चुनाव से पहले वोट मांगते वक्त वन रैंक, वन पेंशन का वादा किया गया था, लेकिन सैनिकों की जायज मांग को अब बोझ ठहराया जा रहा है. क्या सरकार ने तब इसके बारे में नहीं सोचा था?