दिल्ली हाईकोर्ट ने हाल ही में आत्महत्या करने वाले एक शख्स के शुक्राणु संरक्षित करने की अनुमति दी है. जस्टिस सचिन दत्ता ने मृतक के परिवार की याचिका पर यह आदेश दिया. याचिकाकर्ताओं ने पोस्टमार्टम स्पर्म रिट्रीवल (PMSR) प्रक्रिया के माध्यम से मृतक के शुक्राणु संरक्षित करने की मांग की थी.
अदालत ने 24 जनवरी को दिए अपने आदेश में संबंधित अस्पताल को निर्देश दिया कि इस प्रक्रिया को किसी ऐसे अस्पताल में करवाने का प्रयास किया जाए, जहां यह संभव हो. प्रक्रिया का पूरा खर्च याचिकाकर्ताओं को वहन करना होगा.
हाईकोर्ट ने दिया मृत शख्स के शुक्राणु संरक्षित करने का आदेश
जस्टिस दत्ता ने कहा कि retrieved शुक्राणु को संरक्षित रखा जाए और इस मामले में आगे की सुनवाई तक यह आदेश लागू रहेगा. अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यह निर्देश मामले की संवेदनशीलता और तात्कालिकता को देखते हुए दिया गया है, क्योंकि यह प्रक्रिया समय पर ही प्रभावी हो सकती है.
शख्स ने 25 जनवरी को आत्महत्या की थी
याचिकाकर्ता ने अदालत में यह भी तर्क दिया कि भारतीय कानून के तहत शुक्राणु नमूना मृत व्यक्ति की संपत्ति के रूप में माना जाता है. मृतक व्यक्ति ने 25 जनवरी को आत्महत्या की थी. इस मामले की अगली सुनवाई 8 जुलाई को होगी.
बता दें, मृत व्यक्ति के शुक्राणुओं को निकालने की प्रक्रिया को मरणोपरांत शुक्राणु पुनर्प्राप्ति (PMSR) कहते हैं. इस प्रक्रिया के जरिए, मृत व्यक्ति के वृषण से शुक्राणु निकाले जाते हैं. इन शुक्राणुओं का इस्तेमाल प्रजनन के लिए किया जा सकता है.