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जानवरों की सुरक्षा पर जावेद कहते हैं, जब एक्टर्स की बॉन्डिंग जानवरों से नहीं बन पाती, तो हम उनके बॉडी डबल का सहारा लेते हैं. बहुत सारी जगह जहां फाइटिंग सीन हैं या कोई सीरियस सीन है, तो वहां ऐसा होता है. हाल ही में एक फिल्म, जो रिलीज नहीं हुई है के एक्टर जिबरान हैं, उनको मेरे डॉग गोल्डन रिट्राइवर के साथ शूट करना था. खेलते-खेलते उसके हाथ पर खरोंच आ गई. वो थोड़े डर गए. एक बार अक्षय कुमार संग वक्त फिल्म की शूटिंग कर रहे थे. उस वक्त अक्षय की स्पीड बहुत ज्यादा होती थी, तो वो डॉग से पहले निकल जाते थे. एक सीन है, जहां अक्षय दौड़ते हुए आते हैं और छलांग मारते हुए गड्ढे को क्रॉस कर जाते हैं. इसकी शूटिंग के दौरान अक्षय कुमार गड्ढे में गिर गए. फिर देखा, तो अक्षय को गड्ढे पर ही कुत्तों ने घेर लिया था.
‘हम आपके हैं कौन’में टफी का किरदार तो याद होगा आपको, जिसके एक मूव ने पूरी फिल्म का क्लाइमैक्स बदलकर रख दिया था. इतना ही नहीं ‘तेरी मेहरबानियां’का डॉगी ब्राउनी जो जैकी श्रॉफ पर भी भारी पड़ा था. वही हाल ‘हाथी मेरे साथी फिल्म’ में हाथी का था, जिसने हम सभी दर्शकों को इमोशनल कर दिया था. बसंती की इज्जत बचाने में जुटी धन्नो घोड़ी हो या मर्द तांगे वाला का घोड़ा बादल...फिल्मों में कई बार एक्टर्स पर भी भारी पड़ते ये एनिमल्स असल जिंदगी में भी स्टारडम भरी लाइफ जीते हैं. एक्टर-एक्ट्रेस की तरह उनके साथ फिल्मों में दिखने वाले जानवरों की भी शान-ओ-शौकत कम नहीं होती. कभी आपने सोचा है कि आखिर इन्हें स्क्रीन पर लाने वाला कौन होता है और इसके पीछे किस तरह का बिजनेस काम करता है. आइए डिटेल में जानते हैं...
एनिमल्स की फीस उनकी स्किल और कैच करने की क्षमता पर निर्भर करती है. हालांकि फिल्म और टीवी के शूट टाइम के हिसाब से फिक्स प्राइज तय कर दिए जाते हैं. फिल्मों में कम वक्त के लिए होते हैं, तो पैसे कम मिलते हैं. प्राइज रेट्स डिवाइड नहीं हैं, सबकुछ उनकी स्किल पर है. किसका कितना काम है, उस भी फीस फिक्स की जाती है. किसी डॉगी का डेट नहीं मिलता है, तो उसके लिए भी मेकर्स बाकायदा इंतजार करते हैं. हालांकि फ्यूचर में इनके रेट्स कार्ड पर भी डिसीजन लिया जाना है. किस रेट पर किस एनिमल्स को रखा जाए.
मुंबई के दादर एरिया में रहने वाले जावेद बॉलीवुड फिल्मों के लिए एनिमल सप्लाई करते हैं. जावेद और उनका परिवार इस बिजनेस में पिछले 40 साल से हैं. aajtak.in से बातचीत में जावेद बताते हैं, यह कोई नया काम नहीं है. मेरे पापा आयुब खान जिनका इंडस्ट्री नाम मुन्ना भाई भी है, इसे चलाते आ रहे हैं. पापा को 40 साल से भी ज्यादा इस बिजनेस में हो गए हैं. वो मानखुर्द के अनाथालय में रहा करते थे. पापा को एनिमल से बहुत प्यार था. वो छोटे लेवल पर लोगों के पालतू कुत्तों को वॉक कराने ले जाया करते थे.
इस दौरान वो आरके स्टूडियो के पास से गुजरते थे. साथ ही प्रोडक्शन हाउस में भी छोटा-मोटा काम कर लिया करते थे. उस बीच आरके स्टूडियो को एक फिल्म के लिए डॉग की जरूरत थी. उन्होंने पापा को कुत्ता टहलाते हुए देखा और उन्हें फौरन कहा कि इसे इस सीन के लिए रखना है. उस वीडियो में आने के लिए पापा को अच्छे खासे पैसे भी मिले. तब से पापा आरके स्टूडियो में ही डॉग ट्रेनिंग का काम करने लगे. काम करते वक्त उनको अहसास हुआ कि आने वाले समय में इंडस्ट्री में इस पर बहुत से काम हो सकते हैं इसलिए उन्होंने इसे बतौर बिजनेस खड़ा कर लिया. हम ‘एनिमल गुरुकुल’ के नाम से इस इंडस्ट्री में बरसों से सक्रिय हैं.
जब फिल्म शुरू होती है, तो तीन सेकेंड के डिसक्लेमर में शूटिंग के दौरान किसी भी जानवर को नुकसान न पहुंचाने वाला लंबा मैसेज दिया जाता है. जावेद कहते हैं, पहले एनिमल्स परमिशन जैसी चीजें नहीं होती थीं. धीरे-धीरे इसका दायरा बढ़ता गया. अब तो कई चीजें इसमें होने लगी हैं. जिससे हमारा काम बढ़ा है. शूटिंग से पहले एडब्लूबीआई(एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया) की परमिशन की जरूरत पड़ती है. लिखित में देना पड़ता है कि शूटिंग के दौरान एनिमल्स को किसी तरह का नुकसान नहीं पहुंचा है.
शूटिंग से पहले उनका फिटनेस सर्टिफिकेट, वैक्सीनेशन आदि चीजों की लिस्ट पूरी करनी होती है. यह अच्छी चीज है. इस बिजनेस में हमारे अलावा भी और लोग हैं. कोई घोड़ा सप्लाई करता है, तो कोई डॉग्स. वहीं कई सारे पेट स्टोर भी खुल चुके हैं, जहां प्रोडक्शन हाउस वाले घंटे या दिन के हिसाब से टाइम व पैसे फिक्स कर लेते हैं. पहले हमें बड़ी दिक्कत होती थी, क्योंकि उनकी वजह से हमारे बिजनेस पर असर पड़ रहा था. हालांकि कुछ समय पहले ही एनिमल्स वेलफेयर ने सर्कुलर जारी करते हुए कहा है कि आप कहीं से भी जानवर नहीं ले सकते हो, केवल हम जैसे लोगों से ही आपको डील करना होगा. जावेद कहते हैं कि हमारे पास सारे जानवरों का रजिस्ट्रेशन है, उनका वैक्सीनेशन आदि सबके पुख्ता कागज हैं. हम एक तय प्रक्रिया के जरिए काम करते हैं, इसलिए हम पर भरोसा किया जाता है.
जावेद कहते हैं कि उनके पास फिलहाल 25 एनिमल्स हैं. 10-12 डॉग्स हैं, 6-7 बिल्लियां हैं. सुगर ग्लाइडर, इगुआना जैसे जानवर भी हैं. गिलहरी का इस्तेमाल फिल्मों में बैन है, तो उसकी जगह सुगर ग्लाइडर (फ्लाइंग स्क्वायरल) से काम लिया जाता है. एमेजॉन पैरेट्स, मकाऊ पैरोट्स हैं. एमेजॉन पैरोट्स का इस्तेमाल ज्यादा होता है क्योंकि ग्रीन इंडियन पैरोट्स बैन हैं. हाथी, ऊंट जैसे बड़े जानवरों को वे कहीं और से फिल्मों के सेट पर लेकर आते हैं. उदाहरण के तौर पर प्रेम रतन धन पायो में एक सीन शूट किया था, तो उसमें हाथी गुजरात से मंगाए गए थे. सूरज बड़जात्या को इसमें 6 हाथी चाहिए थे, लेकिन केवल दो हाथियों का पेपर ही क्लियर हो पाया. मुंबई में तो ऊंट, हाथी जैसे जानवर बिना परमिशन के आ ही नहीं सकते हैं.
जावेद बताते हैं कि हर एनिमल की ट्रेनिंग अलग-अलग होती है. हालांकि कौन कब सीख जाए, इसकी कोई गारंटी नहीं होती. ये प्रोसेस बिल्कुल वैसी है, जैसे स्कूल में पढ़ने वाले नए बच्चों की होती है. आपको नहीं पता होता है कि किस पर कितनी मेहनत लगेगी. अगर किसी एक ब्रीड के डॉगी ने पांच महीने का वक्त लिया है, तो जरूरी नहीं कि उसकी ब्रीड वाला दूसरा उतना ही वक्त ले.
जावेद बताते हैं कि ट्रेनर्स को सबसे ज्यादा मुश्किल एनिमल्स और उनके बच्चों की शूटिंग के दौरान आती है. जानवर अपने मूड के हिसाब से शूटिंग करते हैं. इन्हें भी तमाम तरह के लालच देकर समझाना पड़ता है. कभी-कभी इनकी वजह से भी शूटिंग रुक जाती है. कई बार चाहे गए रिएक्शन नहीं मिलते. अभी हाल ही में ऊटी में एक विज्ञापन शूट कर रहे थे, जिसमें बच्ची थी और डॉग था, जो साइबेरियन हस्की था. शूटिंग में डायरेक्टर को डॉग का एक प्रॉपर रिएक्शन चाहिए था, जो शूटिंग के वक्त मिल नहीं पाया. एक दिन की शूटिंग में तीन दिन लग गया था.
दीपक डोबरियाल पेट फ्रेंडली बिल्कुल नहीं थे. वो लाल कप्तान में दो डॉग्स के बीच काम किया करते थे. उन्हें दो महीने तक लगातार डॉग्स के साथ रखा गया, तब जाकर वो इन एनिमल्स के साथ दोस्ती कर पाए. हालांकि ज्यादातर एक्टर पेट फ्रेंडली ही होते है. दीपिका पादुकोण, अनुष्का शर्मा, सलमान खान ये तो एनिमल्स के साथ सेट पर घुल-मिल जाते हैं.
एक बार की बात है किसी ऐड में महेंद्र सिंह धोनी और साक्षी मैम सेट पर आए हुए थे. गोल्डन रिट्रीवर ब्रूनो संग धोनी का शूट होना था. साक्षी मैम वहीं सेट पर डॉग्स के साथ खेलने लगीं. शूट का टाइम हो गया, लेकिन किसी की हिम्मत नहीं हुई कि साक्षी जी को जाकर कहें कि हमें शूट के लिए यह डॉग चाहिए. मेरे पापा वहां शूटिंग में थे.पापा ने कॉल कर कहा कि तू डॉग शेरू को लेकर फटाफट स्टूडियो आ जा. मैं पहुंचा, तो पापा ने शेरू को साक्षी मैम के सामने रखने को कहा. वो उसके साथ भी खेलने लगीं, ऐसे में गोल्डन रिट्रीवर हमारा फ्री हो गया.
एनिमल्स का ऑडिशन तो आम हो चुका है. डॉग्स और कैट के ऑडिशन भी बाकायदा करवाए जाते हैं. सैफ अली खान के साथ एक अंडरगारमेंट का ऐड था, जिसमें वो मुर्गी को कहते हैं कि तीन अंडे देना. मुर्गी ने भी उस ऐड के लिए ऑडिशन दिया था. ऑडिशन का प्रोसेस भी बड़ा दिलचस्प होता है. अगर कोई एनिमल आपकी कमांड को जल्दी सुनकर रिएक्ट कर देता है, तो उसे फौरन सिलेक्ट कर लिया जाता है. डॉग्स के ऑडिशन के दौरान कास्टिंग डायरेक्टर हमसे पूछते हैं कि ये डॉगी क्या-क्या कर सकता है. वो करके दिखाओ.
कुल्फी कुमार सीरियल के लिए मेरे डॉग को एक लंबे ऑडिशन से गुजरना पड़ा था. वो मेरा डॉगी इतना हाइपर एक्टिव है कि लोग उसे देखकर थक चुके हैं. वो अब तो स्टार बन चुका है.
सेट पर इनके खाने की सुविधा पर पूरा ध्यान दिया जाता है. अब तो एनिमल्स को सेट पर पर्याप्त जगह दी जाती है. होटल में एनिमल के कमरे भी बुक होते हैं. जहां परमिशन नहीं मिलती, उन जगहों पर सेट पर ही टेंट वगैरह बांधकर एसी व कूलर की सुविधा के साथ कमरा मिल जाता है.
हां, स्टार्स की तरह एनिमल्स की डेट्स को लेकर भी मारामारी होती ही है. कभी-कभी कोई एनिमल जो बहुत ज्यादा ट्रेंड होता है और कैमरा फ्रेंडली रहता है, वो अगर किसी सीरियल में बिजी है, तो जाहिर है कि फिल्म का ऑफर भी मिल जाए, तो उसे रिजेक्ट करना पड़ता है. यहां डॉग्स की लाइफ 12 से 15 साल तक की होती है. ‘बागवान’ फिल्म के दौरान अमिताभ बच्चन के पास दो डॉग्स होते हैं, दोनों ही लेब्राडॉग होते हैं. उनमें से एक का नाम ब्रूनो था. ब्रूनो तो इतना फेमस था कि उसे हर कोई एक्टर जानने लगा था.
उसकी पॉप्युलैरिटी इतनी थी कि अमिताभ बच्चन भी अगर सेट पर होते, तो उसे देखकर पहचान जाते थे. वहीं फिल्म एंटरटेनमेंट में गोल्डन रिट्रीवर ब्रूनो था, जिसकी हाल ही में डेथ हुई है. वो स्टार्स का चहेता था. रोहित शेट्टी सर को बॉक्सर ब्रीड बहुत पसंद है. उनकी ‘ऑल द बेस्ट’, ‘गोलमाल-3’ जैसी फिल्मों में मेरा बॉक्सर था. उसका रियल नाम जेरी था. वहीं अहमद खान को ग्रेडेन बहुत पसंद है. अलग-अलग एक्टर्स को अलग-अलग तरह के ब्रीड पसंद हैं.
जावेद कहते हैं कि वीएफएक्स के आ जाने के बाद हमारी मार्केट में 20 प्रतिशत की गिरावट आई है. करीना कपूर की फिल्म ‘मैं प्रेम की दीवानी हूं’, देखें, तो उसमें मेरा डॉग था लेकिन जो पैरोट का इस्तेमाल किया गया था, वो पूरी तरह से एनीमेटेड था. इस बात की मुझे टेंशन है कि कल को टेक्नोलॉजी हाई लेवल की होगी, तो जानवर भी रिक्रिएट किए जाने लगेंगे. हालांकि शूटिंग के दौरान कई ऐसे जानवर जो खतरनाक होते हैं, उनका रिक्रिएशन तो होता ही रहा है.