scorecardresearch
 

'सिनेमा हॉल जिम नहीं', थियेटर में बाहर का खाना ले जाने के मसले पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट में इस मुद्दे पर सुनवाई चल रही है कि सिनेमा हॉल में बाहर का खाना ले जाने की अनुमति मिलनी चाहिए या नहीं? जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट इसकी अनुमति दे चुका है, जिसके खिलाफ जम्मू-कश्मीर सिनेमा हॉल ऑनर्स एसोसिएशन सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है. आज हुई सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे पर कई टिप्पणियां की हैं.

Advertisement
X
सुप्रीम कोर्ट (File Photo)
सुप्रीम कोर्ट (File Photo)

सिनेमा हॉल में बाहर का खाना ले जाने की अनुमति मिलनी चाहिए या नहीं? इस मुद्दे पर जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट ने एक आदेश दिया था कि सिनेमा हॉल में बाहर का खाना ले जाने की अनुमति होनी चाहिए. हाई कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ जम्मू-कश्मीर सिनेमा हॉल ऑनर्स एसोसिएशन सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया.

Advertisement

इस मसले पर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सिनेमा हॉल जिम नहीं है, जहां आपको पौष्टिक भोजन चाहिए. वह मनोरंजन की जगह है. सिनेमा हॉल प्रबंधन की निजी संपत्ति है, लिहाजा वहां चलेगी तो उनकी ही.

सुप्रीम कोर्ट ने इन टिप्पणियों के साथ जम्मू कश्मीर हाईकोर्ट के आदेश को दरकिनार कर दिया. इस आदेश में हाईकोर्ट ने बाहरी खाना-पीना हॉल में ले जाने की इजाजत दी थी. सुप्रीम कोर्ट ने उस आदेश को अनुचित बताते हुए कहा कि ये आदेश देते हुए हाईकोर्ट ने अपने अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन किया है. 
 
सुप्रीम कोर्ट जम्मू-कश्मीर के एक सिनेमा हॉल में बाहर से लाए गए भोजन पर पाबंदी लगाई जाने के खिलाफ जम्मू कश्मीर सिनेमा हॉल ऑनर्स एसोसिएशन की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई कर रहा है. चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस पीएस नरसिम्हा की पीठ ने सुनवाई के दौरान कई दिलचस्प टिप्पणियां कीं. 

Advertisement

सीजेआई ने कहा कि कोई सिनेमा घर में जलेबी लेकर जाना चाहे तो सिनेमा हॉल प्रबंधन उसे ये कहते हुए मना कर सकता है कि अगर जलेबी खाकर दर्शक ने सीट से अपने चाशनी वाली अंगुलियां पोंछ ली तो खराब हुई सीट की सफाई का खर्च कौन देगा? सिनेमा हॉल प्रबंधन को ये भी शिकायत है कि लोग मुर्ग-मुसल्लम लेकर आते हैं. बाद में उनकी हड्डियां वहीं छोड़ जाते हैं. उससे भी कुछ लोगों को परेशानी होती है. 

चीफ जस्टिस ने कहा कि जब टीवी पर 11 बजे के बाद कुछ 'खास' वर्ग की फिल्मों के प्रसारण का नियम बनाया गया तो उसका मकसद ये था की बच्चों के सोने के बाद वयस्क लोग वो फिल्में देख सकें. लेकिन इस पर भी कई लोगों को आपत्ति थी. उनका कहना था कि उस देर रात में वयस्क तो खाना-पीना खा पी कर सो जाते हैं. बच्चे ही जागे रहते हैं. लिहाजा उस वक्त वयस्कों वाली फिल्में न दिखाई जाएं. 

दरअसल दो वकीलों ने जम्मू कश्मीर हाईकोर्ट के 18 जुलाई 2018 को दिए फैसले को यहां सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है. जम्मू में बाहरी खाद्य पदार्थ सिनेमा हॉल में ले जाने पर पाबंदी लगाते हुए नोटिस चस्पा कर दिए थे. 
इस पर याचिकाकर्ता ने दलील दी कि थिएटर वाले अपने परिसर में ही बिकने वाले खाद्य सामान ही खरीद कर खाने को मजबूर करते हैं. वो सामान पौष्टिक हों ये कोई जरूरी नहीं है. 

Advertisement

हाईकोर्ट ने कहा कि इस पाबंदी का नतीजा ये हुआ है कि दर्शक वहीं बिकने वाले सामान खरीदने को मजबूर होते हैं. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि छोटे बच्चों के लिए पीने का स्वच्छ पानी वहां मुफ्त उपलब्ध कराने के आदेश पहले से ही दे रखे हैं. कोर्ट ने कहा कि ये दर्शकों का अधिकार और इच्छा है कि वो किस थिएटर में कौन सी फिल्म देखने जाएं वैसे ही हॉल प्रबंधन को भी अधिकार है कि वहां क्या-क्या नियम बनाते हैं.

Advertisement
Advertisement