मुंशी प्रेमचंद से बिस्मिल्लाह खान तक फैला हुआ बनारस. बनारस सिर्फ शहर नहीं, एक सोच है. यहां की असल अनुभूति के लिए आपको बनारस में गंगा किनारे पहुंचना होगा. लेकिन चुनावी धरातल पर यही बनारस कसौटी पर कहां खरा उतरता है. मोदी बनाम केजरीवाल, या कोई और, क्या सोचता है बनारस?