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दिल्ली HC ने कहा, बिना ट्रायल बच्चों को लगाई वैक्सीन तो त्रासदी जैसा, जल्दबाजी ठीक नहीं

दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि बिना उचित रिसर्च के बच्चों को वैक्सीन लगाने की इजाजत दी गई तो यह त्रासदी हो सकती है. कोर्ट ने यह भी कहा कि शोध की कोई समयसीमा नहीं तय की जा सकती है.

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बच्चों की वैक्सीन पर हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणी (AP- सांकेतिक फोटो)
बच्चों की वैक्सीन पर हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणी (AP- सांकेतिक फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • दिल्ली HC ने पूछा- बच्चों के लिए वैक्सीन कब
  • पूरी रिसर्च होने के बाद ही बच्चों को टीका लगेः HC
  • सरकार बोली- जॉयडस कैडिला का ट्रायल पूरा

देश में बच्चों को कोरोना की वैक्सीन कब लगेगी, ये सवाल सभी के मन है. सरकार की तरफ से लगातार कहा जा रहा है कि बच्चों के लिए भी जल्द वैक्सीन उपलब्ध होगी. अब इस बीच दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा है कि बिना ट्रायल बच्चों को कोरोना की वैक्सीन लगाना त्रासदी से कम नहीं. कोर्ट ने जोर देकर कहा है कि पूरी रिसर्च होने के बाद ही बच्चों को टीका लगना चाहिए.

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दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि बिना उचित रिसर्च के बच्चों को वैक्सीन लगाने की इजाजत दी गई तो यह त्रासदी हो सकती है. शोध की कोई समयसीमा नहीं तय की जा सकती है. इसके अलावा कोर्ट ने सरकार से सवाल भी पूछा कि बच्चों के लिए अभी कोई वैक्सीन उपलब्ध है या नहीं. इस पर सरकार की तरफ से ASG चेतन शर्मा ने कोर्ट को बताया कि बच्चों की वैक्सीन भारत में जल्द उपलब्ध होगी. जॉयडस कैडिला का ट्रायल 12 से 18 वर्ष के किशोर और तरुण वय के लोगों पर पूरा हो चुका है. 

सरकार का क्या तर्क?

सरकार की ओर से ये भी कहा गया कि भारत बायोटेक के टीके कोवैक्सिन के 12 से 18 वर्ष तक के लोगों पर ट्रायल की इजाजत भी दी जा चुकी है. जल्दी ही ये पूरा होने पर नतीजों के आधार पर टीकाकरण शुरू कराया जाएगा. अब सरकार को कोर्ट में इतना सब कुछ इसलिए बताना पड़ा क्योंकि याचिकाकर्ता द्वारा ये मुद्दा उठाया गया था कि बच्चों को कब तक वैक्सीन लग सकती है. याचिका में जोर देकर कहा गया था कि सरकार एक समयसीमा तय करे.

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उसी याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा है कि कोई समयसीमा तय नहीं की जा सकती है. बिना ट्रायल के बच्चों को वैक्सीन देना भी बड़ी आपदा साबित हो सकता है. ऐसे में कोर्ट की तरफ से भी बच्चों की वैक्सीन को लेकर चिंता जरूर जाहिर की गई है, लेकिन किसी भी तरह की जल्दबाजी करने से मना किया गया है.

जानकारी के लिए बता दें कि भारत सरकार 12 से 18 साल के बच्चों को जॉयडस कैडिला की वैक्सीन लगाने की तैयारी कर रही है. स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के अवर सचिव सत्येंद्र सिंह ने 15 जुलाई के एक हलफनामे में कहा था कि डीएनए वैक्सीन विकसित करने वाली जायडस कैडिला ने 12-18 आयु वर्ग के लिए अपना क्लिनिकल ट्रायल (clinical trial) सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है.

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