टेरर फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग पर नजर रखने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्था फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स ने पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट से बाहर होने के लिए 4 महीने का समय और दिया है. लेकिन इसके साथ कहा है कि अगर पाकिस्तान ने जून 2020 तक आतंकी गतिविधियों को रोकने के लिए बताए गए कदम नहीं उठाए तो उसे ब्लैकलिस्ट यानि प्रतिबंधित सूची में डाला जा सकता है. फिलहाल पाकिस्तान, एफएटीएफ की निगरानी सूची में शामिल है और एफएटीएफ ने 2018 में ही पाकिस्तान को 27 कार्यों की एक सूची सौंपी थी. आपको बता दें कि हाफिज पर नरमी को लेकर पाकिस्तान की पहले भी कई बार इंटरनेशनल मंचों पर किरकिरी हो चुकी है लिहाजा उसने एफएटीएफ के सामने खुद को पाक-साफ दिखाने के लिए इस बार एक और झूठ का सहारा लिया, क्योंकि इस बार डर ग्रे लिस्ट से सीधे ब्लैक लिस्टेड होने का था. देखिए पूरी रिपोर्ट.