महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की पत्नी अमृता फडणवीस को 'ब्लैकमेल' के मामले में आरोपी कथित डिजाइनर अनिक्षा जयसिंघानी को कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. कोर्ट ने उसकी जमानत मंजूर कर दी है. उसे 50 हजार रुपये की जमानत राशि जमा करनी होगी. इसके साथ ही पासपोर्ट जमा करना होगा. हालांकि, अनिक्षा के पिता अनिल जयसिंघानी को बेल नहीं मिली है. कोर्ट ने उसे जेल भेज दिया. मुंबई पुलिस ने उसकी पांच दिन की रिमांड मांगी. जबकि मध्य प्रदेश पुलिस ने भी उसकी कस्टडी की मांग रखी.
इससे पहले पुलिस ने सट्टेबाज आरोपी अनिल जयसिंघानी और उसकी बेटी अनिक्षा को लेकर बड़ा खुलासा किया था. पुलिस ने दावा किया था कि दोनों बाप-बेटी मिलकर योजना बनाते थे कि अमृता फडणवीस को किस तरह के संदेश भेजे जाएं. पुलिस ने बताया कि अमृता को वॉट्सऐप मैसेज भेजने से पहले अनिक्षा अपने पिता से से प्रॉपर चर्चा जरूर करती थीं.
'पॉलिटिकल कनेक्शन का पता करने की जरूरत'
सोमवार को मुंबई पुलिस ने अनिल जयसिंघनाई की पांच दिन की हिरासत मांगी. विशेष सरकारी वकील अजय मिसर ने कहा कि अनिल के संबंध में राजनीतिक संबंध की जानकारी आई है, जिसकी जांच करने की आवश्यकता है. अनिल की बेटी अनिक्षा द्वारा अमृता को भेजे गए मैसेज में कहा गया कि उनके पिता शिवसेना (यूबीटी) नेता उद्धव ठाकरे और राकांपा प्रमुख शरद पवार को जानते हैं. मैसेज में यह भी कहा गया कि अमृता को अभियुक्त ब्लैकमेल भी कर रहे थे. अनिक्षा के खिलाफ FIR दर्ज होने के 17 मार्च को गिरफ्तार किया गया था. 20 फरवरी की प्राथमिकी के अनुसार, अमृता ने दावा किया कि डिजाइनर अनिक्षा 2021 से उसके संपर्क में थी. उसने पहले उसके पिता के खिलाफ अनगिनत मामलों को निपटाने के लिए उसे पैसे देने की कोशिश की और बाद में करोड़ों रुपये ब्लैकमेल करने की कोशिश की. ब्लैकमेल करने के लिए कुछ वीडियो का इस्तेमाल किया.
अनिल के वकील ने सवाल उठाए
हालांकि अनिल जयसिंघानी की ओर से पेश वकील मृगेंद्र सिंह और मनन संघाई ने कहा कि अमृता ने यह नहीं बताया कि एक युवा लड़की द्वारा 10 करोड़ रुपये की मांग क्यों की जा रही थी, वह भी उपमुख्यमंत्री की बेटी से. उन्होंने आगे आरोप लगाया कि प्राथमिकी के बाद अमृता फडणवीस ने मुलाकात की. अनिल की बेटी तीन बार फाइव स्टार होटलों में गई. सिंह ने आगे आरोपी की चिकित्सा स्थिति पर जोर दिया और कहा- कृपया डॉक्टर को बुलाएं, उम्मीद है कि अदालत परिसर में एक डॉक्टर होगा. हम उसका ब्ल्ड प्रेशर चेक कर सकते हैं. वह बैठ नहीं पा रहे हैं.
'मुझे हॉस्पिटल में भर्ती करने की जरूरत है'
अनिल जयसिंघानी ने भी अदालत में कहा- मेरी पसलियां टूट गई हैं और मैं बोल नहीं पा रहा हूं. मेरा ब्लड प्रेशर हाई है. यह 220 पर है और वे इसे 140 के रूप में दिखाते हैं. मैं पिछले 10 वर्षों से ऑक्सीजन मशीन पर हूं. मेरे पैर सूज गए हैं और मुझे अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता है. मैं अपने खर्च पर भर्ती होने के लिए तैयार हूं. कृपया मेरी बात सुनें. मैं दो बच्चों का पिता हूं और मेरी पत्नी भी नहीं है.
अनिल को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया
सिंह ने यह कहते हुए अनिक्षा की जमानत मांगी कि अनिल ने कुछ साल पहले अपनी पत्नी को खो दिया है, जबकि बेटी छोटे भाई की देखभाल कर रही थी, जो अभी नहीं मिल रहा है. सिंह ने आरोप लगाया कि पुलिसकर्मियों ने अनिल को चेतावनी दी थी कि वे उनके बेटे को भी फंसा देंगे. दोनों पक्षों को सुनने के बाद जज डीडी अलमाले ने अनिल जयसिंघानी को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजने का फैसला किया. सिंह ने तुरंत जमानत याचिका दायर की और अभियोजन पक्ष को 31 मार्च तक जवाब दाखिल करने को कहा.
कोर्ट ने अनिक्षा को सशर्त जमानत दी
वहीं, कोर्ट में मध्य प्रदेश पुलिस के एक पुलिस अधिकारी ने कटघरे में आकर अनिल की कस्टडी की मांग की और कोर्ट को संबोधित एक पत्र पेश किया. पुलिस का कहना था कि अनिल पर वहां एक केस दर्ज है, इसलिए पूछताछ जरूरी है. हालांकि, जज ने पुलिस अधिकारी से कहा कि वो उचित दस्तावेज पेश करें. अदालत ने अनिक्षा को इस शर्त पर जमानत दी कि वो हर हफ्ते एक बार पुलिस के सामने पेश होंगी और अपना पासपोर्ट भी जमा करेंगी. संघई ने कहा कि प्रक्रिया पूरी करने के बाद संभावना है कि अंकीक्षा मंगलवार को भायखला जेल से बाहर आ जाएंगी.
इससे पहले सोमवार को रिमांड खत्म होने पर दोनों को अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश डीडी अलमाले के समक्ष पेश किया गया. विशेष सरकारी वकील अजय मिसर ने दोनों की हिरासत पांच दिनों के लिए और बढ़ाने की मांग की, लेकिन अदालत ने उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया. उपमुख्यमंत्री की पत्नी की शिकायत के आधार पर पुलिस ने पिता-पुत्री के खिलाफ साजिश और जबरन वसूली और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज किया था. पुलिस के मुताबिक अनिल जयसिंघानी के खिलाफ 17 मामले लंबित हैं.
सरकारी वकील ने जमानत का किया विरोध
सरकारी वकील अजय मिसर ने कोर्ट में कहा कि पर्याप्त गवाह और सबूत हैं. सबूतों से छेड़छाड़ और गवाहों को प्रभावित करने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता. 41ए के दिशा-निर्देशों का पालन किया गया है, लेकिन वह नोटिस नहीं ले रही थीं इसलिए गिरफ्तारी करनी पड़ी. विशेष सरकारी वकील ने जमानत याचिका का विरोध किया और कहा कि यह एक तरह का ऐसा केस है, जिसमें उपमुख्यमंत्री की पत्नी ने मामला दर्ज कराया है. केस दर्ज होने के बावजूद आरोपी नहीं रुका और लगातार मैसेज करता रहा और धमकी देता रहा.
क्या है पूरा मामला
बता दें कि अमृता फडणवीस ने मुंबई के मालाबार हिल पुलिस स्टेशन में अनिक्षा के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी. अमृता ने दावा किया कि अनिक्षा ने एक आपराधिक मामले में हस्तक्षेप करने के लिए उन्हें 1 करोड़ रुपये की रिश्वत देने का ऑफर दिया है. जब अमृता ने ऑफर नहीं स्वीकार किया तो उन्हें ब्लैकमेल भी किया गया. शिकायत में अमृता ने कहा कि उन्हें 18 और 19 फरवरी को अनिक्षा ने एक अज्ञात फोन नंबर से अपने वीडियो क्लिप, वॉयस नोट्स और कई संदेश भेजे. अमृता के मुताबिक, अनिक्षा के पिता भी इस मामले में उसका साथ दे रहे थे. अमृता ने कहा कि वह पहली बार नवंबर 2021 में अनिक्षा से मिली थीं. इसके बाद अनिक्षा से कई बार मुलाकात हुई. अमृता इस महिला डिजाइनर को लंबे वक्त से जानती हैं. वो कई बार उनके आवास पर भी आ-जा चुकी है. 16 मार्च को अमृता फडणवीस की शिकायत पर उसे गिरफ्तार किया गया था. इस मामले में आरोपी अनिल जयसिंघानी को 20 मार्च को गुजरात से गिरफ्तार किया गया था.