की जांच कराने की बात कहकर अपना पल्ला झाड़ लेते हैं.
सुंदर लाल बहुगुणा के बेटे ने जताई चिंता
विश्वविख्यात चिपको आंदोलन के प्रणेता पर्यावरणविद स्वर्गीय सुंदर लाल बहुगुणा के बेटे राजीव नयन बहुगुणा ने आपदा के मुहाने पर खड़े पिथौरागढ़, उत्तरकाशी, चमोली के भविष्य को लेकर भी चिंता व्यक्त की है.