कॉलेजियम की सिफारिश के बावजूद हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में जजों की नियुक्ति ना करने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को फटकार लगाई है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऐसा लगता है कि सरकार NJAC के रद्द किए जाने से नाखुश है.
कॉलेजियम की सिफारिश के बावजूद जजों की नियुक्ति में देरी के मसले पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान ये माना कि कॉलेजियम द्वारा प्रस्तावित न्यायाधीशों की नियुक्ति पर विचार करने में केंद्र महीनों देरी करता रहा है. सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसा लगता है कि सरकार इस बात से नाखुश है कि राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (NJAC) ने संवैधानिक मास्टर पास नहीं किया था.
केंद्रीय मंत्री ने दिया था ये बयान
दो दिन पहले केंद्रीय कानून मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा था कि कॉलेजियम नहीं कह सकता कि सरकार उसकी तरफ से भेजा हर नाम तुरंत मंजूर करे. फिर तो उन्हें खुद नियुक्ति कर लेनी चाहिए. कोर्ट ने टिप्पणी की कि हमें न्यायिक पक्ष पर फैसला करने को विवश ना करें. वहीं, जस्टिस कौल ने अटॉर्नी जनरल और सॉलिसिटर जनरल को कहा कि वे सरकार को यह सुनिश्चित करने के लिए सलाह दें कि देश के कानून का पालन किया जाए. इसके बाद कोर्ट ने इस मामले में 8 दिसंबर को सुनवाई की अगली तारीख तय कर दी.
'सरकार को देना होगा जवाब'
तीखे सवालों और टिप्पणियों से भरी सुनवाई के दौरान जस्टिस संजय किशन कौल ने कहा कि आप लंबे समय तक नाम की सूची लेकर बैठे नहीं रह सकते. सरकार को आपत्तियां बतानी होंगी. बिना आपत्ति यानी ठोस कारण बताए कोलेजियम से आई नियुक्ति की सिफारिश वाले नामों को लंबित नहीं रख सकते. कई नाम डेढ़ साल से लंबित हैं. नियुक्ति के स्वीकृत तरीके को आप प्रभावित कर रहे हैं.
'सरकार कर रही सिस्टम में देरी'
जज ने कहा कि ऐसा करके सरकार वरिष्ठता क्रम को पूरी तरह से भंग कर देती है. जजों की पीठ ने कहा कि पहली पीढ़ी के वकील मिलना बहुत कठिन स्थिति है. सिफारिश के आधार पर ही जजों की नियुक्ति के लिए समयसीमा निर्धारित की गई है. इसका पालन करना होगा. जस्टिस एस के कौल ने कहा कि लंबित मुकदमों का भारी बोझ बढ़ता ही जा रहा है. जबकि जजों की समय से सेवा निवृत्ति से पद खाली होते जा रहे हैं. लेकिन नियुक्तियों पर सरकार बैठी है.
सरकार के रवैये पर उठाए सवाल
अच्छे लोगों को बेंच में शामिल करने की हमारी पेशकश पर सरकार को समय सीमा का पालन करना चाहिए. जब तक कि कोई अपवाद या ठोस वजह न हो सरकार को नियुक्तियों को रोक कर नहीं रखना चाहिए. सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम की अनुशंसा के बावजूद अधिकांश नाम 4 महीने से भी ज्यादा समय से सरकार के पास यूं ही पड़े हैं. उस पर सरकार क्यों चुप बैठी है? इसके कारणों की हमें कोई जानकारी नहीं है. यदा कदा जब आप नियुक्ति करते हैं, तो आप सिफारिश की गई सूची में से एक नाम चुनते हैं. दूसरे नाम वहीं छोड़ देते हैं. बिना कारण बताए या पूछे. कोर्ट ने कहा कि केंद्र सरकार जजों की नियुक्ति पर बैठी रहेगी तो सिस्टम कैसे काम करेगा?