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लखीमपुर खीरी हिंसा कांड में चार्जशीट दाखिल, आशीष मिश्रा पर हत्या का आरोप तय

लखीमपुर खीरी के तिकुनिया हिंसा मामले में कोर्ट ने मंगलवार को 14 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय कर दिया है. सरकार वकील से यह जानकारी दी. इस मामले में केंद्रीय गृहराज्य मंत्री अजय कुमार मिश्रा 'टेनी' के बेटे आशीष मिश्रा इस हिंसा मामले में मुख्य आरोपी है. इस हिंसा में चार किसानों की मौत हो गई थी.

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केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय कुमार मिश्रा का बेटा है आशीष (फाइल फोटो)
केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय कुमार मिश्रा का बेटा है आशीष (फाइल फोटो)

लखीमपुर खीरी के बहुतचर्चित तिकुनिया हिंसा मामले में कोर्ट ने मंगलवार को 14 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय कर दिया है. सभी को हत्या, हत्या का प्रयास समेत कई धाराओं में आरोपी बनाया गया है. इस मामले में केंद्रीय गृहराज्य मंत्री अजय कुमार मिश्रा 'टेनी' के बेटे आशीष मिश्रा इस हिंसा मामले में मुख्य आरोपी है. इस हिंसा में चार किसानों समेत 8 लोगों की मौत हो गई थी.

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मालूम हो कि एक दिन पहले यानी 5 दिसंबर को आशीष मिश्रा के अलावा 13 अन्य आरोपियों की डिस्चार्ज एप्लिकेशन खारिज कर दी गई थी. इन आरोपियों ने कोर्ट में याचिका के जरिए अपना पक्ष रखते हुए कहा था कि हम घटना में शामिल नहीं थे. इसलिए हम पूरी तरह निर्दोष हैं, लेकिन कोर्ट ने आरोपियों की याचिका को खारिज कर दिया है.  

इन धाराओं में तय हुए आरोप

जानकारी के मुताबिक एडीजे फर्स्ट सुशील श्रीवास्तव की कोर्ट में धारा 147, 148, 149, 326, 30, 302, 120 B, 427 और धारा 177 में आरोप तय किए गए हैं. सभी आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने के लिए पर्याप्त आधार पाए गए हैं. इसके अलावा आरोपी सुमित जायसवाल के खिलाफ धारा 3/25, आशीष मिश्र, अंकितदास, लतीफ व सत्यम पर धारा 30, नन्दन सिंह विष्ट पर धारा 5/27 का भी आरोप तय हुआ है.

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क्या है लखीमपुर खीरी हिंसा का मामला? 

लखीमपुर खीरी जिले में 3 अक्टूबर 2021 को नए कृषि कानूनों के विरोध में किसान सड़क पर उतर आए थे. आरोप है कि केंद्रीय मंत्री और स्थानीय सांसद अजय मिश्रा के बेटे आशीष मिश्रा ने विरोध कर रहे किसानों पर गाड़ी चढ़ा दी. इसके बाद हिंसा हुई थी. इस हिंसा में चार किसानों समेत कुल आठ लोगों की मौत हो गई थी.  

यूपी चुनाव के बाद मिल गई थी जमानत

हालांकि, यूपी चुनाव के बाद आशीष मिश्रा जमानत पर जेल से बाहर आ गया था. जमानत पर आशीष मिश्रा की रिहाई का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा और सर्वोच्च न्यायालय ने जमानत रद्द करते हुए ये केस इलाहाबाद हाईकोर्ट में नए सिरे से विचार के लिए भेज दिया था. इसके बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जमानत याचिका रद्द कर दी थी. जमानत याचिका खारिज होने के बाद आशीष मिश्रा मोनू ने जमानत के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. 

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