भारतीय वायुसेना की ताकत और तैयारियां अचूक हैं. 1962 में भारत-चीन युद्ध के समय भारतीय वायुसेना की वैसी मदद नहीं ली गई थी, जैसी ली जा सकती थी. लेकिन इस बार भारत अपनी तीनों सेनाओं के माध्यम से कमर कस चुका है. चीन के सैनिकों के सामने मिरर डिप्लॉयमेंट किया गया है. मौजूदा संकट में 5 मई को भारत और चीन के सैनिकों की पहली झड़प हुई थी. वैसे तो एलएसी पर चीन की हिमाकतें कई बार जानबूझकर और बहुत बार अनजाने में हुआ करती रही हैं क्योंकि एलएसी को लेकर दोनों सेनाओं का परसेप्शन अलग-अलग है. 5 मई और उसके बाद की झड़पों के बाद शुरुआत में सेना के कमांडिंग अफसर स्थानीय स्तर पर मामले को सुलझाने की कोशिश करते रहे लेकिन बीतते दिनों के साथ जब ये साफ हो गया कि चीन से ये विवाद स्थानीय नहीं है और चीन का इरादा खतरनाक है तो भारत ने परिस्थिति के मुताबिक मोर्चा संभाला. चीन के साथ मौजूदा परिस्थिति में भारत ने कैसे अपनी तैयारी की है, इस पर ये रिपोर्ट देखिए.