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Delhi Crime: रेप के दोषी को 20 साल की कठोर सजा, 13 लाख का जुर्माना

दिल्ली की एक अदालत ने आठ साल की बच्ची के साथ बलात्कार के मामले में 28 वर्षीय शख्स को 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई और 20 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया. सजा सुनाते हुए अदालत ने कहा कि कि बच्चे के साथ बलात्कार जघन्य अपराध है. 

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(प्रतीकात्मक फोटो)
(प्रतीकात्मक फोटो)

दिल्ली की एक अदालत ने आठ साल की बच्ची के साथ बलात्कार के मामले में 28 वर्षीय शख्स को 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाते हुए कहा कि बच्चे के साथ बलात्कार जघन्य अपराध है. अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश बबीता पुनिया उस मामले में सजा पर बहस सुन रही थीं, जिसमें आरोपी को आईपीसी की धारा 376 (2) (16 साल से कम उम्र की लड़की से बलात्कार) के तहत दोषी ठहराया गया था.

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विशेष लोक अभियोजक शरवन कुमार बिश्नोई ने इस घिनौने कृत्य के लिए अधिकतम सजा की मांग की. अदालत ने अपने 11 नवंबर के फैसले में कहा, बच्चे के साथ बलात्कार जघन्य अपराध है. बच्चे समाज की सबसे बहुमूल्य संपत्ति हैं. समाज का कर्तव्य है कि वह ना केवल उन्हें यौन हिंसा और शोषण से बचाए, बल्कि उन्हें खुश भी रखें. 

रेप के दोषी को 20 साल की कठोर सजा

अदालत ने यह भी कहा कि दोषी ने बच्ची के साथ उस समय अपहरण और बलात्कार किया, जब वह 3 अप्रैल 2016 को नूडल्स खरीदने एक दुकान की ओर जा रही थी. वो एक साधारण और खुशहाल बाहरी अनुभव होना चाहिए था, वह बच्ची के लिए एक हिंसक और दर्दनाक अनुभव बन गया. जो उसके जीवनभर के लिए उसकी यादों में रहेगा.

न्यायाधीश ने यह तर्क भी खारिज कर दिया कि चूंकि यह डिजिटल पेनिट्रेशन का मामला था, इसलिए इसे नरम दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए. उन्होंने कहा, "मैं इस बात से सहमत नहीं हूं. विधायिका ने डिजिटल पेनिट्रेशन और पीनाइल पेनिट्रेशन के बीच कोई भेद नहीं किया है. बलात्कार कानून के अनुसार, पेनिट्रेशन पीनाइल/योनि, पीनाइल/मौखिक, पीनाइल/गुदा, वस्तु या उंगली/योनि, और वस्तु या उंगली/गुदा पेनिट्रेशन के रूप में हो सकता है.

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दोषी पर लगाया 13.5  लाख रुपये का जुर्माना 

न्यायाधीश ने कहा कि सजा में अपराध और सजा के बीच सही संतुलन होना चाहिए. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि मैं 20 साल के कठोर कारावास की सजा को उपयुक्त मानता हूं. मेरे विचार में यह सजा उचित प्रतिशोध प्रदान करेगी, समाज को पर्याप्त सुरक्षा देगी, दोषी को उसके कृत्य की गंभीरता का एहसास कराएगी, साथ ही उसे पुनर्वास का अवसर भी देगी. अदालत ने पीड़िता को 13.5 लाख रुपये का मुआवजा भी देने का आदेश दिया. 

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