एक दिन दिव्यांशु गणात्रा जब सुबह उठे तो उनकी आंखों को रोशनी गायब थी. लेकिन उन्होंने अपनी आँखें गंवाने के बाद भी सपने देखना बंद नहीं किया और वो हर चीज़ करने की ठान ली जिससे उनके चेहरे पर मुस्कान आती थी.