लोकसभा चुनाव से पहले बोफोर्स तोप खरीद में कथित रिश्वतखोरी का जिन्न फिर बोतल से निकला है. वकील और याचिकाकर्ता अजय अग्रवाल ने आम चुनाव के ऐलान से ऐन पहले सुप्रीम कोर्ट में वर्षों से लंबित बोफोर्स तोप सौदे में दलाली की जांच के मामले पर शीघ्र सुनवाई की अर्जी लगाई है. बोफोर्स केस की जांच में ₹250 करोड़ खर्च हुए या 5.5 करोड़ रुपए? इसकी जांच की गुहार वर्षों से लंबित है.
सुप्रीम कोर्ट में वकील और याचिकाकर्ता अजय अग्रवाल ने अपनी मूल याचिका के जरिए 2005 में दिल्ली हाईकोर्ट के उस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे रखी है, जिसमें बोफोर्स तोपों के सौदे में 64 करोड़ रुपए की कथित दलाली खाने और खिलाने के आरोपी हिंदुजा भाइयों सहित सभी आरोपियो पर लगे इल्जाम खारिज कर दिए गए थे. अदालत ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया था.
याचिकाकर्ता वकील अजय अग्रवाल ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि बड़ा सवाल ये है कि अदालत को ये खर्च के तथ्य किसने मुहैया कराए? जबकि मार्च 2011 में आरटीआई के जवाब में ये बताया गया कि पूरी जांच में पांच करोड़ 41 लाख रुपए खर्च हुए थे. तो सीबीआई ने इतने सालों तक फैसले में इस तथ्यात्मक त्रुटि को सुधारने की अर्जी क्यों नहीं लगाई?
सर्वोच्च न्यायालय ने 2 नवंबर 2018 को हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली सीबीआई की याचिका भी यह कहते हुए खारिज कर दी थी कि जांच एजेंसी अग्रवाल की ही याचिका पर सुनवाई के दौरान अपनी दलीलें रखे, क्योंकि अग्रवाल ने पहले एसएलपी लगाई है.