ओलंपिक का नाम सामने आते ही भारतीय हॉकी का वो स्वर्णिम दौर आज भी सुर्खियां बटोरता है. क्यों नहीं! भारत जो 'गोल्डन रिकॉर्ड' अपने नाम रखता है. हॉकी में 8 स्वर्ण पदकों का दबदबा इस दौर में भी दूसरी टीमों के लिए उदाहरण है. हालांकि 1980 के मॉस्को ओलंपिक के बाद वह सिलसिला टूट गया था. टोक्यो में हम गोल्ड तो नहीं जीत पाए, लेकिन कांस्य पर हमने जरूर कब्जा कर लिया. ... और 41 साल बाद भारतीय टीम ने पदक का सूखा खत्म कर दिया.
भारत के ओलंपिक इतिहास में हॉकी को सर्वोच्च स्थान प्राप्त है. यही एक खेल है, जिसमें हमने राज किया. हॉकी में भारत ने अब तक 8 स्वर्ण पदक सहित कुल 12 मेडल अपने नाम किए हैं. आइए हम उन यादों को समेटते हैं, जिसे यादकर हम रोमांचित हो उठते हैं... ऐसी है हमारी हॉकी पर गर्व करने वाली 'गोल्डन गाथा.'
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भारतीय हॉकी टीम ने ओलंपिक में पहली बार 1928 में कदम रखा था. फील्ड हॉकी 1908 और 1920 के खेलों का हिस्सा थी, लेकिन भारत ने इसमें भाग नहीं लिया था. जब भारतीय हॉकी टीम 1928 ओलंपिक खेलों में भाग लेने के लिए बॉम्बे बंदरगाह से एम्सटर्डम रवाना हो रही थी, तब सिर्फ तीन लोग उसे विदा करने आए थे. इसके उलट जब टीम स्वर्ण पदक जीतकर भारत लौटी, तब हजारों लोग विजेता टीम का स्वागत करने के लिए खड़े थे.
1928 ओलंपिक के हॉकी इवेंट में कुल 9 टीमों ने भाग लिया था. भारत को बेल्जियम, डेनमार्क, स्विट्जरलैंड और ऑस्ट्रिया के साथ ग्रुप 'ए' में रखा गया था. वहीं, मेजबान नीदरलैंड्स जर्मनी, फ्रांस और स्पेन ग्रुप 'बी' में थे. दोनों ग्रुप की टॉप टीम ने स्वर्ण पदक के लिए एक-दूसरे का सामना किया, जबकि दूसरे स्थान पर रहने वाली टीमों ने कांस्य पदक के लिए मैच खेले.
17 मई को टूर्नामेंट के अपने शुरुआती मुकाबले में भारत ने ऑस्ट्रिया को 6-0 से हरा दिया. इसके बाद भारत ने बेल्जियम को 9-0 और डेनमार्क को 5-0 से मात दी. स्विट्जरलैंड को 6-0 से हराने के साथ ही भारतीय टीम फाइनल में पहुंच गई.
26 मई को टूर्नामेंट के फाइनल में भारत के सामने कई परेशानियां खड़ी थीं. फिरोज खान चोट और शौकत अली बुखार के चलते फाइनल मुकाबले से बाहर हो गए थे. वहीं, कप्तान जयपाल सिंह भी कुछ मैच पहले ही स्वदेश लौट चुके थे. इसके बावजूद भारत ने 23 हजार फैन्स के सामने नीदरलैंड्स को 3-0 से मात दे दी. ध्यानचंद ने दो और जॉर्ज मार्टिंस ने एक गोल दागकर भारतीय हॉकी के स्वर्ण युग की शुरुआत की. पूरे टूर्नामेंट में भारत ने कुल 29 गोल किए थे, जिसमें से 14 गोल तो अकेले ध्यानचंद ने दागे.
भारतीय टीम के विजयी अभियान की एक खास बात यह रही थी कि उसने पूरे टूर्नामेंट में एक भी गोल नहीं खाया. इसमें सबसे बड़ा योगदान भारतीय गोलकीपर रिचर्ड एलन का था. एलन गोलपोस्ट के सामने दीवार बनकर खड़े हो गए थे और विपक्षी टीम का कोई भी खिलाड़ी इस दीवार को भेद नहीं सका.
भारतीय टीम: जयपाल सिंह (कप्तान) , ब्रूम पिनिगर (उपकप्तान), ध्यानचंद, मिचेल गेटले, रिचर्ड एलन, विलियम गुडर-गुलेन, लेसली हैमंड, फिरोज खान, संतोष मांगलानी, जॉर्ज मार्टिंस, रेस नौरिस, मिचेल रॉक, फ्रेडरिक सीमैन, शौकत अली, केहर सिंह गिल.
1929 की आर्थिक मंदी का असर लॉस एंजेलिस ओलंपिक खेलों पर भी पड़ा था. इसका नतीजा ये हुआ कि हॉकी स्पर्धा में भारत, जापान और अमेरिका ने ही हिस्सा लिया. भारत टीम का पहला मुकाबला जापान से हुआ, जिसे भारत ने 11-1 से अपने नाम किया था. इस मुकाबले में ध्यानचंद ने चार गोल किए. वहीं, ध्यानचंद के छोटे भाई रूप सिंह और गुरमीत सिंह ने तीन-तीन गोल गोल दागे. रिचर्ड कैर ने भी मौके का फायदा उठाते हुए एक गोल किया. वहीं, जापानी टीम की ओर से इकलौता गोल जुन्जो इनोहारा ने दागा.
भारत का अगला मुकाबला मेजबान अमेरिका से होना था. इस मुकाबले में भारतीय टीम के जीत की उम्मीद सबों को थी. लेकिन शायद ही किसी ने ये कल्पना की होगी कि भारत औसतन हरेक तीन मिनट पर गोल करेगा. भारत ने इस मुकाबले में गोलों की झड़ी लगाते हुए अमेरिका को 24-1 के विशाल अंतर से हराया था. रूप सिंह ने सबसे ज्यादा 10 और ध्यानचंद ने 8 गोल दागे. इन दोनों के अलावा गुरमीत सिंह ने 5 गोल किए. एरिक पिनिगर ने एक गोल किया था.
अमेरिका की ओर से इकलौता गोल विलियम बोडिंगटन ने किया. लेकिन उनके गोल करने की कहानी भी काफी दिलचस्प है. भारतीय टीम के आक्रमण से अमेरिकी टीम के हौसले पस्त हो चुके थे. ऐसे में एक मौके पर अमेरिकी खिलाड़ियों को भारतीय रक्षापंक्ति ने अपने घेरे में प्रवेश करने दिया. लेकिन जब खिलाड़ियों ने पीछे मुड़कर देखा तो पता चला कि गोलकीपर रिचर्ड एलन गोल पोस्ट पर मौजूद नहीं हैं. वह तो गोल पोस्ट के पीछे ऑटोग्राफ दे रहे थे. इस तरह गोलकीपर की दरियादिली से अमेरिका एक गोल करने में सफल रहा.
अमेरिका के खिलाफ इस जीत के साथ ही भारतीय हॉकी टीम ने ओलंपिक में लगातार दूसरा स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया. भारत ने दो मुकाबलों में कुल 35 गोल दागे, जिसमें से 25 गोल दो भाइयों (रूप सिंह और ध्यानचंद) के नाम रहे. रूप सिंह ने 13 और बड़े भाई ध्यानचंद ने 12 गोल दागे
भारतीय टीम: लाल शाह बोखारी (कप्तान), रिचर्ड एलन, आर्थर हिंद, मोहम्मद असलम, कार्ली टेपसेल, लेस्ली हैमंड, मसूद मिन्हास, ब्रूम पिनिगर, फ्रैंक ब्रेविन, रिचर्ड कैर, गुरमीत सिंह खुल्लर, ध्यानचंद, रूप सिंह, सैयद जफर, विलियम सुलीवेन.
बर्लिन में भारतीय हॉकी टीम की कमान ध्यानचंद के हाथों में थी. भारत को जापान, हंगरी और अमेरिका के साथ ग्रुप 'ए' में रखा गया था. वहीं, ग्रुप 'बी' में जर्मनी, अफगानिस्तान और डेनमार्क की टीमें थीं. जबकि ग्रुप 'सी' में नीदरलैंड्स, फ्रांस, बेल्जियम और स्विट्जरलैंड को रखा गया था.
भारत ने शानदार आगाज करते हुए लीग स्टेज के अपना पहले मैच में हंगरी को 4-0 से शिकस्त दी. मैच में रूप सिंह ने दो गोल किए. इसके बाद भारत ने अमेरिका को 7-0 से और जापान को 9-0 से हराकर सेमीफाइनल में प्रवेश किया. सेमीफाइनल में भारत ने फ्रांस को 10-0 से मात दी. इस मैच में ध्यानचंद ने सबसे ज्यादा 4 और रूप सिंह ने 3 गोल दागे. वहीं, इक्तिदार अली ने 2 और कार्ली टेपसेल ने एक गोल किए.
फाइनल मुकाबले में भारत का मुकाबला जर्मनी से हुआ. उस फाइनल में भारत ने अभ्यास मैच में मिली हार का बदला लेते हुए जर्मनी को 8-1 से मात दी. इस जीत के साथ ही भारतीय हॉकी टीम ने लगातार तीसरी बार स्वर्ण पदक पर कब्जा कर लिया. फाइनल मुकाबले में कप्तान ध्यानचंद ने सबसे ज्यादा 3 गोल किए. इक्तिदार ने 2, जबकि टेपसेल, जफर और रूप सिंह ने 1-1 गोल दागे.
गौरतलब है कि 1936 के ओलंपिक खेल शुरू होने से पहले एक अभ्यास मैच में भारतीय टीम को जर्मनी ने 4-1 से हरा दिया था . ध्यानचंद ने अपनी आत्मकथा ‘गोल’ में लिखा, 'मैं जब तक जीवित रहूंगा इस हार को कभी नहीं भूलूंगा. इस हार ने हमें इतना हिला कर रख दिया कि हम पूरी रात सो नहीं पाए.
कहा जाता है कि इस शानदार प्रदर्शन से खुश होकर हिटलर ने ध्यानचंद को खाने पर बुलाया और उन्हें जर्मनी की ओर से खेलने को कहा. हिटलर ने इसके बदले उन्हें मजबूत जर्मन सेना में कर्नल पद का प्रलोभन भी दिया. लेकिन ध्यानचंद ने कहा, 'हिंदुस्तान मेरा वतन है और मैं वहां खुश हूं. मैंने भारत का नमक खाया है, मैं भारत के लिए ही खेलूंगा.'
'हॉकी के जादूगर' ध्यानचंद ने अपने इस आखिरी ओलंपिक में कुल 13 गोल दागे थे. इस तरह एम्स्टर्डम, लॉस एंजेलिस और बर्लिन ओलंपिक को मिलाकर ध्यानचंद ने कुल 39 गोल किए, जो उनकी बादशाहत को बयां करती है.
भारतीय टीम: ध्यानचंद (कप्तान), इक्तिदार अली शाह दारा, रिचर्ड एलन, मोहम्मद हुसैन, अहमद शेर खान, कार्ली टेपसेल, बाबू नारसू निमल, अर्नेस्ट जॉन गुडसर-कलेन, सैयद जफर, एहसान मोहम्मद खान, जोसेफ गलीबार्डी, रूप सिंह, गुरचरण सिंह ग्रेवाल, लियोनेल एम्मेट, मिर्जा नासिर-उद-दीन मसूद, पॉल फर्नांडीज, जोसेफ फिलिप, शब्बान शाहाब-उद-दीन.
1948 के लंदन ओलंपिक में पहली बार भारत ने एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में भाग लिया था. 1947 में हुए भारत के बंटवारे के बाद भारतीय हॉकी टीम बिखर गई थी. इक्तिदार अली दारा जैसे कई खिलाड़ी पाकिस्तान चले गए थे. जिसके चलते भारतीय हॉकी महासंघ (IFH) को टीम चुनने में काफी मुश्किलें आईं. अंततः किशन लाल के नेतृत्व में नई नवेली भारतीय टीम लंदन पहुंची.
भारत को ग्रुप 'ए' में अर्जेंटीना, ऑस्ट्रिया और स्पेन के साथ रखा गया था. वहीं ग्रुप 'बी' में ग्रेट ब्रिटेन, स्विट्जरलैंड, अफगानिस्तान और अमेरिका की टीमें थीं. जबकि पाकिस्तान ग्रुप ' सी' में नीदरलैंड्स, बेल्जियम, फ्रांस और डेनमार्क के साथ था.
भारतीय टीम ने अपने पहले ही मैच में ऑस्ट्रिया को 8-0 से हराकर अपने इरादे जाहिर कर दिए. इसके बाद भारत ने अर्जेंटीना को 9-1 और स्पेन को 2-0 मात देकर सेमीफाइनल में जगह बनाई. सेमीफाइनल में भारत ने नीदरलैंड्स को रोमांचक मुकाबले 2-1 से मात दी. उस मैच में भारत के लिए केडी सिंह 'बाबू' और गेराल्ड ग्लाकेन ने एक-एक गोल गोल दागे थे.
फाइनल में भारतीय टीम के सामने ग्रेट ब्रिटेन की टीम थी. भारत के लिए यह मैच बेहद खास था क्योंकि इस मुकाबले के ठीक तीन दिन बाद पूरा देश आजादी की पहली वर्षगांठ मनाने जा रहा था. भारत ने फाइनल में ग्रेट ब्रिटेन को 4-0 से मात देकर लगातार चौथा स्वर्ण पदक जीत लिया. फाइनल मुकाबले में बलबीर सिंह सीनियर ने 2, त्रिलोचन सिंह और पैट्रिक जेनसन ने एक-एक गोल किए. इस जीत के बाद पूरा देश अंग्रेजों के खिलाफ मिली इस जीत के बाद खुशी से झूम उठा था.
भारतीय टीम: किशन लाल (कप्तान), केडी सिंह 'बाबू' (उप कप्तान), रंगनाथन फ्रांसिस, लियो पिंटो, वाल्टर डिसूजा, त्रिलोचन सिंह बावा, अख्तर हुसैन, रणधीर सिंह जेंटल, केशव दत्त, आमिर कुमार, मैक्सी वाज, लेस्ली क्लॉडियस, बलबीर सिंह सीनियर, पैट्रिक जेनसेन, लतीफुर रहमान, लॉरी फर्नांडीस, गेराल्ड ग्लाकेन, रेगीनाल्ड रॉड्रिक्स, ग्रहानंदन सिंह, जसवंत सिंह राजपूत.
हेलसिंकी ओलंपिक में फील्ड हॉकी इवेंट नॉकआउट मुकाबले की तर्ज पर खेले गए थे. 1948 के लंदन ओलंपिक की टॉप चार टीमों को क्वार्टर फाइनल में सीधे प्रवेश दिया गया. भारत के अलावा इन टीमों में पाकिस्तान, नीदरलैंड्स और ग्रेट ब्रिटेन शामिल थे. केडी सिंह बाबू की कप्तानी वाली भारतीय टीम ने क्वार्टर फाइनल मुकाबले में ऑस्ट्रिया को 4-0 से शिकस्त दी. भारत की ओर से बलवीर सिंह सीनियर, केडी सिंह बाबू, रणधीर सिंह जेंटल और रघबीर लाल ने एक-एक गोल दागे.
सेमीफाइनल में भारत का सामना ग्रेट ब्रिटेन से होना था, जिसका डिफेंस काफी बेहतर मानी जा रही थी. लेकिन भारतीय टीम के सामने अंग्रेजों की एक नहीं चली और उसने 3-1 से मुकाबला अपने नाम कर लिया. बलबीर सिंह सीनियर ने भारत की ओर से सभी तीन गोल दागते हुए हैट्रिक जमाई थी.
अब भारतीय टीम को फाइनल में नीदरलैंड्स का सामना करना था. उम्मीदों के मुताबिक भारत ने इस मुकाबले को 6-1 से जीत कर लगातार 5वीं बार स्वर्ण पदक जीत लिया. भारत की ओर से बलबीर सिंह सीनियर ने सबसे ज्यादा 5 गोल किए. ओलंपिक के फाइनल मुकाबले में सबसे ज्यादा गोल करने का उनका यह रिकॉर्ड आज भी कायम है. भारत ने इस जीत से एक बार फिर हॉकी पर अपनी बादशाहत साबित की. पूरी भारतीय टीम ने तीन मैचों में कुल 13 गोल किए, जिसमें से बलबीर सिंह सीनियर ने अकेले 9 गोल दागे थे.
बलबीर सिंह के अलावा टीम के कप्तान केडी सिंह 'बाबू' ने भी इस ओलंपिक में अपनी छाप छोड़ी. उन्हें 1953 में हेल्म्स ट्रॉफी (Helms Trophy) से नवाजा गया था, जो कि दुनिया के बेस्ट हॉकी खिलाड़ी को दी जाती थी. यह पहला मौका था, जब किसी भारतीय खिलाड़ी को यह ट्रॉफी दी गई थी.
भारतीय टीम: केडी सिंह 'बाबू' (कप्तान), रंगनाथन फ्रांसिस, चिनादोरई देशमुथु, धरम सिंह, स्वरूप सिंह, रणधीर सिंह जेंटल, गोविंद पेरुमल, मेल्ड्रिक डालुज, केशव दत्त, लेस्ली क्लॉडियस, जसवंत सिंह राजपूत, बलबीर सिंह सीनियर, ग्रहानंदन सिंह, मुनिस्वामी राजगोपाल, सीएस दुबे, सीएस गुरुंग, रघबीर लाल, उधम सिंह.
मेलबर्न ओलंपिक के फील्ड हॉकी प्रतियोगिता में 12 देशों की टीमों ने हिस्सा लिया था. इन टीमों को तीन-तीन टीमों के चार ग्रुप में बांटा गया था. भारत को ग्रुप 'ए' में सिंगापुर, अफगानिस्तान और अमेरिका के साथ रखा गया था. भारत ने अफगानिस्तान को 14-0 से मात देकर खिताबी अभियान का शानदार आगाज किया. कप्तान बलवीर सिंह सीनियर ने 5 और उधम सिंह ने 4 गोल दागे थे. हालांकि अफगानिस्तान के खिलाफ उस मुकाबले में बलवीर सिंह की उंगली में फ्रैक्चर हो गया था, जिसकी वजह से उन्हें कुछ मैचों में बाहर बैठना पड़ा था.
भारतीय टीम ने अमेरिका को 16-0 के बड़े अंतर से रौंद डाला. उस मुकाबले में भारत की ओर से उधम सिंह ने अकेले 7 गोल किए. अपने लीग स्टेज के आखिरी मैच में भारत ने सिंगापुर को 6-0 से हरा अंतिम चार में जगह बनाई. सेमीफाइनल में भारत का सामना यूनाइटेड टीम ऑफ जर्मनी से हुआ. लीग स्टेज में गोलों की झड़ी लगाने वाली भारतीय टीम इस मैच में सिर्फ एक गोल कर सकी. यह गोल उधम सिंह ने मैच के 48वें मिनट में किया था, जिसकी बदौलत भारतीय टीम फाइनल में पहुंच सकी. दूसरी तरफ पाकिस्तान ने भी ग्रेट ब्रिटेन को 3-2 से हरा फाइनल का टिकट हासिल कर लिया था.
भारत और पाकिस्तान की टीम पहली बार एक-दूसरे के आमने-सामने थी, वो भी ओलंपिक फाइनल जैसे बड़े मुकाबले में. उम्मीदों के मुताबिक फाइनल मुकाबला काफी रोमांचक रहा. मैच के 38वें पेनल्टी कॉर्नर पर रणधीर सिंह जेंटल ने गोल कर भारत को बढ़त दिला दी. पाकिस्तान ने गोल करने के कई प्रयास किए, लेकिन वह भारतीय गोलकीपर शंकर लक्ष्मण की दीवार को भेद नहीं पाई. अंततः भारत ने पाकिस्तान को 1-0 से हराकर लगातार छठी बार स्वर्ण पदक पर कब्जा कर लिया. भारतीय टीम का डिफेंस इतना सशक्त था कि पूरी प्रतियोगिता में विपक्षी टीम उसके खिलाफ एक भी गोल नहीं कर पाई.
भारतीय टीम: बलबीर सिंह सीनियर (कप्तान), शंकर लक्ष्मण, रंगनाथन फ्रांसिस, बख्शीश सिंह, रणधीर सिंह जेंटल, लेस्ली क्लॉडियस, आमिर कुमार, चार्ल्स स्टीफेन, गोविंद पेरुमल, गुरदेव सिंह, उधम सिंह, रघबीर सिंह भोला, बालकृष्ण सिंह ग्रेवाल, हरिपाल कौशिक, रघबीर लाल, ओपी मल्होत्रा, हरदयाल सिंह, अमित बख्शी.
रोम ओलंपिक में भारतीय हॉकी टीम की जीत का सिलसिला थम गया था. इस ओलंपिक में खिताब की प्रबल दावेदार भारत को न्यूजीलैंड, नीदरलैंड्स और डेनमार्क के साथ ग्रुप 'ए' में रखा गया. भारत ने अपने पहले मुकाबले में डेनमार्क को 10-0 से हराकर शानदार आगाज किया. इसके बाद उसने नीदरलैंड्स को 4-1 और न्यूजीलैंड को 3-0 से हराकर अंतिम आठ में जगह पक्की की.
क्वार्टर फाइनल में भारत का मुकाबला ऑस्ट्रेलिया से हुआ, जिसे भारत ने एक्स्ट्रा टाइम में 1-0 से अपने नाम किया था. खेल के 92वें मिनट में रघबीर सिंह भोला ने उस मैच का इकलौता गोल किया. इसके बाद भारत ने सेमीफाइनल में ग्रेट ब्रिटेन को 1-0 से हराया. भारतीय टीम की ओर से उधम सिंह ने मैच के 16वें मिनट में निर्णायक गोल दागा था.
फाइनल में भारत के सामने पाकिस्तानी टीम थी, जिसने स्पेन को मात देकर फाइनल का टिकट कटाया था. मुकाबले के छठे मिनट में ही अहमद नासीर ने गोल करके पाक टीम को बढ़त दिला दी. इसके बाद भारत ने बराबरी करने की पूरी कोशिश की, लेकिन पाकिस्तान के डिफेंस को भेद नहीं पाई. अंततः:भारत यह मुकाबला 0-1 से हार गया था. इस हार के साथ ही भारत का लगातार 7वीं बार स्वर्ण पदक जीतने का सपना टूट गया था.
भारतीय टीम: लेस्ली क्लॉडियस (कप्तान), शंकर लक्ष्मण, पृथीपाल सिंह, झमनलाल शर्मा, चिनादोरई देशमुथु, शांताराम जाधव, चरणजीत सिंह, मोहिंदर लाल, जोसेफ एंटिक, गोविंद सावंत, जोगिंदर सिंह, जॉन पीटर, जसवंत सिंह, उधम सिंह, रघबीर सिंह भोला, हरिपाल कौशिक, कुलवंत अरोड़ा, जॉन मास्करेनहास, एर्मन बस्टियन, बंदू पाटिल, बालकृष्ण ग्रेवाल.
टोक्यो ओलंपिक में भारतीय हॉकी टीम की साख दांव पर लगी थी. करोड़ों भारतीय प्रशंसकों की यही ख्वाहिश थी कि टीम इंडिया पाकिस्तान को मात देकर स्वर्ण पदक जीत कर आए. जिसे पूरा करने में भारतीय टीम पूरी तरह सफल भी रही. टोक्यो में भारतीय टीम की कमान चरणजीत सिंह के हाथों में थी. भारत को ग्रुप 'बी' में स्पेन, नीदरलैंड्स, यूनाइटेड टीम ऑफ जर्मनी, मलेशिया, बेल्जियम, कनाडा और हॉन्कॉन्ग के साथ रखा गया था.
भारत ने अपने पहले पहला मैच में बेल्जियम को 2-0 से मात देकर बेहतरीन आगाज किया. इस जीत के बाद भारत ने यूनाइटेड टीम ऑफ जर्मनी और स्पेन से 1-1 के ड्रॉ खेले. इसके बाद भारत ने लीग चरण के बाकी चार मैचों जीत हासिल कर सेमीफाइनल में कदम रखा. भारतीय टीम ने इस दौरान हॉन्कॉन्ग को 6-0, मलेशिया को 3-1, कनाडा को 3-0, जबकि नीदरलैंड्स को 2-1 से शिकस्त दी थी.
इसके बाद भारतीय टीम ने सेमीफाइनल में ऑस्ट्रेलिया को 3-1 से हराकर फाइनल में जगह बनाई. सेमीफाइनल में भारत के लिए पृथीपाल ने दो और मोहिंदर ने एक गोल दागे. उधर पाकिस्तान ने भी स्पेन को 3-0 से मात देकर फाइनल का टिकट कटा लिया.
फाइनल मुकाबले में भारतीय टीम का लक्ष्य रोम ओलंपिक की हार का बदला चुकता करना था. पहले हाफ में दोनों टीमों की तमाम कोशिशों के बाद भी कोई गोल नहीं हो सका. दूसरे हाफ में भारत को पेनल्टी कॉर्नर मिला, जिसे पृथीपाल सिंह ने लिया. लेकिन उनका शॉट पाकिस्तानी गोलकीपर के पैड से टकराकर मुनीर अहमद डार के पैर पर जा लगा, जिसके चलते भारत को पेनल्टी स्ट्रोक मिला. जिसके बाद मोहिंदर लाल ने इस बेहतरीन मौके को गोल में तब्दील कर भारत को बढ़त दिला दी.
पाकिस्तानी टीम ने इसके बाद गोल करने के भरसक प्रयास किए, लेकिन वह भारतीय गोलकीपर शंकर लक्ष्मण की दीवार को भेद नहीं सकी. अंततः भारत ने इस मुकाबले को 1-0 से जीतकर रोम ओलंपिक के फाइनल में मिली हार का बदला ले लिया. पाकिस्तान को मात देकर भारतीय टीम के 7वीं बार स्वर्ण पदक जीतने पर पूरे देश में खुशी की लहर दौड़ गई.
वैसे तो फाइनल मुकाबले में जीत के हीरो मोहिंदर लाल और शंकर लक्ष्मण रहे थे. लेकिन भारत को पहुंचाने में पहुंचाने में पृथीपाल सिंह की सबसे अहम भूमिका थी. पृथीपाल ने टोक्यो ओलंपिक में कुल 10 गोल किए थे.
भारतीय टीम: चरणजीत सिंह (कप्तान), शंकर लक्ष्मण, बलबीर सिंह कुल्लर, राजेंद्रन क्रिस्टी, हरबिंदर सिंह, पृथीपाल सिंह, बंदू पाटिल, गुरबख्श सिंह, मोहिंदर लाल, जगजीत सिंह, राजिंदर सिंह, जोगिंदर सिंह, हरिपाल कौशिक, जॉन पीटर, उधम सिंह, दर्शन सिंह, सैय्यद अली.
मेक्सिको ओलंपिक से पहले भारतीय हॉकी टीम का विवाद सतह पर आ चुका था. गुरबख्श सिंह और पृथीपाल सिंह कप्तानी को लेकर आपस में ही उलझ बैठे थे. आखिरकार एक समझौते के तहत दोनों को संयुक्त रूप से मेक्सिको ओलंपिक के टीम का कप्तान नियुक्त किया गया. इस ओलंपिक में भारत को ग्रुप 'ए' में पश्चिम जर्मनी, बेल्जियम, स्पेन, पूर्वी जर्मनी, जापान और मेजबान मेक्सिको के साथ रखा गया था.
भारतीय टीम की शुरुआत अच्छी नहीं रही और उसे पहले मैच में न्यूजीलैंड के हाथों 2-1 से अप्रत्याशित हार झेलनी पड़ी. इसके बाद भारत ने शानदार वापसी करते हुए पश्चिम जर्मनी (2-1), मेक्सिको (8-0) स्पेन (1-0), बेल्जियम (2-1), जापान (5-0) और पूर्वी जर्मनी (1-0) को शिकस्त दिया. टीम इंडिया ग्रुप'ए' में 18 अंकों के साथ टॉप पर रही और उसने सेमीफाइनल में अपना स्थान सुनिश्चित कर लिया था.
सेमीफाइनल में भारत का सामना ऑस्ट्रेलिया से हुआ. पहले हाफ में बलबीर सिंह के गोल की बदौलत भारत ने 1-0 की बढ़त ले ली. दूसरे हाफ में ब्रायन ग्लेनक्रॉस ने गोल दागकर ऑस्ट्रेलिया को बराबरी पर ला दिया. निर्धारित समय तक दोनों टीमें 1-1 की बराबरी पर रहीं, जिसके चलते मैच एक्स्ट्रा टाइम में गया. जहां ब्रायन ग्लेनक्रॉस ने एकबार फिर गोल दागकर ऑस्ट्रेलिया को 2-1 से जीत दिला दी. इस हार के साथ ही भारतीय टीम पहली बार ओलंपिक के फाइनल में नहीं पहुंच पाई.
सेमीफाइनल में हार के बाद भारत के पास अब कांस्य पदक जीतने का मौका था. इस मौके को भुनाते हुए भारत ने पश्चिम जर्मनी को 2-1 से हराकर कांस्य पदक पर कब्जा कर लिया. भारत के लिए पृथीपाल सिंह और बलबीर सिंह ने गोल दागे. वहीं, पश्चिम जर्मनी की ओर से नॉरबर्ट शूलेर ने इकलौता गोल किया.
भारतीय टीम: पृथीपाल सिंह (संयुक्त कप्तान), गुरबख्श सिंह (संयुक्त कप्तान), मुनीर सैत, राजेंद्रन क्रिस्टी, धरम सिंह, बलबीर सिंह, जगजीत सिंह, पेरुमल कृष्णमूर्ति, हरमेक सिंह, अजीत पाल सिंह, बलबीर सिंह कुल्लर, जॉन पीटर, हरबिंदर सिंह, इंदर सिंह, इनाम-उर-रहमान, तरसेम सिंह.
म्यूनिख ओलंपिक के लिए भारतीय हॉकी टीम की कमान हरमेक सिंह के हाथों में थी. 'हॉकी के जादूगर' ध्यानचंद के पुत्र अशोक कुमार, फॉरवर्ड बी.पी. गोविंदा जैसे युवा सितारों को टीम में जगह मिली थी. भारत को ग्रुप 'बी' में नीदरलैंड्स, ग्रेट ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, पोलैंड, केन्या और मैक्सिको के साथ रखा गया था.
भारत की शुरुआत उतनी अच्छी नहीं रही और उसे पहले मैच में नीदरलैंड्स ने 1-1 की बराबरी पर रोक दिया. इसके बाद भारत ने ग्रेट ब्रिटेन को 5-0 और ऑस्ट्रेलिया को 3-1 से शिकस्त देकर लय हासिल कर ली. भारत को अगले मुकाबले में पोलैंड ने 2-2 की बराबरी पर रोक सबको आश्चर्यचकित कर दिया. फिर भारत ने केन्या को 3-2, मैक्सिको को 8-0 से और न्यूजीलैंड को 3-2 से मात दी. भारतीय टीम सात मैचों में 12 अंकों के साथ अपने ग्रुप में टॉप पर रहते हुए सेमीफाइनल में पहुंच चुकी थी.
दूसरी ओर पाकिस्तान ने ग्रुप 'ए' में दूसरा स्थान हासिल किया. जिसके चलते इस बार सेमीफाइनल में ही भारत को पाकिस्तान का सामना करना पड़ा.
सेमीफाइनल मुकाबले से पहले आतंकवादियों ने खूनी वारदात को अंजाम देते हुए 11 इजरायली खिलाड़ियों की हत्या कर दी थी. सेमीफाइनल में भारतीय टीम अपनी लय में नहीं दिखी. पाकिस्तान ने 11वें और 34वें मिनट में गोल दागकर भारत पर 2-0 की बढ़त ले ली. भारतीय टीम को पूरे मैच 18 पेनल्टी कॉर्नर अर्जित किए, लेकिन वह एक भी गोल दाग नहीं पाई. अंतत: पाकिस्तान ने भारत को 2-0 से मात देकर उसे खिताबी मुकाबले से बाहर कर दिया.
अब कांस्य पदक के मुकाबले में भारत का सामना नीदरलैंड्स से हुआ. छठे मिनट में ही नीदरलैंड्स के टाइ क्रूज ने गोल दागकर डच टीम को बढ़त दिला दी. इसके बाद 15वें मिनट में बीपी गोविंदा ने पेनल्टी कॉर्नर को गोल में तब्दील कर स्कोर 1-1 कर दिया. फिर मुकाबले के आखिरी मिनट में मुखबेन सिंह ने गोल दागकर भारत को 2-1 से जीत दिला दी. कांस्य पदक जीतने के साथ ही टीम इंडिया ओलंपिक में लगातार 10वां पदक अपने नाम कर चुकी थी.
भारतीय टीम: हरमेक सिंह (कप्तान), मुखबेन सिंह, मैनुअल फ्रेडरिक, चार्ल्स कॉर्नेलियस, माइकल किंडो, असलम शेर खान, पेरुमल कृष्णमूर्ति, वीरेंद्र सिंह, अजीत पाल सिंह, वेस पेस, एमपी गणेश, विक्टर फिलिप्स, हरबिंदर सिंह, कुलवंत सिंह, अजीत पाल सिंह, अशोक कुमार, बीपी गोविंदा, हरचरण सिंह.
1976 के मॉन्ट्रियल ओलंपिक में भारतीय टीम पदक जीतने से महरूम रह गई थी. ऐसा पहली बार हुआ जब भारत के हिस्से हॉकी में कोई ओलंपिक पदक नहीं आया था. हालांकि मॉस्को में भारत ने स्वर्ण पदक जीतकर जरूर इसकी भरपाई कर दी थी. लेकिन उसके बाद से भारत हॉकी में एक भी ओलंपिक पदक जीत नहीं पाया है. मॉस्को ओलंपिक में सिर्फ छह टीमों ने पुरुष हॉकी इवेंट में भाग लिया. क्योंकि न्यूजीलैंड, पाकिस्तान, ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों ने अमेरिका के नेतृत्व में ओलंपिक का बहिष्कार किया था.
वासुदेव भास्करन की कप्तानी वाली टीम इंडिया ने तंजानिया को 18-0 से धोकर शानदार शुरुआत की. इससे बाद भारत को पोलैंड और स्पेन दोनों ने ही 2-2 की बराबरी पर रोक दिया. दो ड्रॉ खेलने के बाद भारत ने क्यूबा को 13-0 और मेजबान सोवियत संघ को 4-2 से हराकर फाइनल में प्रवेश कर लिया.
फाइनल में भारत का मुकाबला पूल में टॉप पर रहने वाली स्पेनिश टीम से हुआ. टीम इंडिया ने बेहद रोमांचक फाइनल मुकाबले में स्पेन को 4-3 से हराकर रिकॉर्ड 8वीं बार स्वर्ण पदक जीत लिया. भारत की ओर से सुरिंदर सिंह सोढ़ी ने सबसे ज्यादा 2, जबकि महाराज कृष्ण कौशिक और मोहम्मद शाहिद ने एक-एक गोल किए. वहीं, स्पेन की तरफ से कप्तान जुआन अमत ने तीनों गोल दागे.
भारत को 16 साल बाद स्वर्ण पदक दिलवाने में सुरिंदर सिंह सोढ़ी की अहम भूमिका रही थी. मॉस्को ओलंपिक में सुरिंदर सिंह ने कुल 15 गोल दागे, जो एक ओलंपिक में किसी भारतीय खिलाड़ी का सर्वाधिक स्कोर था.
भारतीय टीम: वासुदेवन भास्करन (कप्तान), बीर बहादुर छेत्री, एलन शोफिल्ड, राजिंदर सिंह, दविंदर सिंह, सिल्वेनस डुंग डुंग, गुरमेल सिंह, रविंदर पाल सिंह, एम.एम. सोमाया, चरणजीत कुमार, महाराज कृष्ण कौशिक, मर्विन फर्नांडीस, अमरजीत सिंह राणा, सुरिंदर सिंह सोढ़ी, मोहम्मद शाहिद, जफर इकबाल.
भारतीय टीम ने मनप्रीत सिंह की कप्तानी में शानदार प्रदर्शन करते हुए टोक्यो में कांस्य पदक जीता. ब्रॉन्ज मेडल मैच में भारत ने जर्मनी को 5-4 से हरा दिया. टीम 41 साल बाद ओलंपिक में पदक जीतने में कामयाब रही. इससे पहले भारत को आखिरी पदक 1980 में मॉस्को में मिला था.
ग्रुप-ए में भारत को गत चैम्पियन अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, जापान, न्यूजीलैंड और स्पेन के साथ रखा गया था. वहीं, ग्रुप-बी में बेल्जियम, कनाडा, जर्मनी, ब्रिटेन, नीदरलैंड और दक्षिण अफ्रीका की टीमें थीं. सभी टीमें एक-दूसरे से खेलीं और दोनों ग्रुप से शीर्ष चार टीमें सेमीफाइनल में पहुंचीं. भारत चार जीत और एक हार के साथ अपने ग्रुप में दूसरे नंबर पर रहकर क्वार्टर फाइनल में पहुंचा था. फिर क्वार्टर फाइनल में भारत ने ग्रेट ब्रिटेन को 3-1 से हराकर सेमीफाइनल में जगह बनाई. हालांकि सेमीफाइनल में भारत को बेल्जियम के हाथों 5-2 से हार झेलनी पड़ी थी.
भारतीय टीम: मनप्रीत सिंह (कप्तान), पीआर श्रीजेश, हरमनप्रीत सिंह, रूपिंदर पाल सिंह, सुरेंद्र कुमार, अमित रोहिदास, बीरेंद्र लाकड़ा, हार्दिक सिंह, विवेक सागर प्रसाद, नीलकांत शर्मा, सुमित वाल्मीकि, शमशेर सिंह, दिलप्रीत सिंह, गुरजंत सिंह, ललित कुमार उपाध्याय, मंदीप सिंह
Report: Bishwa Mohan Mishra
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