एक बार फिर पाकिस्तनी प्रधानमंत्री ने बिना शर्त भारत से वार्ता का वादा किया है. वादा करना और फिर उसे तोड़ देना, जिसकी पुरानी फितरत है, वो पाकिस्तान है.