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महाभारत, ईसा मसीह, अकबर...गाय को राष्ट्रीय पशु बनाने की बात पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने क्यों किया इनका जिक्र

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बुधवार को एक मामले की सुनवाई के दौरान गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने का सुझाव दिया. कोर्ट ने कहा कि सरकार को बिल लाकर गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करना चाहिए. कोर्ट ने अपने आदेश में महाराभारत, रामायण से लेकर बाबर, हुमायूं और अकबर तक का जिक्र किया है.

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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने का सुझाव दिया है. (फाइल फोटो)
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने का सुझाव दिया है. (फाइल फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने का सुझाव
  • हमें अपनी संस्कृति बचानी होगीः हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने बुधवार को एक मामले की सुनवाई करते हुए गाय को लेकर एक अहम टिप्पणी की. हाईकोर्ट ने गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने का सुझाव दिया. हाईकोर्ट ने कहा, 'जब गाय का कल्याण होगा, तभी देश का कल्याण होगा. सरकार को संसद में बिल लाकर गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करना होगा और उनके खिलाफ कड़ा कानून बनाना होगा जो गाय को नुकसान पहुंचाने की बात करते हैं.'

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इलहाबाद हाईकोर्ट के इस आदेश पर महाभारत और रामायण से लेकर ईसा मसीह और बाबर, अकबर, हुमायूं तक का जिक्र आया. हाईकोर्ट ने कहा, 'वेद शास्त्र, पुराण, रामायण, महाभारत में गाय का महत्व दिखाया गया है. इसी कारण गाय हमारी संस्कृति का आधार है. स्वामी दयानंद सरस्वती ने कहा है कि एक गाय अपने जीवनकाल में 4,10,440 लोगों के लिए एक समय का खाना जुटाती है और उसके मांस से केवल 80 लोग ही अपना पेट भरते हैं.' 

कोर्ट ने आगे कहा, 'हिंदू धर्म के अनुसार गाय में 33 कोटी के देवी-देवता वास करते हैं. हजारों साल पुराने वेदों में भी गाय का उल्लेख है. भगवान श्रीकृष्ण को सारा ज्ञान गौचरणों से मिला है. भगवान राम के पूर्वज राजा दिलीप नंदिनी गाय की पूजा करते थे. भगवान शंकर का वाहन नंदी गाय का ही वंशज था. भगवान श्रीकृष्ण ने श्रीमद्भगवतगीता में कहा है धेनुनामस्मि कामधेनू मतलब गायों में मैं कामधेनु हूं.' कोर्ट ने ये भी कहा कि 'ईसा मसीह ने कहा है कि एक गाय या बैल को मारना मनुष्य के मारने के समान है. वैज्ञानिक भी ये मानते हैं कि एक गाय ही है जो ऑक्सीजन ग्रहण करती है.'

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जब आया बाबर, अकबर, हुमायूं का जिक्र...

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में बाबर, अकबर और हुमायूं का भी जिक्र किया. कोर्ट ने कहा, 'न सिर्फ हिंदुओं बल्कि मुसलमानों ने भी गाय को संस्कृति का अहम हिस्सा मानते हुए अपने शासनकाल में गायों के वध पर रोक लगाई थी. तार्क-ए-गौकशी, जिसमें गोहत्या न करने की बात लिखी गई है, जिसमें अकबर, हुमायूं और बाबर ने अपनी सल्तनत में गोहत्या न करने की अपील की थी, क्योंकि इससे हिंदुओं की भावनाओं को ठेस पहुंचती है.'

... इसलिए गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित किया जाए

हाईकोर्ट ने कहा, 'गाय को एक राष्ट्रीय पशु घोषित किया जाए और गौरक्षा को हिंदुओं के मौलिक अधिकार में रखा जाए क्योंकि हम जानते हैं कि जब देश की संस्कृति और उसकी आस्था पर चोट होती है तो देश कमजोर होता है. चाणक्य ने लिखा है कि किसी भी देश को नष्ट करना है तो सबसे पहले उसकी संस्कृति को नष्ट कर दो, देश अपने आप नष्ट हो जाएगा.'

हाईकोर्ट ने आखिर में कहा, 'हम जब-जब अपनी संस्कृति भूले हैं, तब-तब विदेशियों ने हम पर आक्रमण किया है और आज भी हम न चेते तो अफगानिस्तान पर तालिबान का आक्रमण और कब्जे को भी हमें नहीं भूलना चाहिए.'

 

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